बच्चों से दूर-दूर रहने या कम ध्यान देने का उन पर क्या असर पड़ता है? जानें अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग के बारे में

बच्चों की परवरिश के दौरान उनके प्रति उदासीन रहना अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग का लक्षण है, जानें इसकी वजह से बच्चे पर पड़ने वाले असर के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Apr 03, 2022Updated at: Apr 03, 2022
बच्चों से दूर-दूर रहने या कम ध्यान देने का उन पर क्या असर पड़ता है? जानें अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग के बारे में

बच्चों के अच्छे भविष्य और विकास के लिए उनकी परवरिश अच्छी होनी चाहिए। बच्चों के विकास और उनके भविष्य में परवरिश का बहुत बड़ा योगदान होता है। आप बचपन में बच्चों के साथ जिस तरह का व्यवहार करते हैं उसका सीधा असर बच्चे के व्यक्तित्व पर पड़ता है।  कई बार माता-पिता अकेले या एक से अधिक बच्चों की परवरिश करते समय कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिसका परिणाम आगे चलकर नकारात्मक होता है। बच्चों की परवरिश के दौरान उन पर कम ध्यान देना या उनसे दूर-दूर रहना अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग (Uninvolved Parenting) माना जाता है। बच्चों की परवरिश के अलग-अलग तरीके या अलग-अलग पेरेंटिंग स्टाइल होते हैं जिसका सीधा असर बच्चों के विकास और उनके व्यक्तित्व पर पड़ता है। अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग का भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर और उनके व्यक्तिव पर बुरा असर पड़ता है। आइये विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग क्या है? (What Is Uninvolved Parenting in Hindi?)

Uninvolved-Parenting

अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग एक तरह की पेरेंटिंग स्टाइल है जिसमें बच्चे के माता-पिता का परवरिश के दौरान व्यवहार सामान्य लोगों से अलग होता है। ऐसे पेरेंट्स न सिर्फ अपने बच्चों के प्रति उदासीन रहते हैं बल्कि उन्हें बच्चों के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। अन-इंवॉल्वड पेरेंट्स अपने बच्चों की परवरिश के दौरान उनकी जरूरतों पर भी ध्यान नहीं देते हैं और ऐसे पेरेंट्स जाने-अनजाने में अपने बच्चों को लगातार निगलेक्ट करते रहते हैं। कई बार पेरेंट्स का बच्चों के प्रति ऐसा व्यवहार उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों के कारण भी हो सकता है। लेकिन इस तरह की परवरिश में बच्चे पर बहुत नकारात्मक असर पड़ता है। अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग के लक्षण इस प्रकार से होते हैं।

  • पेरेंट्स बच्चों के बारे में जानकारी नहीं रखते हैं।
  • ऐसे पेरेंट्स अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के प्रति भी उदासीन रहते हैं।
  • बच्चों के साथ समय नहीं बिताते हैं।
  • बच्चों की जरूरतों पर ध्यान नहीं देते हैं।

अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग के नुकसान (Uninvolved Parenting Negative Effects On Child)

अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग का सीधा असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके व्यक्तित्व पर पड़ता है। पेरेंट्स का बच्चों के प्रति जिम्मेदार न होना और उनके साथ लगाव न होने के कारण बच्चों की संगति भी गलत हो सकती है। ऐसे बच्चे पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत आगे नहीं जा पाते हैं। अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग बच्चों पर ये नकारात्मक असर पड़ता है। 

1. अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग की वजह से बच्चों में माता-पिता के प्रति लगाव नहीं रहता है। ऐसे बच्चों में उदासीनता की भावना पैदा हो जाती है और वे हर समय खुद को अकेला महसूस करते हैं। अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग के कारण बच्चे बड़े होकर माता-पिता के प्रति जिम्मेदार नहीं रहते हैं।

2. ऐसे बच्चे जिनकी परवरिश अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग स्टाइल में होती है उनका व्यवहार और व्यक्तित्व भी अन्य बच्चों से अलग होता है। ऐसे बच्चे आगे चलकर जिद्दी स्वभाव के हो सकते हैं। बड़े होने पर ऐसे बच्चे माता-पिता की बात भी नहीं मानते हैं।

3. ऐसे बच्चों में स्किल्स और क्रिएटिविटी की कमी देखी जाती है। अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग की वजह से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है जिसके कारण बच्चों का मन पढ़ाई-लिखाई में भी नहीं लगता है।

4.  अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग की वजह से बच्चों में मन में डर या फोबिया हो सकती है। ऐसे बच्चे हर समय डरे या सहमे से रहते हैं।

5. बच्चों में आगे चलकर अवसाद और स्ट्रेस जैसी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे बच्चे हर मानसिक रूप से अत्यंत कमजोर और हर समय डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।

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अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग के कारण बच्चों के भविष्य पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे पेरेंट्स जो जाने-अनजाने में बच्चों की परवरिश में ऐसी गलतियां करते हैं उनके बच्चे का व्यवहार भी समाज के लोगों के प्रति बदल जाता है। ऐसे बच्चे आगे चलकर गैर-जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को हमेशा अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग स्टाइल अपनाने से बचना चाहिए। बच्चों के लिए नियमित रूप से समय निकालना और उनके साथ उनकी जरूरतों को समझना बहुत जरूरी होता है।

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