विज्ञान ने भी माना अनहेल्दी नहीं है भटूरे और नान खाना, सेहत को मिलते हैं इसके कई फायदे

हमारे देश में एक बड़ी आबादी शाकाहारी है और अगर वह दूध-दही या पनीर भी नहीं लेती, तो विटामिन बी12 की कमी का खतरा हमेशा रहता है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Aug 09, 2020Updated at: Aug 10, 2020
विज्ञान ने भी माना अनहेल्दी नहीं है भटूरे और नान खाना, सेहत को मिलते हैं इसके कई फायदे

हम में से ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें छोले भटूरे (chole bhature) और नान जैसी अत्यधिक तेल वाली चीजें खाना बहुत पंसद है। पर वे हमेशा इस बात से अपना मन मार लेते हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए बिलकुल भी फायदेमंद नहीं। वहीं ऐसा भी है कि अगर हम हद से ज्यादा तेल वाली चीजों को खाते हैं, तो इससे मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ता है, पर हाल ही में आए एक शोध की मानें, तो छोले के साथ खाने वाले भटूरे और नान को खाना शरीर में विटामिन बी 12 की कमी को पूरी कर सकता है। मगर कैसे? तो आइए सबसे पहले विस्तार से जान लेते हैं क्या कहता है ये शोध।

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क्या कहता है ये शोध?

हेलसिंकी विश्वविद्यालय (University of Helsinki) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, यह पाया गया कि किण्वित आटा विटामिन बी 12 का एक समृद्ध स्रोत हो सकता है, एक आवश्यक विटामिन है, जिसकी कमी होने पर लोगों को बाहर से सप्लीमेंट लेकर इसे पूरा करना पड़ जाता है। नान, भटूरा और ब्रेड बनाने के लिए इसे फर्मेंटेट करना पड़ता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि एक बैक्टीरिया (Propionibacterium freudenreichii) के साथ किण्वित अनाज आधारित सामग्री में पर्याप्त रूप विटामिन बी 12 होता है, जो शारीरिक स्वास्थ्य सहित मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए बेहद जरूरी है। 

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भटूर और नान सेहत के लिए कैसे है फायदेमंद?

भटूरे और नान को लैक्टोबैसिलस ब्रविस के साथ फर्मेन्टेट किया जाता है, जो पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इस शोध में 11 विभिन्न अनाज-आधारित सामग्रियों का उपयोग किया और उन्हें एक विशेष बैक्टीरिया (Propionibacterium freudenreichii) के साथ किण्वित किया। इसके बाद तीन-दिवसीय किण्वन प्रक्रिया के दौरान, देखा गया कि ये तमाम अनजों में विटामिन बी-12 की अच्छी मात्रा पाई गई। 

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विटामिन बी 12 इतना आवश्यक क्यों है?

यह एक महत्वपूर्ण माइक्रोन्यूट्रिएंट है जो नर्वस सिस्टम को बनाए रखने और रक्त कोशिकाओं के निर्माण जैसे कार्यों के लिए आवश्यक है। हालांकि, बी 12 मुख्य रूप से एनिमल बेस्ड भोजन में पाया जाता है। जो लोग केवल शाकाहारी हैं, उन्हें बी12 की गोलियों को लेना चाहिए या इस अपने भोजन में सम्मित करना चाहिए, जिसमें अच्छी मात्रा में विटामिन बी 12 जोड़ा गया हो। विटामिन बी12 केवल मांस, मछली, दूध और पनीर से ही प्राप्त होता है। यह न तो हरी सब्जियों में होता है, न फलों में इसलिए फर्मेन्टेड चीजों को अपने खान-पान का हिस्सा बनाएं। इसके अलावा इसकी कमी होने से

  • हाथ-पांव में अकारण झुनझुनी होती हो।
  • मुंह में बार-बार छाले आ जाते हैं।
  • जीभ के दाने होते हैं।
  • होंठ किनारे से कट-पिट जाता है।
  • अकारण भूख नहीं लगती है।
  • स्मरण शक्ति कम होने लगती है और लगभग डिमेंशिया जैसी स्थिति पैदा होने लगती है।

कई बार विटामिन बी12 और फॉलिक एसिड युक्त भोजन लेने के बाद भी शरीर में इनकी कमी हो सकती है। क्योंकि हो सकता है यह सब आपके शरीर में तो जा रहा हो लेकिन आपकी आंतों में न के बराबर पच पाता हो। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लें और फिर अपनी डाइट में इसे शामिल करें।

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