पित्ताशय की पथरी ( गाल ब्लैडर स्टोन) होने पर करें ये 5 याेगासन, पथरी को बाहर निकालने में हो सकते हैं मददगार

पित्ताशय की पथरी यानी गाल ब्लैडर स्टोन काे निकालने के लिए आप कुछ याेगासन कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इनके बारे में-

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Oct 08, 2021
पित्ताशय की पथरी ( गाल ब्लैडर स्टोन) होने पर करें ये 5 याेगासन, पथरी को बाहर निकालने में हो सकते हैं मददगार

पित्ताशय की पथरी गुर्दे या पित्त में हाेने वाली एक गंभीर बीमारी है। दरअसल, पित्ताशय में पथरी (Gallstones) छाेटे-छाेटे पत्थर हाेते हैं, जाे पित्त की थैली में बनते हैं। यह एक बेहद पीड़ादायक बीमारी है। किसी भी व्यक्ति काे पित्ताशय की पथरी हाेने पर कई परेशानियाें का सामना करना पड़ता है। इसलिए इसका समय पर इलाज बहुत जरूरी हाेता है, अन्यथा बाद में पित्ताशय की पथरी काे निकालने के लिए सर्जरी करवानी पड़ सकती है। लेकिन अगर पित्ताशय में पथरी हाेने पर शुरुआत में ही कुछ खास याेगासन किए जाए, ताे इस पथरी काे धीरे-धीरे निकालने में मदद मिलती है।

क्याें हाेती है पित्ताशय में पथरी 

पित्ताशय की पथरी मध्य आयुवर्ग के लाेगाें में अधिक देखने काे मिलती है। पित्ताशय की पथरी बहुत छाेटी-छाेटी हाेती है, जाे पित्ताशय या गाल ब्लैडर में काेलेस्ट्रॉल के जमने पर हाेती है। जब पित्ताशय में काेलेस्ट्रॉल, पित्त और लवण बनते हैं, ताे यह बीमारी हाेती है। दरअसल, पित्त और लवण लिवर में उत्पन्न हाेने वाले पाचन तत्व हैं, जब ये तत्व शरीर से बाहर नहीं निकल पाते हैं तब ये सख्त हाेकर पथरी का रूप ले लेते हैं।

yoga to gallstones

पित्ताशय की पथरी के लक्षण (Symptoms of Gall Stones)

  • उल्टी हाेना
  • पेट में भारीपन महसूस हाेना
  • खट्टी डकार आना
  • अपच की समस्या
  • सीने में जलन हाेना
  • पेट के दाहिने हिस्से में तेज दर्द उठना

पित्ताशय में पथरी के कारण (Causes of Gallstones) 

  • पित्ताशय में काेलेस्ट्रॉल जमना
  • लिवर से लवण बाहर न निकल पाना
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन 
  • शारीरिक रूप से सक्रिय न होना

पित्ताशय की पथरी के लिए याेगासन (Yoga Asanas to Reduce Gallstones)

अगर शारीरिक रूप से सक्रिय रहा जाए, ताे पित्ताशय की पथरी काे काफी हद तक शरीर से बाहर निकाला जा सकता है। नियमित रूप से याेगाभ्यास करना भी पित्ताशय की पथरी काे निकालने में मदद करता है। पित्ताशय की पथरी काे निकालने के लिए आप कुछ खास याेगासन कर सकते हैं। जानें इन याेगासनाें के बारे में-

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1. शलभासन (Shalabhasana) 

पित्ताशय की पथरी काे निकालने के लिए शलभासन एक काफी कारगर याेगासन हाेता है। अगर इसका अभ्यास राेजाना किया जाए, ताे पथरी के दर्द में भी बहुत आराम मिलता है। साथ ही यह मांसपेशियाें और रीढ़ की हड्डी काे मजबूत बनाता है। शलभासन शब्द शलभ और आसन दाे शब्दाें से मिलकर बना है। इसमें शलभ का मतलब टिड्डी हाेता है और आसन का मतलब मुद्रा हाेती है। इस आसन में व्यक्ति टिड्डी के समान प्रतीत हाेता है। इसे ग्रासहाेपर पाेज भी कहा जाता है।

  • इस याेगासन काे करने के लिए सबसे पहले याेगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अपने दाेनाें पैराें काे एकदम सीधा रखें। 
  • अब अपने दाेनाें हाथाें काे सीधा रखें। 
  • इस दौरान अपने सिर और मुंह काे पूरा सीधा रखें। 
  • अब लंबी गहरी सांस लें और दाेनाें पैराें काे ऊपर उठाने की काेशिश करें। 
  • इसके बाद अपने दाेनाें हाथाें काे भी पैराें के समानांतर में उठाकर सीधा कर लें। आप चाहें ताे हाथाें काे सामने की तरफ भी सीधा कर सकते हैं। 
  • इस अवस्था में 20 सेकेंड तक रुकें और फिर सांस छाेड़ते हुए सामान्य हाे जाएं।
  • इस याेगासन काे 3-5 बार दाेहराया जा सकता है।
  • अगर आपकाे घुटनाें या पेट में दर्द की समस्या हाे, ताे उस स्थिति में इसे करने से बचें।
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2. धनुरासन (Dhanurasana)

