ब्रेन हेमरेज कैसे होता है? जानें मस्तिष्क की इस गंभीर बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के टिप्स

मस्तिष्क में होने वाली समस्याएं आपके पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। ब्रेन हेमरेज मस्तिष्क से जुड़ी एक बहुत ही गंभीर स्थिति है।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Mar 26, 2022Updated at: Mar 26, 2022
ब्रेन हेमरेज कैसे होता है? जानें मस्तिष्क की इस गंभीर बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के टिप्स

ब्रेन हेमरेज क्या है? क्या आप इस बारे में जानते हैं? हम में से कई लोग जानते हैं कि मस्तिष्क हमारे शरीर का अहम हिस्सा है। इसमें अगर जरा सी भी समस्या हो जाए, तो इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ सकता है। ऐसे में मस्तिष्क को सुरक्षित रखना बहुत ही जरूरी है। मस्तिष्क में कई तरह की समस्याएं होती हैं। इन्हीं समस्याओं में ब्रेन हेमरेज भी शामिल है। हेमरेज को मानसिक दौरा यानी स्ट्रोक (brain hemorrhage in Hindi) भी कहते हैं। यह समस्या मस्तिष्क की धमनी फटने की (What is brain hemorrhage) वजह से होती है। आज हम इस लेख में ब्रेन हेमरेज के बारे में विस्तार से जानेंगे। आइए जानते हैं ब्रेन हेमरेज क्या है, इसके लक्षण (brain hemorrhage Symptoms) , कारण और बचाव के टिप्स  - 

ब्रेन हेमरेज क्या है ? ( What is Brain brain hemorrhage )

ब्रेन हेमरेज एक ऐसी स्थिति है, जो आर्टरी (हृदय से लेकर शरीर के अन्य हिस्सों में ब्लड पहुंचाने वाली नलियां) के फटने की वजह से होता है। इस स्थिति में आसपास के टिश्यूज में ब्लीडिंग होने लगती है। इस स्थिति में होने वाली ब्लीडिंग की वजह से मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। साथ ही यह दिमाग के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाने सगती है। साधारण शब्दों में दिमाग में नस फटना ही ब्रेन हेमरेज कहलाता है। वहीं, नस फटने के बाद खून बहने की स्थिति ही हेमरेज स्ट्रोक(hemorrhage Stroke) कहलाती है।

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यह समस्या अधिकतर मामलों में हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित व्यक्ति, ट्रॉमा से पीड़ित व्यक्ति, दवाइयों का अधिक सेवन करने  वाले और कमजोर नस वाले व्यक्तियों को होने की आशंका अधिक होती है।

ब्रेन हेमरेज के लक्षण (Symptoms of brain hemorrhage )

शरीर में ब्रेन हेमरेज के कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि, इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि नसें कहा फटी हैं या फिर ब्लीडिंग मस्तिष्क के किस हिस्से में हो रही हैं। ब्रेन हेमरेज एक जानलेवा स्थिति होती है। ऐसे में इसके लक्षण दिखने पर तुरंत मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं इसके कुछ लक्षणों के बारे में-

  • सुस्ती जैसा महसूस होना। 
  • अचनाक से सिरदर्द होना।
  • दौरे पड़ना।
  • उल्टी और मतली जैसा अनुभव होना। 
  • देखने में काफी ज्यादा परेशानी होना। 
  • निकलने में परेशानी
  • चक्कर आना। 
  • शरीर के अन्य हिस्से शिथिल हो जाना। 
  • बेहोशी जैसा अनुभव होना।
  • हाथ-पैरों में हाथ-मेल बैठाना में असमर्थ महसूस होना इत्यादि।

ब्रेन हेमरेज के कारण (Symptoms of brain hemorrhage )

ब्रेन हेमरेज के कई कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके कुछ सामान्य कारणों के बारे में-

  • सिर में चोट लगना।
  • हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी होना।
  • आर्टरी का बाहरी हिस्सा कमजोर होना।
  • आर्टरी में सूजन होना
  • ब्लड सर्कुलेशन होने में परेशानी
  • ब्लड से जुड़ी कोई बीमारी से ग्रसित होना (हीमोफिलिया, प्लेटलेट्स की कमी, स्किल सेल एनीमिया इत्यादि।)
  • मस्तिष्क में ट्यूमर होना।
  • लिवर डिजीज होना इत्यादि।

ब्रेन हेमरेज से बचाव के टिप्स (How to Prevent Brain Hemorrhage)

ब्रेन हेमरेज से बचाव जोखिक कारणों को कम करके किया जा सकता है। साथ ही आप अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके भी ब्रेन हेमरेज की परेशानी से बच सकते हैं। आइए जानते हैं इस बारे में-

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  • हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखके रखें। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो समय पर अपना इलाज कराएं। रोजाना एक्सरसाइज करें और नियमित रूप से बीपी चेक कराएं। 
  • धूम्रपान पीने वालों को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। इसकी वजह से ब्लड वेसेल्स कमजोर होते हैं, जिसके कारण हेमरेज की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें। 
  • दिमाग में चोट लगने पर ब्रेन हेमरेज की स्थिति हो सकती है। ऐसे में हमेशा गाड़ी चलाते वक्त हेलमेट पहनना न भूलें। 
  • अधिक मात्रा में दवाइयों के सेवन से बचें। ड़ॉक्टर की सलाह पर ही दवाइयों का सेवन करें।  

ब्रेन हेमरेज एक जानलेवा स्थिति है। इसलिए इस परेशानी में लिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें। वहीं, अपने लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाए रखें। ताकि किसी भी तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। वहीं, ध्यान रखें कि शरीर में होने वाली किसी भी स्थिति में खुद का इलाज न करें। डॉक्टर से परामर्श लेकर ही अपना इलाज कराएं। 

 

 

 

 

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