ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हैं हाथ पैर में कमजोरी होना, जानें कारण और बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 18, 2018
Quick Bites

  • हाथ-पैरों में अचानक आयी कमजोरी ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं।
  • ब्रेन स्ट्रोक से देश में प्रति वर्ष एक हजार में से 1.54 व्यक्ति की मौत हो जाती है।
  • इस कारण लकवा, याददाश्त जाने की समस्या जैसी स्थिति होने की संभावना होती है।

बदलती जीवनशैली में सिर्फ एक बीमारी कई बीमारियों की वजह बनती जा रही है। इन्हीं जानलेवा बीमारियों में से एक है ब्रेन स्ट्रोक। हाथ-पैरों में अचानक आयी कमजोरी ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। ये बातें रविवार को ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. एन परवेज ने कहीं। डॉक्टर्स का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक से देश में प्रति वर्ष एक हजार में से 1.54 व्यक्ति की मौत हो जाती है। इसमें रक्त संचरण में रूकावट आने के कुछ ही मिनटो में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं क्योंकि ऑक्सीजन की सप्लाई रूक जाती है और मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली नलिकाएं फट जाती हैं। इस कारण लकवा, याददाश्त जाने की समस्या, बोलने में असमर्थता जैसी स्थिति होने की संभावना होती है। इसके प्रति लोगों को जागरूक होना होगा। इस अवसर पर शहर के कई चिकित्सक उपस्थित थे।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण

  • मांसपेशियों का विकृत हो जाना।
  • हाथों और पैरों में कमजोरी महसूस होना।
  • सिर में तेज दर्द होना।
  • देखने में परेशानी।
  • याद्दाश्त कमजोर हो जाना।

क्या है कारण

मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण या उनके फट जाने के कारण ब्रेन अटैक होता है। इन नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण आर्टियो स्क्लेरोसिस है। इसके कारण नलिकाओं की दीवारों में वसा, संयोजी उत्तकों, क्लॉट, कैल्शियम या अन्य पदार्थो का जमाव हो जाता है। इस कारण नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं।

ब्रेन स्ट्रोक का इलाज

  • इस्कीमिक स्ट्रोक का इलाज करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर को जल्द से जल्द मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बहाल करना होता है। दवाओं के जरिये आपातकालीन उपचार के अंतर्गत थक्के को घुलाने वाली थेरेपी स्ट्रोक के तीन घंटे के भीतर शुरू हो जानी चाहिए। अगर यह थेरेपी नस के जरिये दी जा रही है, तो जितना शीघ्र हो, उतना अच्छा है। शीघ्र उपचार होने पर न केवल मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है बल्कि जटिलताएं होने के भी खतरे घट जाते हैं।
  • इसके अलावा एस्पिरिन नामक दवा भी जाती है। एस्पिरिन रक्त के थक्के बनने से रोकती है। इसी तरह टिश्यू प्लाजमिनोजेन एक्टिवेटर संक्षेप में 'टीपीए (रक्त के थक्के को दूर करने की दवाई) का नसों में इंजेक्शन भी लगाया जाता है। टीपीए स्ट्रोक के कारण खून के थक्के को घोलकर रक्त के प्रवाह को फिर बहाल करता है।
  • मस्तिष्क तक सीधे दवाएं पहुंचाना डॉक्टर पीडि़त व्यक्ति के कमर (जांघ)की एक धमनी(आर्टरी) में एक लंबी, पतली ट्यूब (कैथेटर) को डालकर इसे मस्तिष्क में स्ट्रोक वाली जगह पर ले जाते हैं। कैथटर के माध्यम से उस भाग में टीपीए को इंजेक्ट करते हैं।
  • यांत्रिक रूप से थक्का हटाना:डॉक्टर यांत्रिक रूप से क्लॉट को तोड़ने और फिर थक्के को हटाने के लिए पीडि़त शख्स के मस्तिष्क में एक छोटे से उपकरण को डाल सकते हैं और इसके लिए वे एक कैथेटर का उपयोग कर सकते हैं।

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