गैस्ट्रिक अल्‍सर के संकेत हैं खाना खाने के बाद पेट में दर्द होना, जानें कारण और बचाव

अल्‍सर कई प्रकार का होता है, लेकिन उसके लक्षण हर प्रकार में अलग होते हैं। अल्‍सर उस समय बनते हैं जब खाने को पचाने वाला अम्ल आमाशय की दीवार को नुकसान पहुंचाता है।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Apr 23, 2018
गैस्ट्रिक अल्‍सर के संकेत हैं खाना खाने के बाद पेट में दर्द होना, जानें कारण और बचाव

अल्‍सर कई प्रकार का होता है, लेकिन उसके लक्षण हर प्रकार में अलग होते हैं। अल्‍सर होने के कुछ सामान्‍य लक्षण हैं - सांस लेने में दिक्‍कत होना, खाने वक्‍त मुंह में जलन महसूस होना, पेट में दर्द होना, उल्‍टी होना, चिड़चिड़ा हो जाना आदि। अल्‍सर उस समय बनते हैं जब खाने को पचाने वाला अम्ल आमाशय की दीवार को नुकसान पहुंचाता है। इसके लिए हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी नामक जीवाणु जिम्‍मेदार होता है। अल्‍सर एच-पायलोरी इंफेक्शन के कारण होता है। 1980 में एक ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक ने एच-पायलोरी (हेलिकोबेक्टर पायलोरी) नामक बैक्टिरिया का पता लगाया था। उन्होंने माना था कि सिर्फ खान-पान और पेट में एसिड बनने से पेप्टिक अल्सर नहीं होते, बल्कि इसके लिए एक बैक्टिरिया भी दोषी है। इसका नाम एच-पायलोरी रखा गया। आइए हम आपको अल्‍सर के लक्षणों के बारे में बताते हैं।

 

अल्‍सर होने के लक्षण

  • अल्‍सर होने पर पेट के ऊपरी हिस्‍से पर असहनीय दर्द होता है। खासकर खाने के बाद पेट में दर्द शुरू हो जाता है। खाली पेट रहने से भी दर्द होता है। इस स्थिति को गैस्ट्रिक अल्‍सर कहते हैं। आहार नली के निचले हिस्से में छाले पड़ जाते हैं, कुछ मामलों में तो आहार नली में छिद्र भी हो जाता है। इससे आहार नली में तेज जलन होती है।
  • अल्‍सर होने पर सांस लेने में दिक्‍कत होती है, माउथ अल्‍सर में ऐसा होता है। बदहजमी की वजह से कभी-कभी एसिड ऊपर की ओर आहार नली में चला जाता है, इससे जलन महसूस होती है। इसका असर गले, दांत, सांस आदि पर पड़ने लगता है। आवाज भारी हो जाती है और मुंह में छाले पड़ जाते हैं। इस तरह की स्थितियों को एसिड रिफ्लक्स डिजीज भी कहा जाता है।
  • खाने में दिक्‍कत होती है, ऐसा मुंह के अल्‍सर में होता है। खाते समय मुंह में जलन सी महसूस होती है और आपसे खाया भी नहीं जाता। यह माउथ अल्सर हो सकता है, जिसमें लापरवाही बिल्कुल भी ठीक नहीं। जब हम खाते हैं तो आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है, जिससे भोजन का पाचन होता है।
  • अल्‍सर होने पर छाती के पास दर्द होता है। अगर दर्द छाती के पास हो तो इसे एसिडिटी रिफ्लेक्शन का असर समझना चाहिए। इससे दिल के दर्द का शक होता है। दिल का दर्द छाती के ऊपरी हिस्से में होता है और कभी-कभी एसिडिटी की वजह से भी उसी जगह दर्द होता है, इसलिए इन दोनों स्थिति के बीच में बिना जांच के अंतर समझ पाना आसान नहीं है।
  • अल्‍सर होने पर आदमी की भूख समाप्‍त हो जाती है। खासकर पेप्टिक अल्‍सर होने पर बिलकुल भूख नही लगती है। सामने खाना होने पर भी खाने की इच्छा नहीं होती।
  • उल्टी होना या उलटी जैसा महसूस होना अल्सर का लक्षण माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में अक्‍सर मरीज को लगता है कि उलटी होने वाली है। लेकिन जब अल्‍सर बढ़ जाता है तो हालत और भी खराब हो सकती है। अल्‍सर बढ़ने पर तो खून की उलटी हो सकती है। ऐसे में स्टूल (मल) का रंग काला हो जाता है।
  • अल्‍सर के मरीजों का वजन बहुत तेजी से घटने लगता है। अल्‍सर होने पर मरीज खाने के प्रति उदासीन हो जाता है, जिसके कारण वजन कम होता है। खाना भी अच्‍छे से नही पच पाता जो वजन घटने का कारण है।  
  • अल्‍सर होने पर मरीज का शरीर ज्‍यादा एक्टिव नही रहता है, उसे हमेशा थकान महसूस होती है। इसके अलावा मरीज का स्‍वभाव भी चिड़चिड़ा हो जाता है।

अल्‍सर के रोगियों को मसालेदार खाना नही खाना चाहिए, तंबाकू, तली-भुनी चीजें, मांसाहार से बचना चाहिए। अल्‍सर के मरीज को अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए, जिससे अल्‍सर को जल्‍दी ठीक किया जा सके।

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