उदास और चिड़चिड़े स्वभाव वाले बुजुर्गों के साथ ऐसे करें व्यवहार, अच्छी होगी आपकी बॉन्डिंग

आपको अपने बुजुर्ग पेरेंट्स को कभी अकेले नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें अकेलापन और उदासी महसूस होती है। 

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariPublished at: Apr 13, 2022Updated at: Apr 13, 2022
उदास और चिड़चिड़े स्वभाव वाले बुजुर्गों के साथ ऐसे करें व्यवहार, अच्छी होगी आपकी बॉन्डिंग

बुढ़ापा हमारे जीवन के फेज में से होता है। जिसमें कई लोगों को बहुत तरह की चिंताएं और गंभीर चिकित्सा परेशानियां हो सकती है। इस समय आपको अपनी स्वतंत्रता खोने और लोगों के दूर जाने का एहसास होने लगता है। कई बार बच्चे अपने काम में इतने व्यस्त होते हैं कि वे अपने बुजुर्ग माता-पिता को समय नहीं दे पाते हैं। यह स्थिति उनके लिए अधिक ज्यादा खतरनाक हो सकती है, जो बुढ़ापे में बिना अपनी पत्नी या पति के जीवन काट रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें कई तरह की बीमारियां भी घेर लेती है। कई बुजुर्ग लोग समय के साथ धीरे-धीरे बात करना बंद कर देते हैं। उनके लिए आम जीवन जीना मुश्किलों से भरा हो सकता है। अगर ऐसे में उनके बच्चे उन्हें नहीं समझते हैं, तो यह स्थिति उनके माता-पिता के लिए कष्टदायी हो सकती है। इससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है लेकिन अगर वे जिद्दी व्यवहार कर रहे है, तो आपको इसके बारे में सावधान होने की जरूरत है। ऐसा किसी बीमारी या मानसिक तनाव के कारण भी हो सकता है। अपनी तरह से  आप उन्हें भरपूर प्यार और केयर दे सकते हैं।

इस तरह से रखें बुजुर्ग पेरेंट्स का ध्यान

1. लगातार बातें करना

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की काफी कमी होती है। ऐसे में आपको अपना समय निकालकर अपने पेरेंट्स से जरूर बात करनी चाहिए। बात करने से उनका मन भी हल्का होता है। उनसे उनकी चिंताओं और समस्याओं के बारे में पूछे और उनसे उनके दिनभर के कामों के बारे में पूछें। जब बच्चे बुजुर्ग पेरेंट्स से बात करते हैं, तो उन्हें उनकी वैल्यू का पता चलता है और वे समझते हैं कि आपकी लाइफ में अभी भी उनकी वही जगह है। दरअसल अपने बच्चों को खोने और उनसे दूर रहने का डर भी रहता है। ऐसे में अगर आप उनसे बात करते हैं या उनके साथ समय बिताते हैं, तो उन्हें अच्छा लगता है। 

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2. उनसे बहस या झगड़ा न करें

कई बार पेरेंट्स तनाव और चिंता में अपने बच्चे को बहुत कुछ बोल जाते हैं और उनपर चिल्लाते हैं लेकिन आपको एक जिम्मेदार बच्चे की तरह अपने माता-पिता से समझदारी से बात करना चाहिए। उनसे बहस, उन्हें धक्का और नाराज होने की बजाय, उनसे उनकी नाराजगी का कारण जानना चाहिए। बुजुर्गों के गुस्से के कई कारण हो सकते हैं। कई बार किसी बीमारी के कारण भी वो बिना बात के आपसे झगड़ सकते हैं। ऐसे में उनसे प्यार से बात करें और उन्हें मजबूत होने का एहसास दिलाएं। ये बताने की कोशिश करें कि वह आपकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण है। 

3. पेरेंट्स को लेकर संवेदनशील बनें

उनके प्रति अपने प्यार को हमेशा जताएं। उन्हें बताएं कि वे कितने महत्वपूर्ण है। जैसे अगर वह सीढ़ियों पर चढ़ रहे हैं, तो उनका हाथ थाम लें ताकि उन्हें सुरक्षा और फ्रिक का एहसास हो। अगर वे आपसे पूछें कि क्या वे अब उतने सुंदर नहीं रहे, तो उन्हें बताएं कि वे आपके लिए कितने सुंदर और खूबसूरत है। उन्हें बाहर घूमने ले जाएं और उनके साथ शोपिंग करें और नए कपड़े खरीदें। मतलब उनकी पसंद का काम करने की कोशिश करें। भले आपको वो काम पसंद न हो। 

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4. साथ मिलकर काम करें

कई बार हम अपने माता-पिता को इतना आराम और सुख-सुविधा देने की कोशिश करते हैं कि उस चक्कर में हम उनके साथ मिलकर काम करना और किचन में समय बिताना भूल जाते हैं। हमेशा अपने मां के बनाए खाने या चीजों की तारीफ करें क्योंकि वाकई पेरेंट्स से अच्छा गिफ्ट एक बच्चे के लिए कुछ नहीं है। जैसे बचपन में वे आपकी हर बात और अकेलापन दूर करते थे। आज उन्हें आपकी जरूरत है। उनके साथ किचन में समय बिताएं और साथ मिलकर खाना बनाएं और खाएं। फिर जो भी कमियां हो, उसपर मिलकर हंसे और बातचीत करें। 

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5. हमेशा अपनी परेशानी बताएं

ऐसा नहीं है कि आपको सिर्फ बुजु्र्ग माता-पिता की परेशानी सुननी है बजाय इसके आप अपनी परेशानियां भी उनसे शेयर कर सकते हैं। इससे आप न केवल दुनिया की बेस्ट सलाह पाते हैं बल्कि उनका पूरा साथ और समर्थन बना रहता है। अगर आपसे कोई गलती या भूल भी हो जाती है या आपके लिए कोई चीज आसान नहीं लगती है लेकिन वे आपको काफी हिम्मत दे सकते हैं। साथ ही इससे उन्हें लगेगा कि आपके लिए वे कितने महत्वपूर्ण है और आज भी उनकी सलाह आपके लिए मायने रखती है। 

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