UK में अगले हफ्ते से लगाई जाएगी Pfizer की कोविड वैक्सीन पर भारत में ये वैक्सीन नहीं मानी जा रही कारगर, क्यों?

UK में अगले हफ्ते से जिस वैक्सीन को आम लोगों पर इस्तेमाल की परमिशन मिल गई है, वो भारत में क्यों नहीं काम करेगी? भारत के लिए कौन सी वैक्सीन है बेस्ट?

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Dec 03, 2020Updated at: Dec 03, 2020
UK में अगले हफ्ते से लगाई जाएगी Pfizer की कोविड वैक्सीन पर भारत में ये वैक्सीन नहीं मानी जा रही कारगर, क्यों?

कोविड-19 की वैक्सीन का इंतजार अब लगभग खत्म होने को है। पिछले एक साल में कोरोना वायरस ने जिस तेजी से दुनिया को तबाह किया है, लोग एक ही उम्मीद लगाए बैठे थे कि कोरोना वायरस की वैक्सीन कब आएगी। कोविड-19 की वैक्सीन बनाने की इस जंग में 200 से ज्यादा कंपनियां शामिल थीं। इनमें से 58 वैक्सीन ऐसी हैं, जिनका इस समय इंसानों पर ट्रायल चल रहा है। अच्छी खबर ये है कि इनमें भी 13 वैक्सीन ऐसी हैं, जो फिलहाल फेज-3 ट्रायल में हैं और 7 वैक्सीन ऐसी हैं, जिन्हें लिमिटेड इस्तेमाल के लिए अप्रूवल मिल चुका है। इस लिस्ट में Pfizer-BioNtech की कोविड वैक्सीन भी शामिल हो चुकी है, जिसका इस्तेमाल अगले हफ्ते से यूके (ब्रिटेन) में इमरजेंसी स्थितियों में करना शुरू किया जाएगा। आपको बता दें कि Pfizer-BioNtech की ये वही वैक्सीन है, जो फेज-3 ट्रायल में 95% तक प्रभावकारी मानी गई है। ब्रिटेन पश्चिम का पहला देश बन गया है, जहां कोविड वैक्सीन को इमरजेंसी स्थितियों में आम लोगों को लगाया जाएगा। यूके के हेल्थ सेक्रेटरी Matt Hancock ने बताया कि अगले सप्ताह से यूके में 8 लाख वैक्सीन की डोज उपलब्ध होंगी।

ये खबर एक तरह से हम भारतीयों के लिए भी खुशखबरी होनी चाहिए थी कि Pfizer-BioNtech की बनाई वैक्सीन, जो कि 95% तक प्रभावकारी है, का इस्तेमाल आम लोगों पर शुरू हो चुका है। लेकिन एक्सपर्ट्स इसे खुशखबरी नहीं मानते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि Pfizer-BioNtech की कोविड वैक्सीन ब्रिटेन, अमेरिका जैसे देशों में तो काम करेगी, लेकिन भारत के लिए ये अच्छा विकल्प नहीं साबित होगा। इसके बजाय AstraZeneca Oxford University की वैक्सीन का प्रयोग ज्यादा बेहतर होगा। आगे हम आपको बताएंगे कि एक्सपर्ट ऐसा क्यों कह रहे हैं। लेकिन पहले जानते हैं कि Pfizer-BioNtech की वैक्सीन के बारे में कुछ खास बातें।

COVID Vaccine in India

UK में किन लोगों को मिलेगी सबसे पहले वैक्सीन?

ब्रिटेन की Medicines and Healthcare Products Regulatory Agency (MHRA) ने फिलहाल Pfizer की वैक्सीन के इस्तेमाल की परमिशन इमरजेंसी स्थितियों के लिए दी है। ब्रिटेन ने इस वैक्सीन की 4 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया है, लेकिन अगले हफ्ते वहां 8 लाख वैक्सीन की डोज उपलब्ध होंगी। ब्रिटेन के आधिकारिक बयान के अनुसार ये वैक्सीन पहले उन लोगों को दी जाएगी, जिन्हें कोविड होने से मृत्यु का सबसे ज्यादा खतरा है, जैसे बहुत बूढ़े लोग, गंभीर बीमारियों के शिकार लोग आदि। आम लोगों को अभी वैक्सीन के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

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Pfizer वैक्सीन का दाम क्या है?

Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार Pfizer-BioNTech की वैक्सीन ब्रिटेन में फिलहाल 15 ब्रिटिश पाउंड्स (लगभग 1500 रुपये) में एक डोज उपलब्ध होगी। यहां यह बता देना जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति को 21 दिनों के अंतर पर 2 डोज वैक्सीन लगवानी होंगी, यानी प्रति व्यक्ति ये खर्च 30 ब्रिटिश पाउंड्स (लगभग 3000 हजार रुपये) आएगा।

