सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम करने से बढ़ता है ज्यादा शराब पीने का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 14, 2015

drinking alcohol in hindiवे लोग जो सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, उनमें अधिक शराब पीने की लत लगने का खतरा अधिक होता है। विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर चेतावनी भी दी है।


महिलाओं के लिए सप्ताह में 14 और पुरुषों के लिए 21 ड्रिंक से ज्यादा शराब पीना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे लीवर की बीमारियां, कैंसर, स्ट्रो्क, कोरोनेरी हार्ट डिजीज और मानसिक समस्यायें हो सकती हैं।

 

यूरोप में काम करने के दिशा निर्देशों के मुताबिक किसी भी कर्मचारी से ओवर टाइम मिलाकर भी सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं करवाया जा सकता।

 


हालांकि पूरे यूरोपीय महाद्वीप में लोग प्रमोशन, सैलेरी में इजाफा और कई बार अपना काम करने के लिए भी इससे काफी ज्यादा वक्त तक ऑफिस में बैठे रहते हैं।

 

पिछले शोधों में भी यह बात सामने आई थी कि लंबे समय तक काम करने और शराब पीने की खतरनाक आदतों के बीच संबंध होते हैं। लेकिन शोध में केवल कुछ छोटे अध्ययन शामिल किये गए थे।

 

सप्ताह के अंत में वाइन का गिलास पीना बुरा नहीं। इससे आपको काम की थकान को दूर करने में मदद मिलती है। लेकिन इसके अधिक सेवन के तार कहीं न कहीं कार्यस्थल की मुश्किलों से भी होता है।

 

ऐसे लोग ज्यादा सिक लीव, काम पर बुरा प्रदर्शन, फैसले लेने की क्षमता पर नकारात्मक असर और काम से संबंधित चोट लगने का खतरा भी अधिक होता है।

 

फिनिश इंस्टीट्यूट ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ के प्रोफेसर मारियाना विरतानन और उनके साथियों ने बीएमजे में प्रकाशित पहले व्यवस्थित विश्लेषण में काम के लंबे घंटे और अल्कोहल के अधिक उपभोग के संबंधों पर जानकारी दी है।


इस शोध में 14 देशों के 333693 लोगों को शामिल किया गया। इस शोध में पाया गया कि काम के लंबे घंटों से अल्कोहल के अधिक सेवन का खतरा 11 फीसदी बढ़ जाता है। और इस शोध में पाया गया कि नौ देशों के 100602 लोगों में यह प्रतिशत 12 फीसदी तक बढ़ जाता है।


18 शोधों के आंकड़ों के मुताबिक सप्ताह में 49 से 54 और 55 घंटों या उससे भी ज्यादा काम करने वाले लोगों में यह खतरा का खतरा 35 से 40 घंटे काम करने वालों की अपेक्षा क्रमश: 13 और 12 फीसदी अधिक होता है।


शोध के लेखकों ने दावा किया कि उम्र, लिंग, सामाजिक आर्थिक स्तर अथवा क्षेत्र का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। बहुत छोटे स्तर पर जाने में बहुत मामूली अंतर होने की बात सामने आई। शोध के लेखकों ने दावा किया कि व्यक्ति के स्वास्थ्य में आने वाले किसी भी बदलाव की गहन जांच की जानी चाहिये।

 

Image Courtesy- Getty Images

News Source- dailymail.co.uk

 

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