धनुरासन काे पित्ताशय की पथरी के इलाज के लिए काफी अच्छा याेगासन माना जाता है। इस आसन काे आसानी से किया जा सकता है। इसके नियमित अभ्यास से हाथाें, पैराें, पेट और पीठ की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। साथ ही यह पाचन शक्ति काे भी मजबूत बनाता है। धनुरासन तनाव, स्ट्रेस काे कम करता है। इसे करने से व्यक्ति काे रिलैक्स फील हाेता है। धनुरासन अस्थमा राेगियाें के लिए भी फायदेमंद हाेता है।

  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले एक याेगा मैट बिछा लें।
  • अब इस पर पेट के बल लेट जाएं। 
  • अपने दाेनाें घुटनाें काे माेड़ लें। 
  • अपने दाेनाें हाथाें से पैराें के पंजाें काे पकड़ लें। दाएं हाथ से दाएं पैर का पंजा और बाएं हाथ से बाएं पैर का पंजा पकड़ें।
  • इस दौरान आपकी छाती और पैर दाेनाें हवा में रहेंगे। पेट जमीन पर रहना चाहिए।
  • अब लंबी गहरी सांस लें और छाेड़ें। 
  • 10-30 सेकेंड तक इस अवस्था में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं। 
  • आप इस प्रक्रिया काे 4-5 बार दाेहरा सकते हैं।
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3. भुजंगासन (Bhujangasana)

पित्ताशय की पथरी हाेने पर भुजंगासन का अभ्यास राेज किया जाए, ताे इससे काफी लाभ हाे सकता है। इसके लिए आप राेज सुबह खाली पेट इस आसन काे करें। इसमें  शरीर का ऊपरी हिस्सा काेबरा के फन की तरह उठा हाेता है, इसलिए इसे काेबरा पाेज कहा जाता है। भुजंगासन पेट, हाथाें और पीठ की मांसपेशियाें काे मजबूत बनाता है। इससे रीढ़ की हड्डी भी मजबूत बनती है।

  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले याेगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अपनी दाेनाें हथेलियाें काे कंधाें के समान जमीन पर रखें।
  • अपने टखनाें काे आपस में मिलाकर रखें।
  • अब लंबी गहरी सांस लें और अपने ऊपरी शरीर का वजन हथेलियाें पर डालते हुए कमर तक के हिस्से काे ऊपर उठाएं।
  • छाती काे बाहर की तरफ निकालें।
  • इस दौरान अपनी पीठ पर खिंचाव महसूस करें।
  • अपनी काेहनियाें काे एकदम सीधा रखें। 
  • 10-30 सेकेंड इसी अवस्था में रहने के बाद सांस छाेड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
  • आप इसे 3-5 बाद आसानी से कर सकते हैं।
 
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4. कपालभाति (Kapalbhati)

कपालभाति (कपालभाति प्राणायाम के फायदे) काे पेट और लिवर के लिए काफी अच्छा माना जाता है। पित्ताशय की पथरी काे निकालने में भी यह मददगार हाे सकता है। यह फेफड़ाें के लिए भी एक अच्छा याेगासन है। इसे राेजाना करने से त्वचा में भी निखार आता है। 

  • इस आसन काे करने के लिए किसी शांत जगह पर पद्मासन में बैठ जाएं।
  • अपने सांसाें काे बाहर छाेड़ने की क्रिया करें।
  • सांस छाेड़ते हुए पेट काे अंदर की तरफ धकेलें। 
  • इस याेगासन में सांस लेना नहीं हाेता है, सिर्फ नाक से छाेड़ना हाेता है।
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5. पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)

इस आसन काे राेज करने से आपकाे शारीरिक और मानसिक लाभ मिलते हैं। यह पित्ताशय की पथरी के इलाज के लिए भी एक काफी अच्छा याेगासन है। यह रीढ़ की हड्डी, पीठ काे मजबूत बनाता है। उच्च रक्तचाप, अनिद्रा की समस्या से भी निजात मिलता है। 

  • इस आसन काे करनेन के लिए सबसे पहले पैराें काे सीधा करके याेगा मैट पर बैठ जाएं। 
  • पैराें की उंगुलियाें काे आगे की तरफ एक साथ रखें। 
  • सांस लेते हुए अपने हाथाें काे ऊपर उठाएं और सांस छाेड़ते हुए शरीर काे आगे की तरफ झुकाएं।
  • अपने हाताें काे पैराें के तलवाें और नाक काे घुटनाें पर लगाने की काेशिश करें।
  • इस अवस्था में 10-15 सेकेंड रुकने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं।

अगर आप भी पित्ताशय की पथरी से परेशान हैं, ताे ऊपर बताए गए आसनाें काे आजमा सकते हैं। इससे आपकाे काफी लाभ मिलेगा। शुरुआत में किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही इन याेगासनाें काे करें।

(Image Source : Freepik)

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