भारतीयों को इस वैक्सीन से उम्मीद क्यों नहीं रखनी चाहिए?-: एक्सपर्ट की राय

ये बात सही है कि Pfizer-BioNTech की वैक्सीन 95% तक प्रभावकारी साबित हुई है, इसलिए फिलहाल ये फिलहाल सबसे ज्यादा भरोसेमंद वैक्सीन साबित हुई है। लेकिन भारत के हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारतीयों को इस वैक्सीन से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। इस बारे में ओनलीमायहेल्थ ने वायरोलॉजिस्ट और Arizona State University की PhD स्कॉलर पवित्रा वेंकटगोपालन से बात की तो उन्होंने हमें बताया, "फिलहाल हमें ये लग रहा है कि भारत में Pfizer या Moderna की वैक्सीन्स काम नहीं करेंगी और इसका कारण भारत में सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। बल्कि ये वैक्सीन्स दुनिया के ज्यादातर देशों के लिए काम नहीं करेंगी। शायद US-UK में ये काम कर जाएं। भारत में AstraZeneca Oxford University की वैक्सीन के ज्यादा बेहतर काम करने की उम्मीद है। इसके रिजल्ट भी अच्छे हैं और ये भारत के लिए अच्छा विकल्प है।"

एक्सपर्ट्स क्यों मानते हैं Pfizer वैक्सीन का प्रयोग भारत में प्रयोग मुश्किल?

जैसा कि प्रोफेसर वेंकटगोपालन ने बताया कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और कोल्ड चेन सप्लाई की कमी के चलते ये वैक्सीन काम नहीं करेगी। इसके पीछे कारण यह है कि Pfizer-BioNTech की इस वैक्सीन को -70 (माइनस 70) डिग्री सेल्सियस पर स्टोर करके रखने की जरूरत पड़ेगी। अगर किसी एक शहर को वैक्सीन देने की बात हो, तब तो ये वैक्सीन भारत में मंगाकर लोगों को लगाई जा सकती है। लेकिन पूरे देश में इतने ठंडे तापमान वाले स्टोरेज वाली गाड़ियां और इतने ठंडे तापमान वाले कोल्ड स्टोर तैयार करना बहुत खर्चीला है इसलिए फिलहाल इसकी सप्लाई करना बहुत मुश्किल है। इसके बजाय Oxford A-Z ने जो वैक्सीन बनाई है, उसे सामान्य रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) में भी स्टोर करके रखा जा सकता है। इसलिए इस वैक्सीन को देश के सभी हिस्सों तक पहुंचाने में अपेक्षाकृत कम खर्च आएगा, सप्लाई ज्यादा तेजी से की जा सकेगी और इसके लिए नए कोल्ड स्टोर बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे सामान्य रेफ्रिजरेटर के तापमान 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर भी एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाया जा सकेगा।

COVID Vaccine

AstraZeneca Oxford University (ऑक्सफोर्ड वैक्सीन) का दाम कितना होगा?

भारत के लिहाज से देखें तो सप्लाई चेन के अलावा वैक्सीन का दाम भी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से यहां के आम लोगों के लिए Pfizer की वैक्सीन से बेहतर ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन साबित होगी। जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि Pfizer वैक्सीन के एक डोज की कीमत लगभग 1500 रुपए है, जबकि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार वैक्सीन के एक डोज की कीमत लगभग 2.5 डॉलर, यानी 185 रुपये है। ऐसे में अगर प्रत्येक व्यक्ति को इस वैक्सीन की 2 डोज लगवानी हैं, तो उसे लगभग 370 रुपये ही खर्च करने पड़ेंगे, जो कि भारत जैसे निम्नमध्यमवर्गीय आय की जनसंख्या वाले देश के लोगों के लिए ज्यादा आसान होगा।

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तो क्या Oxford की वैक्सीन भी Pfizer की वैक्सीन जितनी प्रभावी है?

फिलहाल फेज-3 ट्रायल के बाद जो आंकड़े दोनों कंपनियों ने जारी किए हैं, उसे देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन पी-फाइजर की वैक्सीन से ज्यादा प्रभावी है। जहां एक तरह Pfizer ने अपनी वैक्सीन को 95% तक प्रभावकारी बताया है, वहीं AstraZeneca Oxford University की वैक्सीन 62% प्रभावकारी पाई गई है। लेकिन इन आंकड़ों में समझने के लिए एक छोटी सी बात और है, जो ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के लिए हमारी उम्मीदें बढ़ाती है। बात दरअसल यह है कि AstraZeneca Oxford की वैक्सीन के ट्रायल के दौरान पहले लोगों को 2 बार में फुल-फुल डोज दिया गया था, जिसके परिणाम में 62% प्रभावकारिता दिखी है। इसके बाद के ट्रायल में जब लोगों को पहली बार में वैक्सीन की छोटी डोज और दूसरी बार में वैक्सीन की फुल डोज दी गई, तो प्लेसिबो ग्रुप के मुकाबले ये रिजल्ट 90% प्रभावकारी पाया गया। इस तरह से अगले कुछ दिनों में जब ट्रायल का पूरा आंकड़ा उपलब्ध होगा, तब उम्मीद है कि इस वैक्सीन को भी भारत की तरफ से आम लोगों के इस्तेमाल के लिए हरी झंडी मिल सकेगी।

तो कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं कि अब कोविड वैक्सीन का इंतजार कुछ महीनों का रह गया है। चूंकि दुनिया के कई देशों में वैक्सीन आम लोगों पर इस्तेमाल की जाने लगी हैं, इसलिए हमें भी उम्मीद करनी चाहिए कि ये महामारी अगले कुछ समय में खत्म हो जाएगी और दुनिया अपने पहले जैसी गति से वापस दौड़ सकेगी।

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