जानें धूप में बालों के चमकने और त्वचा के काले होने के कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 22, 2016
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Quick Bites

  • सूरज की रोशनी मेलानिन को प्रभावित करती है।
  • मेलानिन त्वचा और बालों में मौजूद रंग के जिम्मेदार है।
  • जितना ज्यादा सूरज के संपर्क में जाते हैं, उतनी ज्यादा त्वचा काली होती है।
  • सूरज की रोशनी के कारण बाल हल्के और बेजान होने लगते हैं।

आपने शायद ही कभी इस बात पर गौर किया हो कि सूरज की रोशनी हमारे बालों को हल्का और त्वचा काला करती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि आखिर सूरज की रोशनी हमारे शरीर के दो विभिन्न अंगों में अलग अलग प्रभाव कैसे डालती है? वास्तव में इस सवाल का जवाब मेलानिन में छिपा है। आइये इस सम्बंध में विस्तार से जानते हैं।

 

मेलानिन क्या है

मेलानिन असल में वह रंग द्रव्य है जो बालों और त्वचा को रंग देने के लिए जिम्मेदार है। लेकिन मेलानिन का हमारे बालों और त्वचा पर अलग अलग प्रभाव क्यों पड़ता है? इसका कारण है कि हमारी त्वचा जीवित है जबकि हमारे बाल मृत। मतलब यह है कि जीवित और मृत होने के कारण मेलानिन का हमारे बालों और त्वचा पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है।

सूरज की रोशनी का प्रभाव

हमारे बालों के लिए इस्तेमाल हो रहे मेलानिन को सूरज की रोशनी नष्ट कर देती है। यही कारण है कि जड़ों से निकल रहे बाल पौष्टिक हो सकते हैं लेकिन बालों के अंतिम सिरे तक आते आते बालों का रंग बदल जाता है। इसके पीछे वजह सूरज की रोशनी में अत्यधिक संपर्क में आना है। इसी तरह त्वचा पर भी मेलानिन का प्रभाव देखने को मिलता है। चूंकि त्वचा जीवित है इसलिए सूरज की रोशनी का प्रभाव त्वचा पर भिन्न होता है। सूरज की अल्ट्रा वायलेट रेज़ त्वचा से सम्बंधित मेलानिन को नष्ट करती है। परिणामस्वरूप त्वचा अधिक मेलानिन विकसित करती है। नतीजतन त्वचा का रंग काला पड़ने लगता है।

 

मेलानिन सुरक्षा कवच

मेलानिन को अगर त्वचा का सुरक्षा कवच कहा जाए तो गलत नहीं होगा। असल में अल्ट्रा वायलेट रेज़ से हमारी त्वचा की सुरक्षा करते हुए ही त्वचा के रंग में बदलाव होने लगते हैं। जितनी ज्यादा मेलानिन को मेहनती करनी होती है, उतना ही त्वचा का रंग गाढ़ा होने लगता है। आपको बताते चलें कि मेलानिन इसलिए भी उपयोगी पिग्मेंट है क्योंकि यह हमारी रक्षा कैंसर और डीएनए के नष्ट होने से बचाता है। दरअसल जो लोग अत्यधिक सूरज की रोशनी में रहते हैं, उनके डीएनए नष्ट होने का खतरा बना रहता है। साथ ही कैंसर का कारण भी बन सकता है। ऐसे में मेलानिन सुरक्षा कवच की तरह सामने आ खड़ा होता है और कैंसर कारक वजहों से निपटता है।

 

त्वचा काली होने की कार्यविधि

सूरज की रोशनी में पड़ने से त्वचा पर दो तरह से इसका प्रभाव पड़ता है। एक जो तुरंत असर दिखाता है और दूसरा जो धीरे धीरे असर दिखाता है। तुरंत असर दिखाने का मतलब यह है कि सूरज के संपर्क में आने से त्वचा झट से अपना रंग बदल लेती है। ऐसा अकसर उन लोगों में दिखाई देता है जो गोरे होते हैं। हालंाकि उनकी त्वचा काली नहीं होती। लेकिन जो लोग हल्के सांवले रंग के लोग होते हैं, उनकी त्वचा काली हो जाती है।


अन्य कार्यविधि यानी प्रक्रिया को अंग्रेजी में ‘डिलेड टैनिंग’ कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि यह हमारी त्वचा पर धीरे धीरे सक्रिय होती है। इसे मेलानोजेनेसिस भी कहा जाता है। इसके तहत त्वचा ज्यादा मेलानिन रंगद्रव्य बनाती है। जितने ज्यादा मेलानिन बनते हैं, त्वचा का रंग उतना ही बदलता चला जाता है। यह क्रिया होने में समय लगता है। इसे सूरज की रोशनी के संपर्क में न आने से रोका जा सकत है।

 

मेलानिन पर असर पड़ने का खतरा

जैसा कि यह स्पष्ट है कि सूरज की रोशनी के संपर्क में आने से मेलानिन प्रभावित होता है। लेकिन आपको बता दें कि सूरज की रोशनी मेलानिन को नहीं त्वचा को प्रभावित करती है। त्वचा की सुरक्षा हेतु मेलानिन सुरक्षा कवच की तरह सामने आ खड़ा होता है। इसी प्रक्रिया के तहत शरीर से कुछ रासायनिक तत्व निकलते हैं जो कि शरीर को अलर्ट करते हैं कि सूरज की रोशनी त्वचा को प्रभावित कर रही है। अतः यह जरूरी है कि हम जितना हो सके कम सूरज की रोशनी में जाएं। अगर ऐसा न किया जाए तो कैंसर की आशंका में बढ़ोत्तरी हो सकती है।

 

बालों पर प्रभाव

पहले ही जिक्र किया जा चुका है कि सूरज की रोशनी का बालों और त्वचा पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है। त्वचा पर पड़ रहे प्रभाव का बालों के साथ कोई मेल नहीं है। लेकिन यह तय है कि सूरज की रोशनी बालों को भी नुकसान पहुंचाती है। मगर गौर करने की बात ये है कि बाल इसका प्रतिवाद भी नहीं करते।
आप इस बात से अवगत होंगे कि सूरज की रोशनी का असर प्लास्टिक तत्वों पर कैसा पड़ता है। प्लास्टिक टूट जाता है, रंग फीका पड़ जाता और अंततः पूरी तरह नष्ट हो जाता है। इसी तरह इसका असर बालों पर भी होता है। वह बालों को हल्का कर देता है जिससे बाल रूखे हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं।

 

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