बच्चों में घातक है न्यूमोनिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 17, 2015
Quick Bites

  • नवजात शिशुओं में सबसे ज्यादा रहता है निमोनिया का खतरा।
  • फेफड़ों में संक्रमण के कारण सांस लेने में होने लगती है परेशानी।
  • बच्चे के होंठों और नाखूनों का रंग नीला पड़ जाना आदि लक्षण।
  • संक्रमण से बचने के लिए समय से जरूर लगवायें इसकी वैक्सीन।

सर्दियों का मौसम शुरु होने के साथ साथ शुरु हो जाता है बीमारियो का आना। इस मौसम मे नवजात को भी कई तरह की परेशानियां होने लगती है। इसीलिए नवजात को सर्दियों में खास देखभाल की जरूरत होती है। निमोनिया एक ऐसी बीमारी है जो नवजात को खासा परेशान करती हैं। नवजात में निमोनिया ना हो इसके लिए आपको नवजात का खास ध्यान रखना होता है।


कैसे होता है न्यूमोनिया

न्यूमोनिया में बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण होने की वजह से सांस लेने काफी तकलीफ होती है। बच्चों के एक या दोनों फेफ़डों में पस और तरल पदार्थ भर जाते हैं, जो फेफ़डे के ऑक्सीजन ग्रहण करने में रुकावट पैदा होने लगती है। यह संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस, फंगल इंफेक्शन की वजह से होता है। छोटे बच्चों में निमोनिया की शुरुआत हल्के सर्दी-जुकाम से होती है, जो धीरे-धीरे निमोनिया में बदल जाती है। कई बार जन्म के समय भी शिशु को न्यूमोनिया के इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

लक्षण

  •     बच्चों में बुखार, ठंडक महसूस होना, कंपकपाहट और खांसी न्यूमोनिया के लक्षण हैं।
  •     तेजी से सांस लेना और घरघराहट सुनाई देना।
  •     उलटी, सीने या पेट के निचले हिस्से में दर्द।
  •     बच्चों को दूध पीने में परेशानी होना।
  •     बच्चे के होंठों और नाखूनों का रंग नीला पड़ जाना।


    पांच वर्ष से कम उम्र के ज्यादातर बच्चों को अगर यह बीमारी हो तो उन्हें सांस लेने में बहुत कठिनाई महसूस होती है, इस वजह से शिशु सुस्त हो जाता है और उसे दूध पीने में भी कठिनाई होती है।

इन बातों का रखें ध्यान

  •  न्यूमोनिया से संक्रमण से बचाने के लिए अपने बच्चे को इसकी वैक्सीन जरुर लगाएं। इससे आपके बच्चे का न्यूमोनिया की संभावना कम हो जाती है।

 

  •  अगर आपके बच्चे को ऐसी समस्या हो, तो आप प्रतिदिन सुबह और शाम उसके शरीर के तापमान की जांच करें।   बच्चों में होने वाले बुखार व सर्दी जुकाम को हल्के में ना लें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बच्चों को ज्यादा समय तक गीले में ना रहने दें और ठंडी चीजें खाने को नहीं दें।

 

  •  समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों को न्यूमोनिया होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए उनके जन्म के बाद बच्चों का विस्तृत चेकअप जरूर  करवाना चाहिए, ताकि सही समय पर बच्चे का इलाज करवाया जा सके।जिन बच्चों को टीबी का इन्फेक्शन होता है, उन्हें भी न्यूमोनिया होने की आशंका अधिक होती है।

 

  •  अगर आपके बच्चे को छाती में दर्द की शिकायत है तो इसे हल्के में ना लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।  बच्चे के होंठों और नाखूनों की जांच करते रहनी चाहिए, अगर उनका रंग नीली या स्लेटी हो जाए, तो इसका अर्थ है कि फेफ़डे को सांस लेने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है।


निमोनिया से बचने के लिए कई तरह के वैक्सीन चिकित्सा केंद्रों पर उपलब्ध हैं। इसके लिए इंजेक्शन हर साल और पांच साल में एक बार लगाया जाता है। इसके अलावा अब निमोनिया के लिए ओरल वैक्सीन भी मौजूद हैं।

 

Image Source-getty

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