दिल की नसें सिकुड़ने से किन बीमारियों का खतरा रहता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और लक्षण

दिल की नसों का सिकुड़ना एक बेहद गंभीर और मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति है। डॉक्टर बता रहे हैं इस समस्या के लक्षण और कारण।

Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraUpdated at: Apr 14, 2021 15:42 IST
दिल की नसें सिकुड़ने से किन बीमारियों का खतरा रहता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और लक्षण

मानव शरीर में रोग होने के लिए केवल छोटी सी लापरवाही भी बहुत है। कई बार हम कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियां कर बैठते हैं, जिसकी वजह से हमारा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। ऐसा ही हमारे दिल के साथ भी होता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए खून और नसों का संतुलन बने रहना बेहद जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि दिल में मौजूद नसें अगर सिकुड़ जाए तो क्या होता है। हृदय की नसें सिकुड़ जाने के कारण हमारे हमारी धमनियों में रक्त का संचार ठीक तरह से नहीं हो पाता है। इसके लिए हृदय पर अधिक बल की जरूरत होती है। ऐसा होने से दिल की जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ धमनियों के प्रभावित होने की भी आशंका बढ़ जाती है। यही नहीं दिल की नसें सिकुड़ने से हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का भी खतरा रहता है। दिल की नसें सिकुड़ने से व्यक्ति को हर समय थकावट और सांस फूलने की समस्या बनी रहती है। आर्टीरियल ब्लड सप्लाई कम हो जाने के कारण कई बीमारियां लग सकती है।

हार्ट की पंपिंग सुचारू रूप से नहीं होने के कारण हार्ट फेलियर और अटैक जैसे खतरों का भी सामना करना पड़ सकता है। अन्य मौसम की तुलना में हार्ट की नसें ज्यादातर सर्दी के मौसम में सिकुड़ती हैं। इसलिए खासकर दिल के रोगियों को सर्दियों में ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता रहती है। इसी विषय पर आज हमने पुणे के हेल्दी हार्ट क्लीनिक के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर केदार कुलकर्णी से बात की। आइये डॉ. कुलकर्णी से जानते हैं कि हार्ट की नसें सिकुड़ने पर किन बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। 

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1. हार्ट अटैक (Heart Attack)

दिल की नसें सिकुड़ने से हार्ट अटैक आने की भी संभावनाएं बढ़ जाती हैं। तापमान कम होने के कारण सर्दी में दिल की नसों में अधिक सिकुड़न आती है, जिससे हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। हार्ट को खून का प्रवाह ठीक से नहीं मिलने पर नसें सिकुड़ने लगती हैं और छोटी मोटी समस्याएं होने के साथ ही देखते देखते आपको हार्ट अटैक की भी समस्या हो सकती है। 

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2. हार्ट फेलियर (Heart Failure)

डॉ. केदार कुलकर्णी के मुताबिक ऐसी समस्या में आपको हार्ट अटैक आ सकता है। वहीं हार्ट अटैक के बाद हार्ट फेलियर होना लाजमि है। बीमारी को जानने के बाद भी लापरवाही करने या हार्ट का इलाज समय से न कराने वालों में यह समयस्या देखी जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस स्थिति में आपके हार्ट की पंपिंग लगातार कमजोर होती है और कुछ समय बाद इसे हार्ट फेलियर का कारण बनने में देर नहीं लगती है। 

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3. वैल्व्यूलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart Disease)  

वैल्व्यूलर हार्ट डिजीज में मुख्य रूप से आपके हृदय में मौजूद वाल्व प्रभावित होते हैं। इस समस्या में हार्ट में रक्त का बहाव एक ही ओर होना चाहिए। इसके लिए हार्ट में मौजूद वाल्व अपना कार्य करते हैं। या तो यह खुल नहीं सकते हैं या फिर इनमें लीकेज शुरू हो जाती है। रक्त का बहाव सामान रूप से नहीं होने पर वैल्व्यूलर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में मरीज के पैरों में सूजन आने के साथ ही सांस फूलने जैसी समस्या भी हो सकती है। 

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दिल की नसों में सिकुड़न के कारण (Causes of Narrowing of Veins)

  • रूमैटिक हार्ट डिजीज 
  • स्ट्रेपटोकोकल इंफेक्शन या गले के अन्य संक्रमण से
  • वाल्व की समस्या होने पर 
  • तापमान में गिरावट होने से भी यह समस्या हो सकती है
  • अधिक धूम्रपान करने से
  • हाई ब्लड कोलेस्ट्रोल से 
  • उच्च रक्तचाप से भी इसका खतरा रहता है
  • डायबिटीज या मधुमेह के कारण 
  • यह समस्या उम्र के हिसाब से भी होने की संभावना रहती है
  • वाल्व में कैल्शियम जमा होने से

दिल की नसें सिकुड़ने के लक्षण (Symptoms of Narrowing of Heart Veins)

  • पैर में दर्द होना
  • सांस लेने में समस्या 
  • पांव में सूजन आना
  • हार्ट अटैक 
  • छाती में तेज दर्द होना 
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कैसे करें इससे बचाव (How to Prevent It)

  • छाती में दर्द होने पर उसे नजरअंदाज करने की बजाय तत्काल रूप से कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें।
  • रूमैटिक हार्ट डिजीज होने पर लापरवाही न करें। 
  • तैलीय पदार्थों से दूरी बना लें। 
  • नमक का सेवन जितना हो सके कम करें। 
  • ऐसी समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह के बिना कोई व्यायाम न करें। 

डॉ. केदार के अनुसार दिल की नसें सिकुड़ने पर बिना देरी के चिकित्सक को दिखाएं। यह समस्या होने पर तैलीय पदार्थों का सेवन बंद कर दें। आप इस लेख में दिए गए बचावों का सहारा ले सकते हैं। 

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