स्वस्थ रहने के लिए रोना भी है जरूरी, जानें किन बीमारियों के कारण चाह कर भी नहीं रो पाते हैं कुछ लोग

रोने की अक्षमता के पीछे भावनात्मक कारणों के अलावा कई और मेडिकल कंडीशन भी होते हैं, जिसके बारे में जानना जरूरी है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Aug 03, 2021 17:43 IST
स्वस्थ रहने के लिए रोना भी है जरूरी, जानें किन बीमारियों के कारण चाह कर भी नहीं रो पाते हैं कुछ लोग

क्या आप कभी-कभी रोना चाहते हैं लेकिन बस नहीं कर सकते? आप महसूस करते हैं कि आपकी आंखों के पीछे एक सेंसिटिविटी है पर वो आंसू में नहीं बदल पाता। दरअसल ये सिर्फ इमोशनल डिसबैलेंस की बात नहीं है, बल्कि ये एक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी है। दरअसल मेडिकल टर्म में बात करें, तो कुछ चिकित्सीय स्थितियां आंसू उत्पन्न करने की आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं, जिनमें केराटोकोनजक्टिवाइटिस सिस्का (ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण), होर्मोनल परिवर्तन और अवसाद (Melancholic Depression) आदि शामिल है। तो आइए विस्तार से समझते हैं रोने की अक्षमता से जुड़े इन मेडिकल कंडीशन को, पर सबसे पहले जान लेते हैं रोना हमारे स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है।

insidecrying

स्वस्थ रहने के लिए रोना क्यों जरूरी है -benefits of crying

यह जानकर आपको आश्चर्य हो सकता है कि रोना वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है। दरअसल आंसू के कई अलग-अलग कार्य हैं। वे आपके शरीर में राहत और भावनात्मक कैथार्सिस की भावना भी प्रदान करते हैं। वहीं ये इन तमाम वजहों से भी बहुत जरूरी है। जैसे कि

  1. सबसे बुनियादी स्तर पर, रोना धूल और गंदगी को आपकी आंखों को साफ करने का काम करता है और आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  2. आंसू एंडोर्फिन रिलीज (endorphin release) के माध्यम से दर्द को दूर करने में मदद करते हैं, इसलिए एक दर्दनाक चोट के बाद रोने से आप बेहतर महसूस कर सकते हैं।
  3. यह माना जाता है कि भावनात्मक आंसू आपके शरीर से बाहर स्ट्रेस होर्मोन (stress hormones) को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं।
  4. रोना भी आपकी भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है, इसलिए यह तनाव और तनाव को दूर करके आपके मूड को बेहतर बना सकता है। 

इसे भी पढ़ें : रोना भी होता है सेहत के लिए अच्छा, मिलते हैं ये 6 जबरदस्त लाभ

रोने की अक्षमता से जुड़े मुख्य कारण-Why do I find it hard to cry?

1. केराटोकोनजक्टिवाइटिस सिस्का (Cause of dry eye syndrome)

केराटोकोनजक्टिवाइटिस सिस्का की स्थिति को आमतौर पर ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है, में आंसू उत्पादन में कमी से जुड़ा हुआ है। ये ज्यादा इन मेडिकल कंडीशन के दौरान नजर आते हैं, जैसे कि

  • -गर्भावस्था या मेनोपॉज से संबंधित हार्मोन में परिवर्तन होने पर
  • -बढ़ती हुई उम्र और आंखों में ड्राईनेस की परेशानी के कारण
  • -मधुमेह
  • -थायरॉयड समस्याएं
  • -रूमेटाइड गठिया
  • -लेंस का उपयोग करने के कारण
  • -पलकों में सूजन या इससे जुड़े किसी विकार के कारण

2. उदासी के साथ अवसाद (Dry eye and depression)

अवसाद के विभिन्न प्रकारों में लक्षणों की एक सीमा शामिल होती है, जिनमें एक प्रकार है मेलाकॉलमिक अवसाद (Melancholic Depression)। ये अवसाद का वो प्रकार है, जो कि बहुत गंभीर माना जाता है। इसमें डिप्रेशन के कारण ड्राई आई से जुड़ी परेशानी पैदा होती है, जिसकी वजह से रोने की अक्षमता से जुड़ी परेशानी भी पैदा हो जाती है। इसमें आप घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं कर पाते हैं। वास्तव में, आप ऐसा महसूस कर सकते हैं कि आपके पास बहुत कम या कोई भावना नहीं है, और इसके परिणामस्वरूप रोने में असमर्थता हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को ऐसा महसूस हो रहा है, तो उसे डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

इसे भी पढ़ें : आपका बच्चा भी रात में अचानक उठकर रोने लगता है? तो जान लें किन कारणों से होता है ऐसा

3. Sjogren सिंड्रोम

यह एक ऑटोइम्यून स्थिति, जो अक्सर एक वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के साथ विकसित होती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में सबसे अधिक दिखाई देती है।Sjogren का सिंड्रोम आपके शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं (white blood cells) का कारण बनता है, जो नमी का उत्पादन करते हैं, जैसे कि आपके आंसू नलिकाएं और श्लेष्म झिल्ली।

इससे ड्राई आंखें और मुंह सूखने की परेशानी होती है। ऐसे में जरूरी ये है कि आपको अगर महसूस हो कि आप चाह कर भी रो नहीं पा रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें और इसकी जांच करवाएं।

Read more articles on Mind-Body in Hindi

Disclaimer