अस्थमा (Asthma) और लंग कैंसर (Lung Cancer) के रोगियों के लिए फायदेमंद हैं ये 5 योगासन

अस्थमा और फेफड़ों का कैंसर, दोनों ही सांस से जुड़ी बीमारियां हैं। इन बीमारियों को ठीक करने और इनसे बचाव करने में कुछ योगासन आपकी मदद कर सकते हैं।

सम्‍पादकीय विभाग
योगाWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Feb 16, 2021
अस्थमा (Asthma) और लंग कैंसर (Lung Cancer) के रोगियों के लिए फायदेमंद हैं ये 5 योगासन

वायु प्रदूषण, हवा की खराब गुणवत्ता, सिगरेट, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और ठंडी हवा आदि के कारण शहरों की एक बड़ी आबादी अस्थमा (Asthama) और लंग कैंसर (Lung Cancer) जैसी बीमारियों का शिकार बनती जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ भारत में लगभग दस लाख से अधिक पुरुष और महिलाएं लंग कैंसर और अस्थमा जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 30 करोड़ लोग सिर्फ अस्थमा से ग्रस्त हैं। अस्थमा और लंग कैंसर में एक बात कॉमन है कि दोनों ही सांस लेने की तकलीफ से जुड़ी बीमारियां हैं। सांस की सभी बीमारियों के खतरे को रोकने या इलाज के लिए योगासन और प्राणायम बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे में योगासन अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर के रोगियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

योगासन शरीर और मस्तिष्क के संतुलन को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाता है। योगासन और प्राणायाम की सहायता से हम अपने शरीर और मन मस्तिष्क को संतुलित रख सकते हैं। योग अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है बशर्ते इसका अभ्यास एक्सपर्ट की देख रेख में किया जाना चाहिए। योगासन और प्राणायाम से हम अपने फेफड़ों को स्वस्थ रख सकते हैं। स्वस्थ फेफड़े अस्थमा की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में होने वाली तकलीफों से दूर रखते हैं। योगासन कई प्रकार की सांस संबंधी बीमारियों में भी लाभदायक सिद्ध होते हैं। हालांकि इन योगासनों को चिकित्सक की देखरेख में किया जाना बेहद आवश्यक है।

योगासन जो अस्थमा और लंग कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद योगासन

  • भुजंगासन
  • अर्ध मत्स्येन्द्रासन
  • मत्स्य आसन
  • सुखासन
  • प्राणायाम

योगासन से अस्थमा और लंग कैंसर के मरीजों को लाभ

अस्थमा और लंग कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए योगा बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे मरीजों को अक्सर सांस लेने में तकलीफ होती है। योगा के कुछ आसन मरीजों को सांस लेने में होने वाली तकलीफों को दूर कर सकते हैं। प्राणायाम और योग दोनों ही अस्थमा और लंग कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में होने वाली समस्याओं का हल हैं। इन योगासनों को करने से अस्थमा और लंग कैंसर के रोगियों को होने वाली लाभ कुछ इस प्रकार से हैं-

1. भुजंगासन

bhujangasana

  • भुजंगासन से फेफड़े मजबूत होते हैं।
  • दमा के मरीजों को होने वाली दिक्कतों को दूर करने में भुजंगासन बेहद लाभकारी माना जाता है।

भुजंगासन करने का तरीका-

भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहते हैं, इस आसन में सर्प जैसी आकृति में हमें अपने शरीर को लाना होता है। सबसे पहले आराम से पेट के बल लेट जाएं, दोनों हाथों को छाती के बगल रखकर सांस खींचते हुए शरीर के अगले धड़ को सांप के फन की तरह ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पुनः प्रारंभिक स्थिति में लौट जाएं और इस प्रक्रिया को दोहराएं।

2. अर्ध मत्स्येन्द्रासन

  • यह आसन सांस लेने में कठिनाई और तनाव से राहत प्रदान करता है।
  • शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।
  • सीने की मांशपेशियों और रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत बनाता है।

