गर्भाशय से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या है तो महिलाएं जरूर करें ये 5 योगासन, एक्सपर्ट से जानें सही तरीका

असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव की स्थिति में महिलाएं बेहद परेशान रहती हैं। लेकिन इन योगासनों की मदद से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Mar 24, 2021Updated at: Mar 24, 2021
गर्भाशय से बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या है तो महिलाएं जरूर करें ये 5 योगासन, एक्सपर्ट से जानें सही तरीका

क्या आपने कभी असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव (Abnormal Uterine Bleeding) के बारे में सुना है? यह महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाली एक समस्या है, इसमें महिलाओं को महावारी के दौरान गर्भाशय से असामान्य रक्तस्त्राव यानी सामान्य से ज्यादा खून बहता है। इसका असर महिलाओं के दैनिक कार्यों पर भी पड़ता है। वे दर्द से करहाती रहती हैं। इसका उनके जीवन पर भी बुरा असर पड़ता है। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रही हैं, तो आपको घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। क्योंकि नियमित रूप से कुछ योगासन करके इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम के योग कंसल्टेंट दीपक झा से जानें असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव के लिए बेहतरीन योगासन- (Best Yogasana in Abnormal Uterine Bleeding)

वज्रासन (Vajrasana)

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असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव होने पर वज्रासन करना बेहद फायदेमंद होता है। वज्रासन करने से पाचन क्रिया ठीक से काम करती है और पेट से जुड़ी समस्याएं ठीक होती हैं। वज्रासन पीठ और पीठे के निचले हिस्से की समस्याओं में राहत दिलाता है। यह मासिक धर्म की ऐंठन को कम करता है और प्रसव पीड़ा में भी सहायक है। नियमित रूप से वज्रासन करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर एक मैट बिछा लें। इस पर घुटनों के बल बैठ जाएं। दोनों घुटनों को मिलाकर रखें। पैरों के अंगुठों को भी मिलाकर रखें और एड़ियों के बीच दूरी बनाकर रखें। अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें। आंखे बंद कर लें, धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें। इस अवस्था में 4-5 मिनट तक बैठे रहें। इस दौरान आपको अपनी पीठ और कमर एकदम सीधी रखनी हैं। घुटनों में दर्द या घुटनों की सर्जरी होने पर इस आसन को करने से बचें। रीढ़ की हड्डी में समस्या हो तो भी वज्रासन न करें। गर्भवती महिलाओं, हर्निया और अल्सर के रोगियों को इसे एक्सपर्ट की देखरेख में ही करना चाहिए।

नौकासन (Naukasana)

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नियमित रूप से नौकासन करने से महिलाओं से जुड़ी कई समस्याएं ठीक होती हैं। इससे मोटापा कम होता है। पेट की चर्बी को कम करने के लिए नौकासन करना काफी सही है। यह बॉडी को टोन करने में भी मदद करता है। डायजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाता है। इसे करने से किडनी सुचारु रूप से काम करती हैं। नौकासन करने के लिए सबसे पहले हवादार जगह पर एक मैट बिछा लें। इस पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों और हाथों को सटाकर रखें। लंबी गहरी सांस लें और छोड़ते हुए सिर, छाती, हाथों और पैरों को 45 डिग्री तक ऊपर उठाने की कोशिश करें। इस अवस्था में 30 से 60 सेकेंड तक रहें। ऐसा आप 2-3 बार कर सकते हैं। इस दौरान आपके पैर बिल्कुल मुड़े नहीं होने चाहिए। शुरुआत में आप इसे धीरे-धीरे करने की कोशिश करें। सिर और पैरों को बहुत ज्यादा ऊपर न उठाएं। जिन लोगों का हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ हो उन्हें नौकासन करने से बचना चाहिए। माइग्रेन, अस्थमा और लॉ ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी इसे नहीं करना चाहिए। इसे करने से पहले आप भुजंगासन कर सकते हैं।

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गोमुखासन (Gomukhasana)

gomukhasna

असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव होने पर गोमुखासन करना बहुत फायदेमंद होता है। नियमित रूप से इसे करने से धीरे-धीरे यह समस्या ठीक हो सकती है। इसके अलावा गोमुखासन करने से बांहों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। कूल्हे के दर्द में भी यह आसन लाभकारी है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने और बवासीर में मदद करता है। गोमुखासन सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में राहत दिलाता है। यह बॉडी को टोन करने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप किसी खुली जगह पर एक मैट बिछा लें। अपनी बायीं टांग को मोड़ें और दाएं नितंब को बाएं पैर की एड़ी पर टिकाकर बैठ जाएं। बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर पेट के साइड से पीठे की ओर पीठ पर ले जाएं। दाएं हाथ को कंधे के ऊपर करें और कोहनी से मोड़कर पीठ के पीछे ले जाएं। दोनों हाथों को लॉक कर लें। इस अवस्था में कुछ देर रुकें सांस लें और छोडें। अब अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं। इसके बाद दाएं पैर को मोड़कर ऐसा करें। इसे बार 4-5 बार कर सकते हैं। हाथों, पैरों और गर्दन में दर्द होने पर इस आसन को करने से बचें।

 

धनुरासन (Dhanurasana)

dhanurasna

धनुरासन ल्यूकोरिया, पीरियड्स और असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव के लिए बेहद लाभकारी है। नियमित रूप से इसे करने से आंतों की सफाई होती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और मानसिक विकार ठीक करने में भी मदद करता है। इसे करने से शरीर ऊर्जावान बना रहता है और शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। धनुरासन करने के लिए सबसे पहले स्वच्छ और हवादार स्थान पर एक मैट बिछा लें। इस पर पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों हाथों को पैरों की सीध में रखें। घुटनों को मोड़कर कमर के पास लाएं और हाथों से पकड़ लें। सांस लेते हुए छाती हो जमीन से ऊपर उठाएं और पैरों को कमर की तरफ खाचें। इस अवस्था में 10 से 20 सेकेंड रुकें और प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं। आपके शरीर का आकार धनुष के आकार का बन जाएगा। कमर दर्द, गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान इसे करने से बचना चाहिए।

उत्तानपादासन (Uttanpadasana)

uttapadasna

यह आसन डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसे नियमित रूप से करने पर पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। यह कमर, कूल्हे और पीठ के दर्द में भी आराम दिलाता है। वजन कम करने के लिए भी आप इस आसन को कर सकते हैं। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और महिलाओं से जुड़ी समस्याएं जैसे मासिक धर्म के दर्द और असामान्य गर्भाशय रक्तस्त्राव में भी लाभकारी है। उत्तानपादासन करने के लिए सबसे पहले मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों और घुटनों को एक साथ रखें। सांस लेते हुए दोनों पैरों को 90 डिग्री पर ले जाएं। इस दौरान आपके घुटने बिल्कुल भी मुड़े हुए नहीं होने चाहिए। इस अवस्था में कुछ देर ऐसे ही बने रहें। सांस छोड़ते हुए अपने पैरों को फर्श पर वापस ले आएं। इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं। पेट में चोट, पीठ दर्द और मासिक धर्म के दौरान इस योगासन को करने से बचें। गर्भावस्था के दौरान भी इसे करने से बचना चाहिए।

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अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो इन योगासनों को नियमित रूप से कर सकती हैं। लेकिन शुरुआत में आपको इसे किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करना चाहिए। कोई भी योगासन धीरे-धीरे करें और अपनी क्षमता के अनुसार इसकी समय सीमा बढ़ा सकते हैं।  

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