बच्चों को भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है बुरा असर

बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए माता-पिता को काफी मेहनत करनी पड़ती है। कभी-कभी आपकी छोटी सी गलती उनके मन और मस्तिष्क पर बुरा असर डाल सकती है।

 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Mar 30, 2022Updated at: Mar 30, 2022
बच्चों को भूलकर भी न कहें ये 5 बातें, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है बुरा असर

बच्चों का मन बहुत ही चंचल होता है। ऐसे में उनपर हर छोटी से छोटी बातों का असर होता है। शायद आप में से कई लोग ऐसे होंगे, जिनको बचपन में कही कुछ बातें याद हों। इन बातों में कुछ अच्छी और बुरी दोनों तरह की हो सकती हैं। इसलिए माता-पिता या अन्य अभिभावकों को अपने बच्चों के सामने बातों बहुत ही सोच-समझकर बोलनी चाहिए। क्योंकि हमारे द्वारा कही कुछ बातें उनके कोमल मन को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, जरूरी नहीं है कि आप उनसे ये बातें जानबूझ के कहें। कुछ अनजाने में कही बाते होती हैं, जो उनके मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती हैं। इससे उनका कॉन्फिडेंट लेवल बिगड़ सकता है। आज हम इस लेख में आपको कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे हैं, जिसे कभी भी बच्चों को नहीं बोलना चाहिए। इससे उनका मन और मस्तिष्क प्रभावित होता है। 

बच्चों को न कहें ये बातें (Things not to say to your kids )

1. लड़कियां या लड़के ऐसा नहीं करते हैं

बच्चा सिर्फ बच्चा होता है, उन्हें जेंडर में बांटने की गलती न करें। अक्सर हम कुछ काम और चीजों को जेंडर के लिए बांध देते हैं। हमारे द्वारा बनाया गया यह जेंडर रुल्स उनके मन को प्रभावित कर सकता है।

उदाहरण के लिए जब आपका बेटा घर का काम करता है, तो आप उन्हें यह कहकर रोक देते हैं कि लड़के ये काम नहीं करते हैं। इस तरह के रूल्स बच्चों को सिखाना गलत है। ऐसा करने से उनका लड़कियों के प्रति व्यहार शुरू से ही गलत हो सकता है। इसलिए शुरू से ही उन्हें वह करने दें, जो वह करना चाहते हैं। यही बात बेटी पर भी लागू होती है। इसके साथ कई ऐसे शब्द हैं, जो आप बेटे-बेटी को अनजाने में कह देते हैं। जैसे- लड़के रोते नहीं है , लड़कियां पढ़कर क्या करेंगी, तुम्हे तो रोटी ही बेलनी है , लड़कियां बहुत रोती हैं इत्यादि। इस तरह के शब्द कॉन्फिडेंट लेवल बिगाड़ सकते हैं। 

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2. मैं बात नहीं करुंगा/करुंगी

बच्चों और खुद के बीच कभी भी बातचीत का मार्ग बंद न करें। बच्चों को हमेशा अपने विचारों और सवालों को खुद से पूछने का हक दें। ऐसा करने से वे अपने विचार आपसे खुलकर व्यक्त करेंगे। अगर आप नाराज होकर उनसे बात करने का रास्ता बंद कर देते हैं, तो उनके मन की बातें मन में ही रह जाएंगी, जो आगे चलकर आपके और आपके बच्चों के रिश्ते में दरारें उत्पन्न कर सकती हैं। 

ऐसा करने से कुछ बच्चे अपने माता-पिता के सामने अपने बातों को व्यक्त नहीं करते हैं।  ऐसे में उनके मन में बहुत ही गलत और बुरी बातें घर कर जाती हैं।  

3. तुम्हारी वजह से शर्मिंदगी महसूस होती है

कई बार आप अनजाने में इस तरह की बातें अपने बच्चों को कह देते हैं। लेकिन आपका बच्चा आपकी कही इस लाइन को कैसे लेता है यह आप नहीं जानते हैं। इस तरह की कही बातें आपके बच्चे के मन और मस्तिष्क को काफी प्रभावित करती हैं। वह खुद को किसी काम का नहीं समझतें हैं। कभी-कभी इस तरह के शब्द से बच्चे का कॉन्फिडेंट लेवल काफी ज्यादा खराब कर देता है। इसलिए गलती से भी इस तरह के शब्द बच्चों से न कहें।  

4. दूसरे बच्चों से या खुद से तुलना

अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की तुलना खुद से या दूसरे के बच्चों से करने लग जाते हैं। उदाहरण के लिए "तुम 15 साल की हो गई हो, मैं 15 साल की थी तो घर का पूरा काम करती थी" या शर्मा जी का लड़का तुमसे ज्यादा नंबर लेकर आया है इत्यादि। ऐसी कई बातें आप अपने बच्चों से कह देते हैं। यह बातें आपको सामान्य लग सकती हैं, लेकिन बच्चों के मन में इस तरह की बातें घर कर जाती हैं। यह बातें उनके आत्मविश्वास पर बुरा असर डाल सकती हैं। इसलिए कभी भी बच्चों के साथ तुलना न करें। 

5. बार-बार ताने देना

बच्चों को किसी भी चीज के लिए ताना न मारें। अगर उनके नंबर कम आए हैं, तो उन्हें समझाएं या आप कोशिश करें कि वे पढ़ाई में मन लगाएं। बार-बार किसी भी चीज को लेकर ताना मारने से बच्चे चिड़चिड़े और जिद्दी हो जाते हैं। कुछ बच्चों का इस तरह के व्यवहार से इतना गहरा असर पड़ता है कि वह अपनी मनमानी करने लग जाते हैं। इसलिए बच्चों को ताना मारने की कभी भी गलती न करें। 

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बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए माता-पिता को हर छोटी से छोटी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा कहा गया एक शब्द उनके व्यवहार और आत्मविश्वास पर बुरा असर डाल सकता है। इसलिए बच्चों को कुछ भी कहने से पहले यह जरूर सोचें कि क्या यह कहना उनके लिए सही है। 

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