अल्‍सर के दौरान होने वाली परेशानी

अल्‍सर एक गंभीर समस्‍या है जो शरीर के लिए घातक है। अल्‍सर की समस्‍या का इलाज समय पर नही किया गया तो यह गंभीर समस्‍या बन जाती है। जानिए इस बीमारी के होने पर क्‍या-क्‍या दिक्‍कत होती है।

Nachiketa Sharma
अन्य़ बीमारियांWritten by: Nachiketa SharmaPublished at: Jul 08, 2013
अल्‍सर के दौरान होने वाली परेशानी

अल्‍सर उस समय बनते हैं जब खाने को पचाने वाला अम्ल आमाशय की दीवार को नुकसान पहुंचाता है। आमाशय का अल्‍सर, पेप्टिक अल्‍सर या गैस्ट्रिक अल्‍सर इसके प्रमुख प्रकार हैं। अल्सर के लिए हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी नामक जीवाणु जिम्‍मेदार होता है। 

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अल्‍सर की समस्‍या का इलाज समय पर नही किया गया तो यह गंभीर समस्‍या बन जाती है। अल्‍सर होने पर मितली आना, उल्टी आना, गैस बनना, पेट फूलना, भूख न लगना और वजन कम होने जैसी समस्‍यायें होने लगती हैं। आइए हम आपको इसके बारे में विस्‍तार से जानकारी देते हैं।

अल्‍सर में होने वाली परेशानी

  • सांस लेने में दिक्‍कत : अल्‍सर होने पर सांस लेने में दिक्‍कत होती है। जब हम खाते हैं तो आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है, जिससे भोजन का पाचन होता है। बदहजमी की वजह से कभी-कभी एसिड ऊपर की ओर आहार नली में चला जाता है, इससे जलन महसूस होती है। इसका असर गले, दांत, सांस आदि पर पड़ने लगता है। आवाज भारी हो जाती है और मुंह में छाले पड़ जाते हैं। इस तरह की स्थितियों को एसिड रिफ्लक्स डिजीज कहा जाता है।
  • पेट में दर्द : अल्‍सर होने पर पेट के ऊपरी हिस्‍से पर असहनीय दर्द होता है। खासकर खाने के बाद पेट में दर्द शुरू हो जाता है। खाली पेट रहने से भी दर्द होता है। इस स्थिति को गैस्ट्रिक अल्‍सर कहते हैं। आहार नली के निचले हिस्से में छाले पड़ जाते हैं, कुछ मामलों में तो आहार नली में छिद्र भी हो जाता है। इससे आहार नली में तेज जलन होती है।
  • छाती के पास दर्द : अल्‍सर होने पर छाती के पास दर्द होता है। अगर दर्द छाती के पास हो तो इसे एसिडिटी रिफ्लेक्शन का असर समझना चाहिए। इससे दिल के दर्द का शक होता है। दिल का दर्द छाती के ऊपरी हिस्से में होता है और कभी-कभी एसिडिटी की वजह से भी उसी जगह दर्द होता है, इसलिए इन दोनों स्थिति के बीच में बिना जांच के अंतर समझ पाना आसान नहीं है।
  • उलटी आना : उलटी होना या उलटी जैसा महसूस होना अल्सर का लक्षण माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में अक्‍सर मरीज को लगता है कि उलटी होने वाली है। लेकिन जब अल्‍सर बढ़ जाता है तो हालत और भी खराब हो सकती है। अल्‍सर बढ़ने पर तो खून की उलटी हो सकती है। ऐसे में स्टूल (मल) का रंग काला हो जाता है।
  • भूख न लगना : अल्‍सर होने पर आदमी की भूख समाप्‍त हो जाती है। खासकर पेप्टिक अल्‍सर होने पर बिलकुल भूख नही लगती है। सामने खाना होने पर भी खाने की इच्छा नहीं होती।
  • वजन कम होना : अल्‍सर के मरीजों का वजन बहुत तेजी से घटने लगता है। अल्‍सर होने पर मरीज खाने के प्रति उदासीन हो जाता है, जिसके कारण वजन कम होता है। खाना भी अच्‍छे से नही पच पाता जो वजन घटने का कारण है।  

अल्‍सर के रोगियों को मसालेदार खाने से परहेज करना चाहिए। अल्सर के रोगी को ऐसा आहार देना चाहिये जिससे पित्त न बने, कब्ज और अजीर्ण न होने पाये। अल्‍सर के मरीज को अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए, जिससे अल्‍सर को जल्‍दी ठीक किया जा सके।


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