क्या शिशु को दूध पिलाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है?

पहली बार मां बनने वाली अक्सर एक सवाल करती हैं कि क्या उन्हें ब्रेस्टफीडिंग करवाने की वजह से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है?

Ashu Kumar Das
Written by: Ashu Kumar DasPublished at: Aug 10, 2022Updated at: Aug 10, 2022
क्या शिशु को दूध पिलाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है?

नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। मां के दूध के जरिए ही बच्चे को सभी पोषक तत्व मिलते हैं। मां के दूध में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बच्चे के पाचन में मदद करते हैं और पेट में अच्छे बैक्टीरिया बनाए रखता है। डॉक्टरों का कहना है कि शिशुओं की अच्छी सेहत के लिए मां को कम से कम 6 महीने तक स्तनपान करवाना चाहिए। शिशुओं को स्तनपान करवाने का मतलब ये है कि आपका खानपान अच्छा होगा, आप खुद को हाइड्रेटेड रखें, ताकि आपका शरीर सही और शिशु के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध का निर्माण कर सके। छोटे बच्चों को स्तनपान करवाने वाली महिलाएं अक्सर एक सवाल करती हैं कि क्या उन्हें इससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है?

ब्रेस्टफीडिंग कराने डिहाइड्रेशन हो सकता है?

ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाओं को एक आम महिला की तुलना में ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रेस्ट मिल्क में 80 प्रतिशत से ज्यादा पानी पाया जाता है। फीडिंग के दौरान अगर मां कम पानी पीती है, तो इसका प्रभाव दूध पर भी पड़ता है। महिला के शरीर में दूध का पर्याप्त मात्रा बन सके और उसे पानी की कमी महसूस न हो इसलिए उसे ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ और पानी पीने की सलाह दी जाती है। जो महिलाएं पहली बार मां बनती हैं उन्हें डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। डिहाइड्रेशन की समस्या इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन कर रही हैं। यदि आप सही मात्रा में फ्लूइड वाली चीजें, पानी और सूप और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते हैं, तो आपको डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होगी। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ब्रेस्टफीडिंग करवाने महिलाओं को प्रतिदिन 2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए।

 

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एक्स्ट्रा फ्लूइड का सेवन है जरूरी

ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाओं को एक्स्ट्रा फ्लूइड का सेवन करने की सलाह दी जाती है, ताकि ब्रेस्ट मिल्क का प्रोडक्शन सही तरीके से हो सके। डॉक्टरों का कहना है कि अगर एक मां डिहाइड्रेटेड रहती है, तो उसके शरीर में पर्याप्त मात्रा में दूध का निर्माण नहीं हो पाता है। डिहाइड्रेशन की वजह से ब्रेस्ट मिल्क का कम्पोजीशन भी बदल जाता है, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान डिहाइड्रेशन के लक्षण

  • थकान
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • चक्कर आना
  • दूध के प्रोडक्शन में कमी आना
  • ब्रेस्ट का हल्का महसूस होना
  • मुंह में हमेशा सूखापन महसूस होना
  • सिर में दर्द या पेट में दर्द महसूस होना

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ब्रेस्टफीडिंग के दौरान डिहाइड्रेशन से बचाव कैसे करें

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाएं अगर डिहाइड्रेशन की समस्या से बचना चाहती हैं, तो इसके लिए अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें। आप अपनी डाइट में पानी के साथ ताजे फलों का जूस, नारियल पानी, मिल्क या स्मूदी को शामिल कर सकती हैं।

ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को डिहाइड्रेशन की समस्या न हो इसके लिए आप खीरा, सलाद, तरबूज, टमाटर, तोरी, मूली, पालक, ब्लू बेरी और गाजर जैसे फल-सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं।

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शरीर में पानी की कमी होने के कारण कई बार महिलाओं को सिर दर्द, उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में  ओआरएस का सेवन करें।

अगर आपको ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ज्यादा तबीयत खराब होती है या पानी की कमी ज्यादा महसूस होती है, तो इसके लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

 
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