जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकता है गाउटी का संकेत, जानें इसके मुख्य लक्षण और बचाव के तरीके

गाउटी एक प्रकार से गठिया का ही रूप है जो शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने पर जोड़ों में जमा हो जाता है। जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा होती है।

Vishal Singh
अन्य़ बीमारियांWritten by: Vishal SinghPublished at: Apr 05, 2013Updated at: Mar 19, 2020
जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकता है गाउटी का संकेत, जानें इसके मुख्य लक्षण और बचाव के तरीके

बहुत कम लोग ही गाउटशब्द के बारे में जानते होंगे। ये एक तरीके का मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर है, जिसके कारण आपके जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा होती है। गाउट को एक तरीके से गठिया या अर्थराइटिस भी कहा जाता है, क्योंकि गाउट गठिया के एक जटिल रूप है। गाउट होने पर मरीज को जोड़ों में दर्द और सूजन होने लगती है। इसमें सूजन और दर्द के कारण मरीज को चलने में काफी तेज दर्द होता है और परेशानी होती है।

गाउट का मुख्य कारण यूरिक एसिड का जमा होना होता है। आमतौर पर यूरिक एसिड पैर के अंगूठे, उंगलियों के जोड़ों, घुटनों में जमा होता है। जिसकी वजह से गाउट की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा गाउटी का कारण कई मामलों में खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान भी बन जाता है। 

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गाउट के कारण

गाउट का कारण यूरिक एसिड का जमा होना है। जब आपके खून में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होने के कारण ये जोड़ों में जमा होने लगता है। जिसकी वजह से आपको शुरुआती दौर में हल्का दर्द महसूस होने लगता है। यूरिक एसिड हमारे शरीर में मौजूद प्रोटीन के टूटने पर बनता है। लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा होने पर ये हमारे शरीर को काफी नुकसान भी पहुंचा सकता है।

गाउटी के लक्षण क्या है?

जरूरी नहीं कि गाउटी की समस्या आपके शरीर के किसी एक ही हिस्से पर हो, ये आपके शरीर के किसी भी हिस्से को अपना शिकार बना सकती है। लेकिन गाउटी के ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि ये पैरों की उंगलियां, हाथों की उंगलियां, टखने और घुटनों में समस्या पैदा करती है। इसको नजरअंदाज करने पर ये आपको लंबे समय तक एक रोगी बना सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप समय रहते इसकी पहचान कर इसका इलाज कराएं। लेकिन इसकी पहचान करने के लिए आपको इसके सही लक्षणों का पता होना बहुत जरूरी है। जिससे की आप कुछ ही दिनों में इसकी पहचान कर इसका इलाज करा सकें। इसके मुख्य लक्षण हैं:

  • जोड़ों में लगातार दर्द रहना।
  • दर्द वाली जगह पर त्वचा का लाल होना।
  • जोड़ों में जलन पैदा होना।
  • प्रभावित जगह पर सूजन रहना।
  • जोड़ों को हिलाने में परेशानी होना।
  • किसी भी हल्की चीज का भारीपन महसूस होना।

अगर देखा जाए तो हमारे शरीर में ज्यादा यूरिक एसिड का जमा होना हमारे लिए काफी परेशानियों को पैदा करने का काम करता है। इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप अपने शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को हमेशा नियंत्रित रखें साख ही इसके नियंत्रित रखने वाली डाइट का सेवन करें।

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यूरिक एसिड कैसे कम करें?

विटामिन डी

यूरिक एसिड को नियंत्रित करने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप अपनी डाइट को बेहतर बनाएं। इसके लिए आपको अपनी डाइट में ज्यादा मात्रा में विटामिन डी को शामिल करना चाहिए। इसके लिए आप सबसे ज्यादा विटामिन डी से भरपूर फलों का सेवन करें। फलों में आप संतरे, चेरी और बेरी जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं।

फाइबर को करें शामिल

फाइबर हमारी डाइट में वैसे भी जरूर शामिल होना चाहिए ये हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए फाइबर इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि ये एसिड को सोंखने का काम करता है जिससे की यूरिक एसिड की मात्रा हमारे शरीर से कम होने लगती है।

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सेब का सिरका

सेब का सिरका भी यूरिक एसिड को कम करने में बहुत कारगर साबित होता है। ये यूरिक एसिड की मात्रा को हमारे शरीर से कम करता है। लेकिन आपको सेब के सिरके का सेवन करते समय ये ध्यान रखना होगा कि आप उसे सादा न लें। सेब के सिरके को आप हमेशा पानी के साथ मिलाकर ही लें।

 

 
 

 

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