क्‍या आप देर तक गर्दन झुकाकर काम करते हैं?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 04, 2011
Quick Bites

  • झुकाकर काम करने वालों को अधिक होता है 'सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस'।
  • गर्दन में दर्द होना, दर्द के साथ चक्कर आना आदि हैं इसके प्रमुख लक्षण। 
  • गलत तरीके से बैठने की वजह से भी होता है 'सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस'।
  • बचाव के लिए गर्दन के दर्द को अनदेखा ना करें और डॉक्‍टर की सलाह लें।

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस एक ऐसी बीमारी है जो आम तौर पर गर्दन झुकाकर काम करने वालों को अधिक होती है। इस बीमारी की आशंका अधिकतर उन लोगों में होती है जो आफिस में कुर्सी पर बैठकर गर्दन झुकाकर कई घंटों तक लगातार काम करते रहते हैं। टेबल-कुर्सी पर बैठ कर काम करने वाले अधिकतर लोग इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। चलिये विस्तार से जानते हैं इस रोग के कारण, लक्षण और निदान के बारे में।

 

Cervical Spondylosis in Hindi

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस अर्थात गर्दन का दर्द, गर्दन की सात हड्डियों को प्रभावित करता है। इससे गर्दन में दर्द रहता है और अकडऩ भी महसूस होती है। इसके कारण रीढ़  की गति सीमित हो जाती है और इन हड्डियों की नाडिय़ां जिस किसी भी स्थान से होकर जाती हैं वहां भी दर्द या झुनझुनाहट महसूस होने लगती है। पहले सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस का दर्द आयु के साथ बढ़ता था पर अब दिनचर्या में बदलाव के कारण यह दर्द कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित करता है।

 

 

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के लक्षण

स्पांडिलाइसिस होने के कई लक्षण हो सकते हैं, जैसे गर्दन में दर्द होना, दर्द के साथ चक्कर आना, गर्दन में दर्द के साथ बाजू में दर्द होना तथा हाथों का सुन्न हो जाना। यहां तक गर्दन के आसपास की नसों में दर्द या सूजन भी फैल जाती है। इस रोग के शुरुआत में रोगी को पहले गर्दन में जकडऩ महसूस होती है जो बाद में दर्द का रूप ले लेती है। गर्दन के दर्द के बाद धीरे-धीरे कंधों, बांहों और हाथ की उंगलियों तक दर्द महसूस होने लगता है। गर्दन की सात हड्डियों में से किसी भी हड्डी में गैप बढऩे से या हड्डी के घिस जाने से इस दर्द को महसूस किया जा सकता है। गर्दन दर्द के और भी कारण हैं जैसे गर्दन की टी.बी., बोन ट्यूमर, कई बार गर्दन की हड्डियों में पैदा होने पर ही खराबी होना आदि। बचपन में इन समस्‍याओं का पता नहीं चलता बल्कि इसका पता बड़ी उम्र में आकर लगता है।

 

 

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के कारण 

एक ही मुद्रा में लंबे अर्से तक सर्वाइकल वर्टिब्रा के प्रयोग तथा व्यायाम न करने से दो कशेरुकाओं के बीच की खाली जगह घटने लगती है। इस स्पांडिलाइटिक चेंज कहते हैं। इससे गर्दन और उसके इर्द-गिर्द दर्द होने लगता है। समय पर इलाज न करने से स्नायुओं पर दबाव बढ़ जाता है जिससे हाथों में भी दर्द होने लगता है। गर्दन की हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले लिगामेंट में खिंचाव आ जाने से भी यह बीमारी हो सकती है।

 

 

Cervical Spondylosis in Hindi

 

 

बैठने का गलत तरीका

गर्दन का दर्द या स्पांडिलाइसिस की समस्‍या गलत तरीके से बैठने की वजह से होता है। सिर झुकाकर काम करने वाले लोगों या कम्प्यूटर पर काम करने वाले लोगों में सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस से ग्रस्त होने की संभावना अन्य लोगों से अधिक होती है।

 

चोट के कारण

खेलते समय या किसी अन्य कारण से रीढ़ की हड्डी में चोट लग जाने पर भी स्पांडिलाइसिस हो सकता है। इसके अतिरिक्त अधिक गर्दन झुका कर काम करने, भारी बोझ उठाने और अधिक ऊंचे तकिए पर सोने आदि से भी स्पांडिलाइसिस हो सकता है।

 

ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण

ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों का विकार है, इसमें हड्डियों को सपोर्ट करने वाले सुरक्षात्‍मक कार्टिलेज और कोमल ऊतकों का किसी कारणवश टूटना शुरू हो जाता है। इस समस्‍या के कारण भी व्‍यक्ति स्‍पॉडिलाइसिस से ग्रस्‍त हो सकता है।

 

 

क्रोनिक चोट के कारण

कई बार स्‍पॉडिलाइसिस की समस्‍या क्रोनिक चोट के कारण से भी हो सकती है। जैसे बाइक की सवारी करते हुए भारी हेलमेट पहनना, गर्दन की शिकायत या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या अव्यवस्था या चोट के कारण।

 

 

इन चीजों से बचें 

मोटे और डायबिटीज से पीडि़त लोगों में इस बीमारी की आशंका अधिक पाई जाती है। इस बीमारी से दूर रहने के लिए लोगों को अपने वजन पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। कई बार गर्दन में कोई चोट लगने से भी स्पांडिलाइटिस का दर्द उत्पन्न हो जाता है।

 

 

उपचार 

मुलायम सोफे पर बैठने और और मुलायम बिस्तर पर सोने के मोह को छोड़कर सख्त और चपटे बिस्तर पर सोएं। पतले तकिए का इस्तेमाल करें। अगर पूरे दिन झुककर काम करते हैं तो बीच-बीच में उठकर टहलना न भूलें। काम के बाद आफिस से घर पहुंचकर पांच मिनट के लिए व्यायाम अवश्य करें। समय निकालकर प्रात: बेला में व्यायाम करना काफी फायदेमंद होता है। मानसिक तनाव, बेचैनी चिंता आदि से बचें। बस में पिछली सीट पर बैठकर सफर न करें। दर्द अधिक होने पर अल्पकालीन अल्ट्रासोनिक थैरेपी की आवश्यकता पड़ती है, इसे घर पर भी आराम से लिया जा सकता है।

 

 

  • डेस्क जॉब करने वालों को एक घंटे के अंतराल में उठकर एक छोटा-सा चक्कर लगा लेना चाहिए अगर यह संभव न हो तो गर्दन के हल्के-फुल्के व्यायाम कर लें।
  • लांग ड्राइविंग से बचें। अगर जरूरी हो तो थोड़ा बीच में आराम कर लें।
  • लगातार न तो सिलाई मशीन पर काम करें, न ही टीवी अधिक समय तक लगातार देखें। बिस्तर पर बैठकर न पढ़ें। टेबल चेअर पर पढऩे वाले विद्यार्थी टेबल चेअर पर गर्दन और कमर सीधी रखें।

 

 

गर्दन के दर्द को अनदेखा कतई ना करें और डॉक्‍टर की सलाह के बिना किसी भी तरह की एक्‍सरसाइज या इलाज न करें। शरीर का पॉश्चर ठीक ना होने से रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट बिगड़ने से कमर के निचले हिस्से और गर्दन में तेज दर्द होता है, इसलिए इसे ठीक रखें।

 

 

 

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