हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाते हैं 'ट्रांस फैट फूड', एक्‍सपर्ट से जानें क्‍यों है ये हानिकारक

हम जाने-अनजाने रोजाना कई ऐसे फूड का सेवन करते हैं जिसमें भारी मात्रा में ट्रांस फैट (कृत्रिम) सम्मिलित होता है, जो हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतनाक हो

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Mar 13, 2020Updated at: Mar 13, 2020
हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाते हैं 'ट्रांस फैट फूड', एक्‍सपर्ट से जानें क्‍यों है ये हानिकारक

ट्रांस फैट (Trans Fats) या ट्रांस-फैटी एसिड (असंतृप्त वसा) कुछ खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले वसा का एक प्रकार है। ट्रांस फैट प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों रूपों में आते हैं। कृत्रिम रूप से तैयार ट्रांस फैट को आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल (Hydrogenated vegetable oils) भी कहा जाता है। आपको कृत्रिम ट्रांस फैट (Artificial trans fats) से बचना चाहिए। वे आपके "खराब" (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं। 

प्राकृतिक ट्रांस फैट (Natural trans fat) आमतौर कुछ खाद्य पदार्थों जैसे डेयरी उत्पादों, बीफ और मेमने और कुछ तेलों में थोड़ी मात्रा पाई जा सकती है। जबकि कृत्रित ट्रांस फैट व्‍यवसायिक रूप से तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थ जैसे- फ्रोजेन पिज्‍जा, माइक्रोवेव पॉपकॉर्न, कूकीज, केक और फास्‍ट फूड इत्‍यादि में होता है। कृत्रिम ट्रांस फैट को तब बनाया जाता है जब इसे और अधिक ठोस बनाने के लिए तरल वनस्पति तेल में हाइड्रोजन मिलाया जाता है।

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ट्रांस फैट हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कैसे हानिकारक है: How trans fat is harmful to our health

ट्रांस फैट आपके हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं। वे आपके "खराब" कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को बढ़ाते हैं और वसा के जमाव को बढ़ावा देते हुए "अच्छे" कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) को कम करते हैं जो आपके रक्त वाहिकाओं को रोक सकते हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। यह टाइप 2 डायबिटीज के उच्‍च जोखिम से भी जुड़ा हुआ है। 

आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की सीनियर रिसर्चर, ऋचा पांडे कहती हैं, ट्रांस फैट के अत्यधिक सेवन से बहुत सारी बीमारियों के होने का बना रहता है, जैसे- मोटापा, उच्च रक्तचाप, ह्रदय सम्बन्धी रोग आदि। यह डिप्रेशन, भूलने की बीमारी, मुंहासे, बांझपन आदि समस्‍याओं से भी जुड़ा है। इन बीमारियों के इलाज में काफी खर्चा होता है, जिसके कारण व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है। 

एक दिन में कितनी मात्रा ट्रांस फैट का सेवन करें: How much trans fat can eat a day

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, अपने आहार में ट्रांस फैट को कम करने के लिए आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेलों वाले खाद्य पदार्थों पर कटौती करना और अतिरिक्त संतृप्त और ट्रांस वसा के बगैर लीन मीट और चिकन तैयार करना चाहिए। रिसर्च स्‍कॉलर ऋचा पांडे कहती हैं, "हमें प्रतिदिन औसतन 2 ग्राम से ज़्यादा ट्रांस फैट नहीं खाना चाहिए।"

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ट्रांस फैट पर प्रतिबंध क्‍यों जरूरी है: Why is it necessary to ban trans fat

ऋचा पांडे कहती हैं "खाद्य प्रणाली में कृत्रिम ट्रांस फैट्स का मुख्य स्‍त्रोत वनस्पति घी है। वनस्पति घी का अधिक प्रयोग इसलिए होता है ताकि खाद्य पदार्थ लम्बे समय तक ताज़े बने रहें और क्योंकि यह खाद्य तेलों की अपेक्षा में काफी सस्ता होता है। मुख्यतः यह बेकरी प्रोडक्ट्स में अधिक मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इनका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए। हमारा शरीर कृत्रिम तरीके से बने ट्रांस फैट को ढंग से पचा नहीं पाता है, और इसी कारण सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। ऐसे में इस पर प्रतिबंध जरूरी है।"

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WHO और FSSAI क्‍या कर रहा है? 

ऋचा पांडे के अनुसार, भोजन प्रणाली में कृत्रिम तरीके से बनने वाले ट्रांस फैट्स की मात्रा को कम करने के लिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है, जिनसे प्रेरित होकर, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने वर्ष 2022 तक भारत में बिकने वाले खाद्य तेलों में अप्राकृतिक रूप से तैयार किये जाने वाले ट्रांस फैट की मात्रा 2 प्रतिशत तक करने का निर्णय लिया है। परन्तु यह अधिसूचना अभी अपने शुरूआती चरण में ही है, जिसके कारण उद्योगपति ऐसा करने के लिए पूरी तरह से बाध्य नहीं हैं।

हृदय को स्‍वस्‍थ रखने के लिए आहार के बारे में जानने के लिए देखें वीडियो: 

इन सभी बातों को नज़र में रखते हुए, अंततः यही कहा जा सकता है कि हमारी खाद्य प्रणाली में ट्रांस फैट्स की मात्रा का न्यूनतम होना अनिवार्य है। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार, खाद्य उद्योगपति, एवं ग्राहकों को जागरूक होकर इस मुहीम में अपना-अपना योगदान देना चाहिए।

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