महिलाओं में बढ़ते मोटापे का कारण बनता है ये जानलेवा रोग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 20, 2018
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Quick Bites

  • पीसीओएस को पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम कहते है।
  • इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण हार्मोंस में गड़बड़ी है।
  • पीसीओएस में शरीर व चेहरे पर अत्‍यधिक बाल हो जाते हैं।

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें अंडाशय में सिस्‍ट यानी गांठ आ जाती है। इसे मल्‍टीसिस्टिक ओ‍वेरियन डिजीज भी कहा जाता है। अंडडिंबों और हार्मोंस में गड़बड़ी इस बीमारी के मूल कारण होते हैं। यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है। आजकल अनियमित पीरियड्स की समस्या किशोरियों में बेहद आम हो गई है। यही समस्‍या आगे चलकर पीसीओएस का रूप ले सकती है। पीसीओएस एंडोक्राइन से जुड़ी ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के शरीर में एंड्रोडेन्स या मेल हार्मोन अधिक होने लगते हैं। ऐसे में शरीर का हार्मोनल संतुलन गड़बड़ हो जाता है जिसका असर अंडों के विकास पर पड़ता है। इससे ओव्यूलेशन व मासिक चक्र रुक सकता है। पहले यह बीमारी तीस साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में बीमारी पाई जाती थी, लेकिन अब किशोर लड़कियों में भी यह समस्‍या पाई जा रही है।

पीसीओएस के लक्षण

इस समस्‍या से पी‍ड़ि‍त महिलाओं के मासिक धर्म अनियमित हो जाते हैं। उनका वजन तेजी से बढ़ता है, उनके सिर के बाल कम होने लगते हैं और शरीर व चेहरे पर बाल अधिक हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्‍हें नियमित रूप से सिरदर्द रहता है। इसके अलावा त्वचा संबंधी रोग जैसे अचानक भूरे रंग के धब्बों का उभरना या बहुत ज्यादा मुंहासे भी हो सकते हैं। पीसीओएस का शुरूआत में पता न चल पाने और इलाज के अभाव में यह गर्भ न ठहरने की समस्या के साथ-साथ महिला को टाइप 2 मधुमेह और अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी हो जाती है। सिस्ट के लंबे समय तक अंडाशय में रहने पर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

मोटापा सबसे बड़ा कारण

मोटापा इस बीमारी की बहुत बड़ी वजह होता है। अत्‍यधिक वसायुक्त आहार, एक्‍सरसाइज की कमी और अनियमित जीवनशैली के कारण तेजी से वजन बढ़ने लगता है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा का बढ़ना ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसलिए वजन कम करने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। जो महिलाएं बीमारी होने के बावजूद अपना वजन घटा लेती हैं, उनकी ओवरीज में वापस अंडे बनना शुरू हो जाते हैं।

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इन बातों का रखें ध्यान

जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए जंक फूड, अत्यधिक तैलीय, मीठा व वसा युक्त भोजन न खाएं। साथ ही  डायबिटीज भी इस बीमारी का बड़ा कारण हैं। इसलिए मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। इसके बजाय अपने आहार में हरी-पत्‍तेदार सब्‍जियां और फलों को शामिल करें। इसके अलावा लेट नाइट पार्टी में ड्रिंक और स्‍मोकिंग आज लाइफस्‍टाइल का हिस्‍सा बन गया है, जो बाद में बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिये अपनी दिनचर्या को सही कीजिये और स्‍वस्‍थ रहिये।

पीसीओएस के लिए टेस्ट

अल्ट्रासाउंड की मदद से ओवरी का साइज और उनमें आने वाले बदलाव देखे जा सकते हैं। ओवरी में अगर सिस्ट हो तो वह भी अल्‍ट्रासाउंड में नजर आ जाता है। इसके अलावा ब्लड में हार्मोन का लेवल ज्यादा होने पर बीमारी का पता चल सकता है।

पीसीओएस का इलाज

डॉक्टरों के अनुसार, हार्मोन संतुलन दवाओं की मदद से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। ओव्यूलेशन इंडक्शन भी एक तरीका है। जिसमें दवाओं की मदद से हार्मोन बैलेंस किया जा सकता है। इसके अलावा सबसे मॉडर्न ट्रीटमेंट है लेप्रोस्कोपी है इसमें ओवरी से सिस्ट बाहर निकाल दिया जाता है। एबनॉर्मल ओवरी के टिश्यू को हटा दिया जाता है। लेकिन इस का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि सर्जरी ठीक से नहीं होने पर दोबारा सिस्ट बनने की आशंका बनी रहती है।

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क्‍या कहते हैं शोध

अमेरिका जर्नल क्लीनिकल न्यूट्रीशन में पिछले साल एक अध्ययन प्रकाशित अध्‍ययन के अनुसार, पीसीओएस पीड़ित महिलाओं में मोटापा और ब्लड शुगर कम करने वाले ग्लाइसेमिक आहार और कम वसा, उच्च रेशेयुक्त आहार के प्रभाव का परीक्षण किया गया। शोध में पाया गया कि वजन कम करने और ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली महिलाओं में इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर थी। महिलाएं अपनी माहवारी को नियमित करके पीसीओएस से बच सकती हैं।

इसके अलावा अंतराल पर हार्मोन प्रोजेस्टेरोन थेरेपी भी एक विकल्प है। यह अनियमित माहवारी और गर्भाशय का खतरा कम करती है। लेकिन यह गर्भनिरोध की सुविधा नहीं देता। हार्मोंन को संतुलित करके पीसीओएस को सही किया जा सकता है। इसके अलावा आहार और एक्‍सरसाइज की मदद से महिलाओं को खुद का अच्‍छे से ख्‍याल रखना चाहिये तभी पीसीओएस ठीक हो सकता है।

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