आयुर्वेद के अनुसार साइनोसाइटिस (साइनस) की बीमारी से छुटकारा दिलाने वाले आहार और घरेलू नुस्खे

जानें आयुर्वेद के अनुसार साइनोसाइटिस (साइनस) बीमारी का कारण, इसमें आपको कौन सी चीजें खानी चाहिए, किन चीजों का परहेज करना चाहिए और कुछ आसान नुस्खे।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Dec 05, 2019
आयुर्वेद के अनुसार साइनोसाइटिस (साइनस) की बीमारी से छुटकारा दिलाने वाले आहार और घरेलू नुस्खे

सर्दियों के मौसम में साइनस एक बड़ी समस्या बन जाती है। साइनस या साइनोसाइटिस के कारण बंद नाक, चेहरे पर दर्द, जुकाम आदि की समस्या हो जाती है। साइनस के मरीजों को ठंडे मौसम में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल हम सभी के चेहरे पर सामने की तरफ गाल, नाक और माथे के आसपास कुछ हड्डियां होती हैं, जिनमें हवा भरी होती है। इन्हें ही साइनस कहा जाता है। ये हड्डियां हमारे शरीर में कई फंक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हंसने, बोलने के अलावा इन हड्डियों का काम हमारे सांस द्वारा अंदर ली गई हवा में मॉइश्चर (नमी) को बैलेंस करना भी है। इन हड्डियों के कारण ही हमारे चेहरे के हिस्से का भार कम होता है। जब इन्हीं साइनस में इंफेक्शन के कारण सूजन हो जाती है, तो उसे 'साइनोसाइटिस' कहते हैं।

sinus

बहुत तकलीफदेह बीमारी है साइनस

साइनोसाइटिस (साइनस) की समस्या होने पर आपकी नाक बंद हो सकती है, जिसके कारण कई बार आपको पर्याप्त सांस लेने में परेशानी होती है। इसके कारण आपको झुंझलाहट होती है और आप किसी काम में ध्यान नहीं लगा पाते हैं। इसके अलावा इस बीमारी के कारण व्यक्ति की आंखों और सिर में दर्द की समस्या, गालों और आईब्रोज में दर्द की समस्या भी हो सकती है। सबसे मुश्किल बात ये है कि कई बार ये समस्या 12 सप्ताह तक बनी रह सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार साइनोसाइटिस

आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर के स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी है कि शरीर में वात, पित्त औक कफ का बैलेंस बना रहें। इन तीन तत्वों के ज्यादा-कम होने से ही तरह-तरह के रोग होते हैं। आयुर्वेद में यह माना जाता है कि जब शरीर में वात और कफ दोनों बढ़ जाते हैं, तो व्यक्ति को साइनोसाइटिस की समस्या होती है। इसका अर्थ यह है कि साइनोसाइटिस की समस्या में अगर आप ऐसी चीजों का सेवन करेंगे, तो आपके शरीर में वात और कफ को कंट्रोल कर सकती हैं, तो आपको इस समस्या से राहत मिल सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार साइनोसाइटिस के लिए आहार

आयुर्वेद के अनुसार आपको साइनस की समस्या होने पर हल्की-फुल्की डाइट लेनी चाहिए, जिसे पेट आसानी से पचा सके। इसके लिए आप खिचड़ी, दलिया आदि खा सकते हैं। इसके अलावा आप कच्ची या उबली सब्जियां, कम तेल में फ्राई की गई सब्जियां, कच्चे फल आदि भी खा सकते हैं, क्योंकि इन्हें पचाने में भी आपके पाचन तंत्र को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। दरअसल हल्की और सुपाच्य चीजें खाने के पीछे कारण यह है कि जब आप हल्की चीजें खाते हैं, तो आपके शरीर में टॉक्सिन्स बेहद कम जमा हो जाते हैं और पहले से जमा टॉक्सिन्स भी बाहर निकल जाते हैं। उपवास के पीछे यही वैज्ञानिक कारण है।

साइनस में क्या नहीं खाना चाहिए

कुछ ऐसे आहार भी हैं, जिन्हें साइनस की समस्या में नहीं खाना चाहिए, जैसे- केला, बैंगन, लाल-पीले शिमला मिर्च, टमाटर आदि। इसके अलावा बहुत सारे मिर्च, मसाले वाली चीजें, स्पाइसी फूड्स, कोल्ड ड्रिंक्स, ठंडी तासीर की चीजें, आइसक्रीम आदि का सेवन साइनोसाइटिस की समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए अगर आप साइनस की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आपको अपनी डाइट का विशेष ख्याल रखना चाहिए। यह ध्यान रखें कि किसी भी समय खाना न छोड़ें। कुछ न कुछ जरूर खाएं।

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साइनोसाइटिस (साइनस) के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  • 4 ग्लास पानी उबालें। इसमें 6-7 तुलसी की पत्तियां 6-7 पुदीने की पत्तियां, 2 लौंग और एक आधे इंच का टुकड़ा अदरक डालें और उबालें। पानी को थोड़ी देर पकाएं और फिर छानकर ठंडा होन के लिए रख दें। इस पानी को दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा पिएं।
  • एक बड़ा टुकड़ा अदरक लें और इसे पीसकर या कूटकर निचोड़ें और इसका रस निकाल लें। अदरक के इस रस को एक चम्मच शहद के साथ खाएं। ऐसा दिन में 3-4 बार करें। आप पाएंगे कि आपके बंद नाक और साइनोसाइटिस की समस्या खत्म हो गई है।

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