Heart Health: भारत में पेरिकार्डिटिस का बड़ा कारण है टीबी, डॉ. विवेक से जानें क्या है दिल से जुड़ी ये बीमारी

पेरिकार्डिटिस को पेरिकर्डियम (Pericardium)का सूजन भी कहते हैं। आइए डॉ. विवेक कुमार से इस बीमारी को समझते हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Feb 27, 2020Updated at: Feb 27, 2020
Heart Health: भारत में पेरिकार्डिटिस का बड़ा कारण है टीबी, डॉ. विवेक से जानें क्या है दिल से जुड़ी ये बीमारी

पेरीकार्डियम हर्ट की वो कवरिंग है, जो इसे हमारे हृदय को सुरझा प्रदान करता है। पेरीकार्डियल सैक में दो परतें होती, एक सीरस परत और एक रेशेदार परत। यह पेरीकार्डियल गुहा को घेरता है जिसमें पेरीकार्डियल तरल पदार्थ होता है। इन्हीं में होने वाले सूजन को पेरिकार्डिटिस (Pericarditis) कहते हैं। ये हृदय से जुड़ी ऐसी स्थिति है, जिसमें हमारे हृदय के चारों ओर स्थित द्रव भरी उत्तकों (टिशूज) की थैली बन जाती है या सूजन हो जाता है। अक्सर इसके कारण लोगों के सीने में दर्द रहता है, जिसे लोग आम समझ कर भी नजरअदांज कर देते है। कभी-कभार स्थितियां गंभीर होने पर इसमें मवाद भी भर सकता है। ये सभी स्थितियों को अगर एक अम्ब्रेला टर्म दें, तो 'हार्ट इन्फेक्शन' कहलाएगा। आज 'ऑनली माय हेल्थ' ने इसी बीमारी को समझने और इससे जुड़ी तमाम स्थितियों को जानने के लिए डॉ. विवेक कुमार से बात की, जो कि एक हार्ट स्पेशलिस्ट हैं और दिल्ली के मेक्स अस्पताल में कार्यरत हैं।

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डॉ. विवेक कुमार की मानें, तो पेरीकार्डियम के झिल्ली में सूजन आ जाना ही पेरिकार्डिटिस है। पेरीकार्डिटिस को हार्ट में होने वाले वायरल, बैक्टीरियल, फंगल और अन्य संक्रमणों सहित कई कारकों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। पेरिकार्डिटिस के अन्य संभावित कारणों में दिल का दौरा या दिल की सर्जरी, अन्य चिकित्सा स्थितियां, चोटें और दवाएं आदि भी शामिल होती हैं हैं। पेरिकार्डिटिस तीव्र हो सकता है, जिसका अर्थ है कि यह अचानक होता है और आमतौर पर लंबे समय तक नहीं रहता है। पर ये बीमारी बहुत आसानी से पहचान में नहीं आती जिसके कारण, ये पुरानी हो सकती है, जिसका अर्थ है कि यह समय के साथ विकसित होता है और इलाज में अधिक समय लग सकता है। हर प्रकार के पेरिकार्डिटिस आपके दिल की सामान्य लय या कार्य को बाधित कर सकते हैं। दुर्लभ मामलों में, पेरिकार्डिटिस के बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं, यहां तक कि मृत्यु तक भी।

डॉ. विवेक कुमार ने बताया भारत में पेरिकार्डिटिस के मुख्य कारण

  • -भारत में पेरिकार्डिटिस के मुख्य कारणों में से एक टीबी यानी कि ट्यूबरक्‍युलोसिस। इस कारण भारत में ज्यादातर लोगों को दिल के झिल्ली में पानी भर जाता है और आगे चलकर गंभार हो जाता है।
  • -आज के वक्त जिस तरह से कैंसर फैल रहा है, ऐसे में पेरिकार्डिटिस होना का एक बड़ा कारण रेडियोथेरीपी है।
  • -वहीं अगर हम सामान्य लोगों की बात करें, तो वायरल इंफेक्शन या लंग्स और हृदय में किसी इंफेकशन का जल्दी इलाज न करवाना भी इसका एक कारण हो सकता है। 
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डॉ. कुमार बताते हैं कि पेरीकार्डियम एक पतली टिशूज की थैली होती है जो हृदय को घेरे रहती है और इसमें शामिल होती है:

  • विसर्ल पेरीकार्डियम (Visceral Pericardium)- एक आंतरिक परतों पर होती है, जो पूरे दिल को ढंकती है
  • मिडिल लेयर (A middle fluid layer)- पेरीकार्डियम और पार्श्विका पेरीकार्डियम के बीच घर्षण को रोकने वाला टिशू है।
  • पार्श्विका पेरिकार्डियम (Parietal pericardium)-ये एक बाहरी परत है, जो रेशेदार ऊतक से बनी होती है।

पेरिकार्डिटिस मुख्यत तीन प्रकार के होते हैं

1- एक्यूट पेरिकार्डिटिस (Acute Pericarditis)- जिसमें वायरल इंफेक्शन एक बड़ा कारण होता है। इसकी शुरूआत सांस लेने के दिक्कतों से होती है।

2-आवर्ती पेरिकार्डिटिस (Recurrent pericarditis)- जिसमें किसी व्यक्ति को एक्यूट पेराकार्डिटिस का एपिसोड बार-बार होते हैं।

3-क्रोनिक पेरिकार्डिटिस (Chronic pericarditis)- पेरिकार्डिटिस की जटिलता, जिसमें लक्षण तीन महीनों से अधिक समय तक रहते है।

4-कंस्ट्रक्टिव पेरिकार्डिटिस  (Constrictive Pericarditis)- ये सबसे गंभीर है क्योंकि इसमें व्यक्ति की स्थिति बेहद खराब होती है। दिल के झिल्लियों में सूजन इनता बढ़ जाता है कि पूरे शरीर में सूजन हो सकती है और ये दिल को धीरे-धीरे कंप्रेस्ड करने लगता है।

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पेरिकार्डिटिस के कारण क्या हैं?

  • पेरिकार्डिटिस के कारणों में शामिल हैं:
  • वायरल इंफेक्शन और संक्रमण
  • दिल की सर्जरी
  • दिल का दौरा
  • ट्रामा
  • ट्यूमर
  • कैंसर
  • रेडिएशन थेरेपी
  • ऑटोइम्यून रोग (जैसे रुमेटी गठिया, ल्यूपस या स्क्लेरोडर्मा)

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पेरीकार्डाइटिस के लक्षण क्या हैं?

  • छाती में दर्द- यह दर्द अक्सर तेज होता है और छाती के केंद्र में स्थित होता है। ये दर्द गर्दन और कंधों को विकीर्ण कर सकता है, और कभी-कभी, हाथ और पीठ में भी इसका दर्द होता है। इसके अलावा लेटने, खांसने, या निगलने में भी इसके कारण परेशानी हो सकती है।
  • हल्का-हल्का बुखार।
  • दिल की धड़कन तेज होना।

पेरिकार्डिटिस का निदान कैसे किया जाता है?

  • -रिपोर्ट किए गए लक्षण का पता करके
  • -इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईकेजी या ईसीजी) परिणाम
  • -इकोकार्डियोग्राम
  • -कार्डिएक एमआरआई
  • -फिजिकल टेस्ट
  • -बाकी एक लंबा और संपूर्ण इलाज ही इसे ठीक कर सकता है।

Source: American Heart Association

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