तनाव से होती है ये 10 जानलेवा बीमारी, जानें एक्‍सपर्ट की राय

By  ,  सखी
Nov 24, 2017
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Quick Bites

  • ब्रेन को भी आराम की ज़रूरत होती है
  • जब इस पर कार्य क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है
  • तो यह उसके भार को वहन नहीं कर पाता

आजकल हम जब भी किसी का हाल पूछते हैं तो उसका एक ही जवाब होता है, क्या बताऊं, बहुत टेंशन में हूं, मेरा मूड खराब हो गया, मैं इतने स्ट्रेस में था कि मुझे रात भर नींद नहीं आई....ये कुछ ऐसे आम जुमले हैं, जिनका इस्तेमाल ज्य़ादातर लोग अपनी बोलचाल मे अकसर करते हैं। लोगों को खुद भी इस बात का अंदाज़ा नहीं होता था कि वाकई उन्हें तनाव हो रहा है और उनकी परेशानी की असली वजह क्या है? यहां फोर्टिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. प्रवीण गुप्ता बता रहे है, इस समस्या के कारणों और उसके समाधान के बारे में।

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क्या है तनाव

शरीर के अन्य हिस्सों की तरह ब्रेन को भी आराम की ज़रूरत होती है। जब इस पर कार्य क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है तो यह उसके भार को वहन नहीं कर पाता। जब इसके न्यूरोट्रांस्मीटर्स समस्याओं का हल ढूंढते हुए थक जाते हैं तो सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षणों के रूप में व्यक्ति का तनाव प्रकट होता है। हालांकि तनाव सापेक्षिक है। अर्थात इसे किसी निश्चित पैमाने से मापना मुश्किल है। हर व्यक्ति के लिए इसका स्तर अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोग छोटी-छोटी बातों से तनावग्रस्त हो जाते हैं तो कुछ बड़ी मुश्किलों को भी बहुत आसानी से हल कर लेते हैं।

सेहत पर प्रभाव

तनाव की वजह भले ही मनोवैज्ञानिक हो लेकिन व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। हमारे शरीर में ब्रेन मास्टर कंप्यूटर की तरह काम करता है। जब व्यक्ति किसी वजह से तनावग्रस्त होता है तो इससे उसे कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं परेशान करने लगती हैं, जो इस प्रकार हैं :  

अनिद्रा : तनाव का सबसे पहला असर व्यक्ति की नींद पर पड़ता है। जब इससे लडऩे के लिए ब्रेन में मौज़ूद सिंपैथेटिक नर्व ट्रांस्मीटर्स अधिक सक्रिय जाते हैं तो इससे व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या होती है।  

सर्दी-ज़ुकाम और बुख्रार : जो लोग अकसर परेशान रहते हैं, उनके ब्रेन के न्यूट्रांस्मीर्टस तनाव से लड़कर दुर्बल हो जाते हैं। इससे शरीर बुखार का इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ जाता है। यही वजह है कि तनाव होने पर सर्दी-ज़ुकाम और बुखार जैसी समस्याएं बार-बार परेशान करती हैं।  

हाई ब्लडप्रेशर : तनाव में शरीर की ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। ऐसे में रक्त प्रवाह का तेज़ होना स्वाभाविक है, जिससे व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। अगर सही समय पर इसे नियंत्रित न किया जाए तो यही समस्या हृदय रोग का भी कारण बन जाती है।

डायबिटीज़ : तनाव की वजह से शुगर को ग्लूकोज़ में परिवर्तित करने वाले आवश्यक हॉर्मोन इंसुलिन के सिक्रीशन में रुकावट आती है और इससे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है।

श्वसन-तंत्र संबंधी समस्याएं : तनाव की स्थिति में सांसों की गति बहुत तेज़ हो जाती है। इससे कई बार व्यक्ति में एस्थमा जैसे लक्षण नज़र आते हैं। अगर किसी को पहले से ही यह बीमारी हो तो तनाव इसे और भी बढ़ा देता है।

माइग्रेन : जब स्थितियां प्रतिकूल होती हैं तो ब्रेन को एडजस्टमेंट के लिए जयादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे व्यक्ति को स्ट्रेस होता है। तनाव से लडऩे के लिए ब्रेन से कुछ खास तरह के केमिकल्स का सिक्रीशन होता है और उसकी नव्र्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे व्यक्ति को अस्थायी लेकिन तेज़ सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।    

स्पॉण्डिलाइटिस : जब व्यक्ति बहुत ज्य़ादा तनावग्रस्त होता है तो उसकी गर्दन और कंधे  की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। इससे उसे तेज़ दर्द महसूस होता है। गंभीर स्थिति में नॉजि़या और वोमिटिंग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।     
पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं : जब व्यक्ति जयादा टेंशन में होता है तो प्रतिक्रिया स्वरूप आंतों से हाइड्रोक्लोरिक एसिड का सिक्रीशन असंतुलित ढंग से होने लगता है। ऐसी स्थिति में लोगों को आईबीएस (इरिटेटिंग बावल सिंड्रोम) की समस्या हो जाती है। पेट दर्द, बदहज़मी, लूज़ मोशन या कब्ज़ जैसी परेशानियों के रूप में इसके लक्षण नज़र आते हैं। एसिड की अधिकता से लूज़ मोशन और उसकी कमी से $कब्ज़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  

ओबेसिटी : लोगों को खुद भी इस बात का अंदाज़ा नहीं होता पर तनाव की स्थिति में अकसर वे बार-बार फ्रिज खोल कर चॉकलेट, पेस्ट्री और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसी नुकसानदेह चीज़ों का सेवन करने लगते हैं। इससे उनका वज़न बढ़ जाता है।     

त्वचा संबंधी समस्याएं : तनाव की वजह से व्यक्ति की त्वचा भी प्रभावित होती है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार जब व्यक्ति अधिक चिंतित होता है तो उसके शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन कार्टिसोल का स्राव बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति को त्वचा में जलन की समस्या हो सकती है। इससे बचाव के लिए यह हॉर्मोन त्वचा की फैट ग्लैंड्स को एंटी-इंफ्लेमेट्री ऑयल के सिक्रीशन का निर्देश देता है। इसी वजह से तनाव की स्थिति में लोगों को एक्ने और स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं होती हैं।      

डिमेंशिया : स्ट्रेस की वजह से जब व्यक्ति की नींद पूरी नहीं होती तो उसके ब्रेन में स्मृतियों का संग्रह नहीं हो पाता, जिससे रोज़मर्रा के कामकाज में वह ज़रूरी बातें भी भूलने लगता है। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो कुछ समय के बाद यही समस्या अल्ज़ाइमर्स जैसी गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेती है।    

प्रजनन तंत्र पर प्रभाव : तनाव की वजह व्यक्ति के शरीर में हॉर्मोन संबंधी असंतुलन पैदा होता है। इससे स्त्रियों को पीरियड्स में अनियमितता, पुरुषों में प्रीमच्योर इजैक्युलेशन के अलावा सेक्स के प्रति अनिच्छा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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