बीड़ी पीने से बढ़ रहा है एसोफैगिटिस रोग, उत्तराखंड पहले और दिल्ली-यूपी दूसरे स्थान पर

बीड़ी पीना एक ऐसी आदत है जो छुड़ाए नहीं छूटती है। यदि एक बार किसी को यह आदत लग गई तो लाख कोशिशों के बाद भी बहुत मुश्किल से इसे कंट्रोल किया जाता है। 

Rashmi Upadhyay
अन्य़ बीमारियांWritten by: Rashmi UpadhyayPublished at: Dec 24, 2018Updated at: Dec 24, 2018
बीड़ी पीने से बढ़ रहा है एसोफैगिटिस रोग, उत्तराखंड पहले और दिल्ली-यूपी दूसरे स्थान पर

बीड़ी पीना एक ऐसी आदत है जो छुड़ाए नहीं छूटती है। यदि एक बार किसी को यह आदत लग गई तो लाख कोशिशों के बाद भी बहुत मुश्किल से इसे कंट्रोल किया जाता है। बीड़ी पीना न सिर्फ सिगरेट पीने से ज्यादा नुकसानदायक होता है बल्कि इससे कई गंभीर रोगों के होने का खतरा भी रहता है। हाल ही में आई एक रिसर्च में कहा गया है कि बीड़ी पीने वाले लोगों में एसाफैगिटिस रोग का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य में लोग सबसे ज्यादा बीड़ी पीते हैं। इसके बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार का नंबर आता है। एसोफैगिटिस वह रोग है जो गले से पेट तक जाने वाली नली में होता है। एसोफेगल कैंसर, एसोफेगस में कोशिकाओं की असामान्य बढ़ोत्तरी होती है। दरअसल, हमारे गले से पेट तक एक नली जाती है। हम जो भी खाते हैं वह इसी नली से जाता है। इस नली का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी होता है। लेकिन यदि किसी कारणवश इसमें दर्द या जलन होने लगे तो यह एसोफैगिटिस, पेट का अल्सर या एसोफैगस कैंसर का संकेत हो सकता है। आपको बता दें कि बीड़ी इन सभी रोगों को न्यौता देता है।

क्या है एसोफैगस

एसोफेगस जहां पर पेट से जुड़ती है वहां इसकी परत एक अलग प्रकार की कोशिकीय बनावट की होती है, जिसमें विभिन्न केमिकल्स का रिसाव करने वाली अनेक ग्रंथियां या संरचनाएं होती हैं। यदि एसोफेगस का कैंसर उस हिस्से से शुरू होता है जहां पर ट्यूब पेट से मिलता है, तो इस कैंसर को स्क्‍वामस सेल कार्सिनोमा कहते हैं। यदि यह एसोफेगस के ग्रंथियों वाले हिस्से से शुरू होता है तो इसे एडेनोकार्सिनोमा (ग्रंथियों की बनावट वाले हिस्सें का कैंसर) कहते हैं।

एसोफैगल कैंसर के कारण

  • जिन लोगों की उम्र 50 से अधिक होती है उनमें एसोफैगल कैंसर पाये जाने की आशंका अधिक होती है। इसलिए इस उम्र के लोगों को इसके लक्षणों के प्रति सचेत रहना चाहिए। और किसी भी प्रकार की आशंका हो, उन्‍हें डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।
  • पुरुषों को एसोफैगल कैंसर होने का खतरा महिलाअों के मुकाबले अधिक होता है। एक अनुमान के अनुसार महिलाओं की तुलना में पुरूषों में इस रोग का खतरा प्राय: तीन गुना तक अधिक होता है।
  • स्क्‍वामस सेल एसोफैगल कैंसर श्वेत लोगों की तुलना में प्राय: अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों में तीन गुना अधिक पाया जाता है। हालांकि अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों की तुलना में काकेशियन लोगों में लोअर एसोफेगस के एडेनोकार्सिनोमा के मामले ज्यादा पाए जाते हैं।
  • शराब अत्यधिक पीना, विशेषकर जब इसके साथ तम्बाकू भी प्रयोग की जा रही हो, जोखिम बढ़ाता है। यह भी स्क्‍वामस सेल एसोफेगल कैंसर के लिए बिल्कुल सत्य है।
  • ऐसा आहार जिसमें फलों, सब्जियों और कुछ विटामिन्‍स व खनिजों की मात्रा कम हो उससे एसोफेगल कैंसर का खतरा अधिक हो जाता है। भोजन के नाइट्रेट और अचार वाली सब्जियों के फंगल टॉक्सिन का सम्बन्ध भी एसोफेगल कैंसर से पाया गया है।

एसोफैगस की बीमारी से बचने के नुस्खे

  • सौंफ, आंवला व गुलाब के फूलों को बराबर हिस्से में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम लेने से भी इस समस्या में लाभ होता है। अदरक और परवल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से भी फायदा होता है।
  • कच्ची सौंफ चबाने से फायदा होता है। सुबह के समय खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिड रिफ्लक्स में राहत मिलती है। नारियल पानी पीने से भी इससे छुटकारा मिलता है।
  • खानपान में अनियमितता के कारण होती है। इसलिए गरिष्‍ठ भोजन करने से परहेज करें। एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए रात को सोने से तीन घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए।
  • इससे बचने के लिए भोजन करने के बाद गुड़ जरुर खाएं। ऐसा करने से एसिड की समस्या नहीं होती है।
  • एक कप पानी उबालें, इसमें एक चम्‍मच सौंफ मिलाकर रात भर ढ़क कर रख दें। सुबह में पानी को छानकर इसमें एक चम्‍मच शहद मिलाकर, भोजन के बाद इस मिश्रण को पी लें।
  • एक गिलास गर्म पानी में चुटकी भर पिसी हुई काली मिर्च और आधे नींबू का रस मिलाकर नियमित सेवन करें। सलाद में काला नमक लगी हुई मूली को शामिल करें। यह आपको एसिड की समस्या से बचाएगा।
  • एसोफैगस में किसी भी प्रकार का दर्द या जलन होने पर मुलेठी का चूर्ण या काढ़ा बनाकर उसका सेवन करें। इससे फायदा होगा।
  • नीम की छाल का चूर्ण या फिर रात में भिगोकर रखी छाल का पानी सुबह छानकर पीने से राहत मिलती है।
  • त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करने से भी फायदा मिलता है। इसे आप दूध के साथ भी ले सकते हैं। दूध में मुनक्का डालकर उबाल लीजिए और इसे ठंडा करके पी लीजिए, इससे आपको फायदा मिलेगा।

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