अर्ध मत्स्येंद्रासन कैसे करें-

अर्ध मत्स्येंद्रासन करने के लिए सबसे पहले आराम की मुद्रा में बैठ जाएं। बाया पैर मोड़कर बैठे उसके बाद दाहिना पैर बाएं पैर के घुटने के बाहर रखें। दाहिने हाथ को बाएं पैर की जांघ और छाती के बीच से निकालते हुए दाहिने पैर के पंजे को पकड़े, दाहिने हाथ को पीठ के पीछे घुमा कर रखें। इस आसन को 1 मिनट तक दोनों तरफ से करें।

3. मत्स्य आसन

matsyasana

  • आसन के दौरान फेफड़ों की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है जिससे गहरी सांस लेने में आसानी होती है।
  • शरीर के संतुलन और रक्त संचरण में भी मदद करता है।

मत्स्यासन कैसे करें

मत्स्यासन करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं, हाथों को पैरों के बगल में चिपकाकर रखें। हथेलियों और ऐड़ी को जमीन की तरफ पुश करते हुए हेड (सिर) को कंधे और गले से उठा कर जमीन पर टिकाएं। धीरे-धीरे सीने को भी ऊपर की तरफ खींचे।

4. सुखासन

sukhasana

  • सुखासन का दैनिक अभ्यास करने वाले मरीजों को चिंता, अवसाद और तनाव से मुक्ति मिलेगी।
  • सुखासन सांस लेने की प्रक्रिया को आसान करता है और विषाक्त पदार्थों को फेफड़े से बाहर करने में मदद करता है।

सुखासन करने का तरीका

सुखासन ध्यान की मुद्रा में बैठने के तरीके को कहते हैं। सबसे पहले आराम की मुद्रा में बैठ जाएं और उसके बाद दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाएं। पैरों को मोड़ते हुए आराम की मुद्रा में बैठ जाएं और दोनों हाथों को पैरों के बीच में ध्यान मुद्रा में रखें।

5. प्राणायाम

pranayama

  • शरीर और मस्तिष्क के संतुलन को बनाता है।
  • तनाव को दूर कर शांति प्रदान करता है।
  • सांस से सम्बंधित रोगों में बेहद लाभकारी माना जाता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में भूमिका निभाता है।

प्राणायाम करने का तरीका

प्राणायाम सांस को नियंत्रित करने के योग को कहते हैं। प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आप सुखासन में बैठ जाएं। प्राणायाम में सांसो को अंदर बाहर छोड़ने और रोकने की प्रक्रिया को पूरक, कुंभक और रेचक कहते हैं। सुखासन में बैठकर सबसे पहले अपनी सांस को धीरे धीरे अंदर की तरफ खींचे, पूरी तरीके से सांस खींचने के बाद कुछ सेकंड्स के लिए सांस को अंदर रखें और उसके बाद धीरे-धीरे बाहर निकालें। शुरुआत में इस प्रक्रिया को कम से कम 5 बार दोहराएं।

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योगासन शुरू करने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

इन योगासनों को शुरू करने से पहले मरीजों को एक्सपर्ट या चिकित्सक की राय जरूर लेनी चाहिए। अस्थमा और लंग कैंसर जैसी बीमारी के कई स्टेज होते हैं किस स्टेज में तीन मरीजों के लिए यह योगासन लाभदायक हो सकते हैं इसके बारे में चिकित्सक से पूरी जानकारी लेने के बाद ही इन योगासनों का अभ्यास करना चाहिए। एक्सपर्ट के मुताबिक ये योगासन अस्थमा और लंग कैंसर जैसी बीमारियों में तो लाभदायक होते ही हैं लेकिन उसके साथ-साथ सामान्य लोगों के लिए भी ये योगासन बेहद लाभदायक हैं। सबसे पहले किसी योग्य गुरु का चुनाव करने और उनके ही मार्गदर्शन में योगाभ्यास करें। योग करने के दौरान अधिक टाइट कपड़ों का न पहने। नियमित रूप से एक निर्धारित समय पर ही योग के इन आसनों का अभ्यास करें।

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