फेफड़ों को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए रोज करें ये योगासन

Breathing Yoga And Exercises: दिवाली पर वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से फेफड़ों संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

Ashu Kumar Das
Written by: Ashu Kumar DasUpdated at: Oct 18, 2022 18:10 IST
फेफड़ों को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए रोज करें ये योगासन

Breathing Yoga And Exercises: कुछ ही दिनों में देशभर में दिवाली का त्योहार मनाया जाने वाला है। दिवाली के लिए दिल्ली समेत सभी राज्यों के बाजार सज चुके हैं। दिवाली से पहले एक बार फिर देश के कई हिस्सों में प्रदूषण मुसीबत बनता जा रहा है। खासकर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक लेवल पर पहुंच चुका है। वायु प्रदूषण के कारण लोगों को गले में दर्द, खांसी की समस्या, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ (Health problem due to Air Pollution) जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं से 2-4 होना पड़ता है।

कई बार ये स्वास्थ्य इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि लोगों को अस्पताल में एडमिट होना पड़ता है। वायु प्रदूषण के प्रभाव से बचने के लिए कुछ लोग बाजार में मिलने वाले एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि एयर प्यूरीफायर इतने ज्यादा महंगे होते हैं कि आम पब्लिक इसे आज भी खरीदने से बचती है। इसलिए दिवाली (Dilwai celebration 2022) से पहले आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे योगासन के बारे में, जिसकी प्रैक्टिस करके आप वायु प्रदूषण के कारण होने वाली सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ने से रोक सकते हैं।

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वायु प्रदूषण से बचने के लिए योगासन

अनुलोम-विलोम - Anulom-Antonym for strong lungs

वायु प्रदूषण के प्रभाव से बचने के लिए नियमित तौर पर अनुलोम-विलोम की प्रैक्टिस करें। योग गुरु दीपक कुमार का कहना है कि प्रतिदिन 5 से 7 मिनट अनुलोम-विलोम करने फेफड़े मजबूत बनते हैं। अनुलोम-विलोम करने से सांस संबंधी समस्याओं से भी राहत पाई जा सकती है।  

अनुलोम-विलोम कैसे करें

इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं।

अनुलोम विलोम करने के लिए नाक के दाएं छिद्र से सांस भरें और बाएं छिद्र से बाहर निकाल दें। 

इस प्रक्रिया को दूसरी तरफ फिर से दोहराएं।

Kapalbhati for strong lungs

कपालभाति - Kapalbhati for strong lungs

वायु प्रदूषण से बचने और शरीर को सेहतमंद रखने के लिए कपालभाति करना बेस्ट माना जाता है। कपालभाति करने से ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने और मेटाबॉलिज्म में सुधार करने के लिहाज से कपालभाति बहुत फायदेमंद है। गैस और एसिडिटी की समस्या में ये बहुत लाभदायक है। इसमें सांस छोड़ने की प्रक्रिया करने से फेफड़े लंबे समय तक ठीक से काम करते हैं। 

कैसे करें कपालभाति

कपालभाति करने के लिए सबसे पहले पालथी मारकर सीधे बैठ जाएं।

इसके बाद पेट के निचले हिस्से को अंदर की तरफ खींचे और 30 सेकेंड तक इसी पोज में रहें। 

इसके बाद नाक से तेजी से सांस छोड़ें। 

इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक कि आपको थकान महसूस न हों।

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बाह्य

फेफड़ों को ठीक रखने के लिए बाह्य प्राणायाम भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। नियमित तौर पर बाह्य करने से फेफड़ों तक शुद्ध हवा पहुंचाने में मदद मिलती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ता है।

कैसे करें बाह्य योगासन

बाह्य करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सीधी पोजीशन में बैठ जाएं।

गहरी सांस लें और अब सांस को रोकते हुए 3 बार में छोड़ें।

हवा को निकालने के लिए पेट और डायाफ्राम का इस्तेमाल करें।

10 से 15 मिनट तक वाह्य योगासन की प्रैक्टिस करें।

भस्त्रिका - Bhastrika for Strong lungs

वायु प्रदूषण के प्रभाव से फेफड़ों से बचाने के लिए भस्त्रिका योगासन काफी लाभदायक माना जाता है। नियमित तौर पर भस्त्रिका करने से पेट की चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है। 

कैसे करें भस्त्रिका योगासन

भस्त्रिका योगासन करने के लिए किसी ऐसी जगह का चुनाव करें जहां पर पूरी तरह से शांति हो।

इसके बाद बिल्कुल सीधी पोजीशन में बैठ जाएं। 

आँखे बंद करें और थोड़ी देर के लिए शरीर को रिलैक्स करने की कोशिश करें।

हाथों को चिन या ज्ञान मुद्रा में रखें।

10 बार दोनों नथनों से तेज गति से श्वास लें और छोड़ें।

 

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