एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद में से कौन सा है बेहतर?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 18, 2016
Quick Bites

  • आयुर्वेद सबसे प्राचीन चिकित्‍सा पद्धति मानी जाती है।
  • एलोपैथी चिकित्सा संक्रमणों से निपटने में प्रभावी होती है।
  • पुराने रोगों के लिए होम्‍योपैथी पद्धति का प्रयोग होता है।
  • तीनों पद्धतियां में अलग-अलग तरीके से इजाज होता है।

दुनियाभर में अलग-अलग जगहों पर तमाम प्रकार की चिकित्‍सा पद्धतियां मौजूद हैं। अगर भारत की ही बात करें तो यहां भी ऐसी कई चिकित्‍सा पद्धतियां हैं जिनसे साधारण और पुराने रोगों का इलाज किया जाता है। लेकिन यहां हम एलोपैथी, होम्‍योपैथी और आयुर्वेद चिकित्‍सा विधियों के बारे में बात करेंगे। आमतौर इन तीनों पद्धतियों को लेकर सभी के विचार अलग-अलग होते हैं। हालांकि इन पद्धतियों में सबसे बेहतर कौन है, इसे समझना थोड़ा जटिल हो जाता है। तो आइए हम आपको इस लेख के माध्‍यम से एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद चिकित्‍सा पद्धतियों की विशेषताओं के बारे में बता रहें है, जिससे आप खुद ही आकलन कर लेंगे कि इनमें से कौर बेहतर हो सकती है।

चिकित्‍सा पद्धति का संक्षिप्‍त इतिहास

वैसे तो आयुर्वेद भारत की सबसे प्राचीन चिकित्‍सा पद्धति है, जो आदि काल से लोगों को निरोगी काया प्रदान करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आपको बता दें कि भारत में एलोपैथी चिकित्‍सा पद्धति ब्रिटिश शासन में आई। अग्रेजों के आगमन के साथ-साथ ऐलोपैथी पद्धति यहाँ आई और ब्रिटिश राज्यकाल में शासकों से प्रोत्साहन पाने के कारण इसकी जड़ इस देश में जमी और पनपी। इस पद्धति को आज स्वतंत्र भारत में भी मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा अंग्रेजों के शासनकाल में ही होमियोपैथी पद्धति इस देश में आई और शासकों से प्रोत्साहन न मिलने के बावजूद भी यह पनपी। हालांकि उस दौरान यह राजमान्य पद्धति नहीं थी, लेकिन अब इसे भी शासकीय मान्यता मिल गई है।

homeopathy

एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद ?

माना जाता है कि अब भी एलोपैथी चिकित्सा पद्धति संक्रमणों से निपटने में सबसे प्रभावी है, इसमें कोई शक नहीं है। मगर मनुष्य की ज्यादातर बीमारियां खुद की उत्पन्न की हुई होती हैं। वे शरीर के अंदर उत्पन्न होते हैं। ऐसी पुरानी बीमारियों के लिए, एलोपैथी चिकित्सा बहुत कारगर साबित नहीं हुई है। एलोपैथी से बीमारी को सिर्फ संभाला जा सकता है। वह कभी बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती क्योंकि मुख्य रूप से इसमें लक्षणों का इलाज किया जाता है।


ज्यादातर पुरानी बीमारियों के लक्षण बड़ी समस्या का छोटा सा हिस्सा होते हैं। हम हर समय बस उन छोटे हिस्सों का इलाज करते हैं। असल में अब यह उपचार का एक स्थापित तरीका बन गया है, चाहे आपको मधुमेह हो, उच्च रक्तचाप या दमा, डॉक्टर आपसे इसी बारे में बात करते हैं कि बीमारी को संभाला कैसे जाए। वे कभी उससे छुटकारा पाने की बात नहीं करते। मगर बीमारी की लक्षणों के रूप में अभिव्यक्ति बहुत छोटी चीज होती है। जो असल में होता है, वह अधिक गहरे स्तर पर होता है, जिसे बाहरी दवाओं से ठीक नहीं किया जा सकता।


अगर आप बहुत गंभीर स्थिति में हैं, तो किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाना सही नहीं होगा। आप उसके पास तभी जाएं, जब आपके पास ठीक होने का समय हो। आपात स्थिति के लिए एलोपैथी में बेहतर व्यवस्था है। मगर जब आपकी समस्याएं हल्की होती हैं, और आप जानते हैं कि वे उभर रही हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार और दूसरी प्रणालियां उपचार के बहुत प्रभावशाली तरीके हैं।


ऐसे ही अगर होमियोपैथी चिकित्‍सा की बात की जाए तो यह दुनियाभर में एक जानी मानी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है। यह औषधियों के विषय में ज्ञान और इसके अनुप्रयोग पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। आज होमियोपैथी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। खास बात यह है की इस पद्धति में रोगी पर लगातार नजर रखते हुए रोग से उत्पन्न शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सा की जाती है अर्थात इस पद्धति में बीमारी के आधार पर नही बल्कि रोगी के तन मन के हालात को देखते हुए चिकित्सा की जाती है।

होम्योपैथी 'समः समं, शमयति' के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है समान की समान से चिकित्सा अर्थात एक तत्व जिस रोग को पैदा करता है, वही उस रोग को दूर करने की क्षमता भी रखता है। इस पद्धति के द्वारा रोग को जड़ से मिटाया जाता है।

Image Source : Getty
Read More Articles on Miscellaneous in Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES3 Votes 7288 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK