बेडसोर (Bed sore) के लक्षण और बचाव के टिप्स, लेटने-बैठने में त्वचा पर ज्यादा दबाव के कारण होती है ये समस्या

जब त्वचा पर दबाव पड़ता है तो त्वचा के ऊतकों को क्षति पहुंचती है, जिसके कारण बेडसोर हो सकता है। जानते हैं कारण, लक्षण और उपचार

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: May 25, 2021Updated at: May 25, 2021
बेडसोर (Bed sore) के लक्षण और बचाव के टिप्स, लेटने-बैठने में त्वचा पर ज्यादा दबाव के कारण होती है ये समस्या

बेडसोर (Bed sore), इसे दबाव अल्सर (pressure ulcer) के नाम से भी जाना जाता है। जब त्वचा पर ज्यादा दबाव पड़ता है तो त्वचा के ऊतक क्षतिग्रस्त होने शुरू हो जाते हैं, जिसके कारण त्वचा पर जख्म बन जाते हैं। आमतौर पर यह समस्या कूल्हे, एडी, टखने, शरीर के जोड़ आदि में होती है लेकिन कभी-कभी इसके कारण त्वचा का रंग बदलना शुरू हो जाता है या त्वचा की बनावट में कमी आने लगती है। आमतौर पर यह समस्या बूढ़े व्यक्तियों में ज्यादा देखी जाती है क्योंकि उनकी दिनचर्या से फिजिकल एक्टिविटीज कम हो जाती हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने लेख के माध्यम से बताएंगे कि बेडसोर के लक्षण (symptoms of Bed sore) क्या है? साथ ही इसके कारण (causes of Bed sore) और उपचार (treatment of Bed sore) के बारे में जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

 

बेडसोर के लक्षण (symptoms of Bed sore)

1 - त्वचा का रंग बदलना।

2 - त्वचा की बनावट में बदलाव आना।

3 - प्रभावित हिस्से में दर्द पैदा हो जाना।

4 - त्वचा का फटना शुरू हो जाना।

5 - त्वचा में फफोले पड़ना।

6 - प्रभावित हिस्से के तापमान का बदलना।

7 - प्रभावित हिस्से में सूजन आना।

8 - प्रभावित क्षेत्र पर घाव बन जाना और पस निकलना।

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बेडसोर के कारण (causes of Bed sore)

बता दें जब त्वचा पर दबाव पड़ना शुरू हो जाता है तो रक्त के बहाव में रुकावट आती है, जिसके कारण यह समस्या पैदा होती है। इसके मुख्य और भी कारण हैं जो इस प्रकार हैं-

1 - जब त्वचा किसी कपड़े से रगड़ जाती है या घिस जाती है तब भी बेडसोर की समस्या हो सकती है।

2 - जब शरीर के किसी हिस्से पर दबाव बनना शुरू हो जाता है तो रक्त के बहाव में रुकावट आती है। बता दें कि त्वचा के ऊतकों को ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने की जिम्मेदारी रक्त की होती है। ऐसे में जब इस कार्य में दिक्कत आती है तो ऊतकों को नुकसान पहुंचता है और खतरा बढ़ जाता है।

3 - जब त्वचा छिल जाती है तब भी यह समस्या हो जाती है।

4 - जो व्यक्ति लंबे समय तक चलता या हिलता नहीं है तब भी यह समस्या हो सकती है।

 

बेड सोर का खतरा कब बढ़ता है?

1 - जब कोई व्यक्ति शुगर की या दिल की बीमारी से ग्रस्त होता है तो उस इस बीमारी का ज्यादा खतरा बढ़ जाता है।

2 - जिन लोगों की रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार की चोट लगी होती है उन्हें भी इसका खतरा ज्यादा रहता है।

3 - जिसके शरीर में पानी की कमी हो जाती है उन्हें भी इसका खतरा ज्यादा रहता है।

4 - जो असंतुलित आहार का सेवन करते हैं तो उन्हें भी इसका खतरा ज्यादा रहता है।

5 - कुपोषण से ग्रस्त लोग इस समस्या के ज्यादा शिकार होते हैं।

बेडसोर से बचाव (treatment of Bed sore)

1 - ढ़ीले कपड़े पहने। टाइट कपड़े ना पहनें।

2 - अपनी त्वचा पर नमी बनाए रखने के लिए हमेशा मॉइस्चराइजर का प्रयोग करें।

3 - अपनी त्वचा को रगड़ने से बचाएं।

4 - सोते समय अपनी पोजीशन के साथ-साथ तकिये की स्थिति का भी ध्यान रखें।

5 - भरपूर मात्रा में पानी पिएं।

6 - संतुलित आहार लें।

7 - त्वचा में घाव हो जाने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

8 - अपनी पोजीशन को बदलते रहें।

इस समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मौखिक तौर पर परीक्षण करते हैं। वे इस तरह के सवाल पूछते हैं जैसे- दर्द कब से है? क्या आपको बेडसोर की समस्या पहले हो चुकी है? इसके लक्षण कब दिखाई दिए? पोजीशन कितनी बार बदलते हैं? अगर पहले समस्या हुई थी तो इलाज किस प्रकार से किया गया था? खानपान कैसा लेते हैं? कितने गिलास पानी पीते हैं? आदि सवाल पूछे जाते हैं। उसके बाद डॉक्टर ब्लड टेस्ट की भी सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा डॉकटर्स क्लींजिंग लोशन, एंटीबायोटिक, एंटी बैक्टीरियल आदि भी प्रोवाइड करते हैं। 

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि बेडसोर की समस्या उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो एक ही पोजीशन में सोना, उठना, बैठना आदि करते हैं। ऐसे में अगर आपको लक्षण नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

श्री राम सिंह हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली और डायरेक्टर ऑफ स्किन लेजर सेंटर नोएडा के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर टी.ए राणा (Dr. T.A.RANA) द्वारा दिए गए इनपुट्स पर बनाया गाया है। 

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