क्या संभव है फेफड़ों के कैंसर का आयुर्वेदिक इलाज? एक्सपर्ट से जानें लंग्स कैंसर में कैसे मददगार है आयुर्वेद

अगर आप भी फेफड़ों के कैंसर के लिए आयुर्वेद में इलाज तलाश रहे हैं तो एक्सपर्ट से जान लें आयुर्वेद में कितना संभव है फेफड़ों के कैंसर का इलाज।

Vishal Singh
आयुर्वेदWritten by: Vishal SinghPublished at: Jan 14, 2021
क्या संभव है फेफड़ों के कैंसर का आयुर्वेदिक इलाज? एक्सपर्ट से जानें लंग्स कैंसर में कैसे मददगार है आयुर्वेद

कैंसर कितनी खतरनाक और जानलेवा बीमारी है ये तो आप सभी जानते हैं, इसके कारण हर साल कई लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे ही फेफड़ों का कैंसर है जो कैंसर के प्रकार में से एक गंभीर और खतरनाक कैंसर है। आपको बता दें कि फेफड़ों का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा होता है और फेफड़ों के कार्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा होता है। फेफड़ों के कैंसर का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है जो लोग धूम्रपान और शराब का सेवन करते हैं, इसके कारण उन्हें फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है। लेकिन जरूरी नहीं कि जो लोग धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करते उन लोगों को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। 

जिन लोगों को फेफड़ों का कैंसर होता है उन लोगों को अक्सर ये डर रहता है कि फेफड़ों का कैंसर का इलाज काफी मुश्किल भरा है और इसके लिए कई ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में फेफड़ों के कैंसर के लिए इलाज संभव है (Ayurvedic Treatment Of Lung Cancer) जिसकी मदद से आप खतरे से बाहर निकल सकते हैं। जी हां, इस विषय पर हमने बात की डॉ. अनार सिंह आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष , शल्य तंत्र की डॉक्टर राखी मेहरा से। जिन्होंने बताया कि आयुर्वेद में कैसे फेफड़ों के कैंसर का इलाज किया जा सकता है। 

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फेफड़ों का कैंसर है खतरनाक 

डॉक्टर राखी मेहरा का मानना है कि फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer)  धूम्रपान के कारण होता है जिसके कारण भारी मात्रा में आपके फेफड़ों को नुकसान होता है। इस दौरान फेफड़ों पर कैंसर की कोशिकाएं फेफड़े को बुरी तरह से हानि पहुंचाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, जब कोई भी व्यक्ति सिगरेट पीता है तो उस दौरान सांस के जरिए धुआं आपके शरीर में जाता है जो फेफड़ों के ऊतकों में जमने लगते हैं। इसके कारण आपके फेफड़ों को लाइन करने वाली सामान्य कोशिकाएं तेजी से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जिसके बाद आपको कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं। लेकिन जरूरी है कि आप फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानें और आयुर्वेद में मौजूद उपचार का लाभ लें। एक्सपर्ट राखी मेहरा का कहना है कि आयुर्वेद में फेफड़ों के कैंसर का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, फेफड़ों के कैंसर को दो मुख्य प्रकार में दिखाया गया है जिसमें एक गैर छोटे सेल के फेफड़ों के कैंसर (Non small cell lung cancer) और दूसरा छोटे सेल के फेफड़ों का कैंसर (Small cell lung cancer)। अब इन दोनों ही प्रकार के फेफड़ों के कैंसर को इनके लक्षणों के आधार पर इनका इलाज निर्धारित किया गया है। 

फेफड़ों के कैंसर का इलाज आयुर्वेद में कितना संभव

एक्सपर्ट और डॉक्टर राखी मेहरा बताती है कि आयुर्वेद में फेफड़ों के कैंसर के लिए जड़ी-बूटियों की मदद से दवाई और इलाज के विकल्प को तलाशा गया है। जिसकी मदद से फेफड़ों के कैंसर के मरीज को आसानी से उसे बचाया जा सकता है और कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। आयुर्वेद में प्राकृतिक उपचार के लिए स्वस्थ ऊतकों को शुद्ध और बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा और जड़ी-बूटियों का एक नियम है। इतना ही नहीं एक्सपर्ट राखी मेहरा के मुताबिक, फेफडों का कैंसर (Lung Cancer)  जब अपने लक्षण पूरी तरह से नहीं भी दिखाता है उससे पहले ही आयुर्वेद इस बीमारी को पकड़ कर इसे रोकने की कोशिश कर सकता है। 

