Positive Parenting: पॉजिटिव पेरेंटिंग का ये तरीका बदल सकता है आपके बच्चों की पर्सनैलिटी

बच्चों की परवरिश में माता-पिता की छोटी-छोटी आदतों का उनकी पर्सनैलिटी पर बड़ा असर पड़ता है। जानें पॉजिटिव पेरेंटिंग के कुछ आसान टिप्स।

Monika Agarwal
परवरिश के तरीकेWritten by: Monika AgarwalPublished at: Sep 17, 2022Updated at: Sep 17, 2022
Positive Parenting: पॉजिटिव पेरेंटिंग का ये तरीका बदल सकता है आपके बच्चों की पर्सनैलिटी

साइकोलॉजिस्ट्स ऐसा मानते हैं कि बच्चों पर 'ना' या 'NO' शब्द का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए बच्चों को हमेशा पॉजिटिव रिस्पॉन्स देना चाहिए। इससे बच्चों की पर्सनैलिटी और ग्रोथ में काफी मदद मिलती है। यही कारण है कि इन दिनों एक खास तरह की पेरेंटिंग काफी चर्चा में है, जिसे 'Yes' पेरेंटिंग कहते हैं। क्या आप इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चे की हर जिद को कैसे पूरा किया जाए? उसकी बातों और मांगों का हमेशा पॉजिटिव जवाब कैसे दिया जाए? तो कुछ टिप्स आपके काम आ सकती हैं।

जैसे कि अगर बच्चा भाग रहा है तो यह कहने की जगह कि 'भागो नहीं'; आप बोल सकते हैं कि 'तुम चल सकते हो' यानी कि हर बात को डांट कर या गुस्से में कहने और नकारात्मक जवाब देने से अच्छा है कि उसको कहने का पॉजिटिव तरीका खोजा जाए। इस तरीके को अपनाने के पीछे एक कारण यह भी है कि बच्चा गुस्सा करने से शायद बात ना माने लेकिन अगर आप उसी बात को किसी दूसरे तरीके से और प्यार से कहेंगे, तो बच्चे पर जल्दी असर होगा। अब आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि हर बार पर तो आप अपने बच्चो को हां नहीं कह सकते, फिर वैसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए, तो यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ खास टिप्स जिनकी मदद से आप अपने बच्चे के लिए 'यस पेरेंट' (Yes Parent) बन सकते हैं।

हाँ कहें लेकिन सीमा निर्धारित करें 

कई बार बच्चा ऐसी चीजों की मांग करने लगता है जिनकी उसको जरूरत भी नहीं है या जिनका उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए बच्चे मीठा खाने की जिद करते हैं, मोबाइल फोन पर गेम खेलने की जिद्द करते हैं या ज्यादा समय तक टीवी देखने की जिद्द करते हैं, तो इसके लिए आप उनको मना करने की बजाय उन चीजों का प्रयोग करने की समय सीमा निर्धारित कर दें। अगर वो अपनी पसंद का भोजन करना चाहते हैं, तो उसके लिए एक दिन या दिन का कोई विशेष समय तय कर दें। बच्चे को उसके मनपसंद काम उसी समय विशेष या दिन विशेष पर करने के लिए कहें। इससे बच्चा आत्मसंतोषी बनेगा और संभव है कि धीरे-धीरे वो गलत लगने वाली आदतों या डिमांड को छोड़ दे।

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बुद्धिमानी से अपने शब्दों का चयन करें

माता पिता अपने बच्चे की हर मांग पूरा नहीं कर सकते। लेकिन हर बार ना कहने की बजाय और भी ऑप्शन चुन सकते हैं, जैसे- आप अपने बच्चे को जानवरों को मारने की मना करने की बजाय उनसे प्यार करने के लिए कह सकते हैं। भागने की बजाय आप यह कह सकते हैं की धीरे धीरे चलो।

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साधारण चीजों के लिए हां कहना सीखें

अगर आप अपने बच्चे को हां कहना चाहते हैं, तो छोटी छोटी चीजों से इसकी शुरुआत करें। क्योंकि हां कहने की आदत बनाने से बहुत कुछ संभव हो सकता है। जैसे चॉकलेट दिलाना, अपने बच्चों को कहीं अच्छी सी जगह पर घुमा सकते हैं। आप अपने बच्चे को उसके पसंद के खिलौने खरीद सकते हैं। आप उनकी जिस जिद को आसानी से पूरा कर सकते हैं, उसके लिए आपको हां कर देनी चाहिए।

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हमेशा कारण बताएं कि आप हां क्यों कह रहे हैं

हर माता पिता के लिए उनके बच्चो को हां कहना इतना आसान नहीं है । आपके बच्चे को पता होना चाहिए कि आप उनकी बातों से सहमत क्यों है। उनको आपकी 'हां' और 'ना' दोनों का कारण बताना चाहिए। जैसे आपका बच्चा जिद करता है कि उसको बाहर खेलने के लिए जाना है, तो आप यह कहते हुए जाने दे सकते हैं कि उसने अपना होम वर्क कर लिया है इसलिए उसको खेलने जाने दिया जा रहा है। इसके अलावा अगर आपका बच्चा जिद करता है कि उसको देर से सोना है, तो आप उसको समझा सकते हैं कि अगर वह देर से सोएगा तो सुबह थकान हो सकती है जिससे उसका दिमाग विकसित नहीं होगा।

आपकी इन छोटी छोटी बदली हुई आदतों से बच्चे काफी खुश हो सकते हैं और आपका बॉन्ड भी अच्छा बन सकता है। साथ ही इस तरह की पॉजिटिव पेरेंटिंग से बच्चों में बुरी आदतें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं क्योंकि उन्हें सही गलत का एहसास होने लगता है।

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