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आयुर्वेद के मुताबिक घरेलू उपचार (Ayurvedic Treatment Of Lung Cancer In Hindi)

मुलेठी

मुलेठी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आपके कैंसर के खतरे को कम करने के साथ आपको कैंसर को आगे बढ़ने से रोकता है। एक्सपर्ट राखी मेहरा ने बताया कि मुलेठी वात, कफ और पित्त को शांत कर आपको स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। इतना ही नहीं मुलेठी की मदद से आप लंबे समय तक स्वस्थ तो रह ही सकते हैं साथ ही आप पेट और फेफड़ों के कैंसर से भी बचे रहते हैं। जिन लोगों को पेट और फेफड़ों का कैंसर होता है उन लोगों को मुलेठी का सेवन करना चाहिए या इसके पानी का सेवन रोजाना सुबह के दौरान करना चाहिए, इससे आप जल्द ही कैंसर की बीमारी से खुद को बाहर निकाल सकते हैं। 

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भटकटैया

भटकटैया एक पौधा है जो पूरी तरह से कांटेदार होते हैं, इसकी जड़ें आपको कैंसर के खतरे से बाहर निकालने के साथ ही आपको स्वस्थ रख सकते हैं। फेफड़ों के कैंसर के लिए भटकटैया को कई तरह की दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है, इससे फेफड़ों के कैंसर से पूरी तरह से बचाव किया जा सकता है। एक्सपर्ट राखी मेहरा बताती हैं कि जो लोग नियमित रूप से इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल करते हैं उन लोगों को कैंसर के खतरे से बचने में मदद मिलती है और कैंसर के मरीजों को जल्द स्वस्थ होने में मदद मिलती है। आप भटकटैया का काढ़ा बनाकर रोजाना सुबह इसका सेवन कर सकते हैं। ये आपके पेट के स्वास्थ्य और फेफड़ों को पूरी तरह से स्वस्थ रख सकता है। 

आंवला

आंवला में भी ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आपको कई प्रकार के कैंसर से बचाने का काम करता है। आंवला को आयुर्वेद में एक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से कैंसर के रोगियों को स्वस्थ रखा जाता है। डॉक्टर राखी मेहरा बातती हैं कि आंवला आपके पूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है, ये आपके शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर करने के साथ आपके इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करने का काम करता है। इसके लिए आप रोजाना भुई आंवला सूखा खा सकते हैं या फिर इसका काढ़ा बनाकर सेवन कर सकते हैं। इससे फेफड़ों के कैंसर के मरीज के अलावा दूसरे कैंसर के मरीजों को भी फायदा हो सकता है। 

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त्रिफला

त्रिफला आयुर्वेद में बहुत ही गुणकारी माना जाता है, जिसकी मदद से कई गंभीर बीमारियों से निपटने के साथ लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सकता है। डॉक्टर राखी मेहरा बताती हैं कि त्रिफला में कैंसर से लड़ने वाले सभी गुण पाए जाते हैं जिसकी मदद से शरीर में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं को आगे विकसित होने में रोकता है और इसके असर को काफी हद तक कम करने का काम करता है। 

आयुर्वेद में फेफड़ों के कैंसर के लिए जरूरी बातें

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और डॉक्टर राखी मेहरा बताती हैं कि किसी भी रोग चाहे कैंसर हो या अन्य रोग के लिए आयुर्वेद में इलाज मौजूद है। आयुर्वेद में फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के लिए भी कई जड़ी-बूटियों के साथ दवाएं तैयार की गई है जिसकी मदद शरीर में हम उन तत्वों को पहुंचाने का काम करते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करते हुए उन्हें आगे बढ़ने से कम करते हैं। इसके साथ ही कोई स्नैक्स या फास्ट फूड और रेडी-टू-ईट भोजन जैसे विकल्पों को अपनी जीनवशैली से बाहर कर दें। इसके अलावा माइक्रोवेव ओवन से बचें, मांस की खपत को सीमित करें, विशेष रूप से लाल मांस। एक्सपर्ट का कहना है कि आयुर्वेद ने हमेशा दवा को तैयार करने के लिए प्रकृति की ओर से दिए गए वरदान की ओर रुख किया है, जिसकी मदद से हम फेफड़ों के कैंसर के मरीजों को स्वस्थ कर उन्हें जल्द बचा सकते हैं। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप लक्षणों को देखते के साथ ही डॉक्टर से संपर्क कर संबंधित जांच जरूर कराएं। 

(इस लेख में दी गई जानकारी डॉ. अनार सिंह आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष , शल्य तंत्र की डॉक्टर राखी मेहरा से आधारित है)।

 

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