युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है ब्रेन स्ट्रोक, सही समय पर इस तरह करें बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 04, 2018
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Quick Bites

  • युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा।
  • हर तीन मिनट में होती है एक व्यक्ति की मौत।
  • लगभग 85 प्रतिशत स्ट्रोक इस्कीमिक स्ट्रोक होते हैं।

आजकल की लाइफस्टाइल के कारण लोगों में कई तरह की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आपके खान-पान और आदतों का असर आपकी सेहत पर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में ब्रेन स्ट्रोक की समस्या बहुत तेजी से बढ़ी है। खासकर युवाओं में ये समस्या ज्यादा देखी गई है। हाल में आई एक रिसर्च में पता चला है कि पिछले एक दशक में भारतीयों में ब्रेन स्ट्रोक की समस्या बढ़ रही है और इसके कारण हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। रिसर्च में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार देश में हर तीन सेकंड में कोई न कोई ब्रेन स्ट्रोक का शिकार होता है और हर तीन सेकंड में एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक से मरता है। युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ने के पीछे कारण मोटापा, शराब की लत, नशीले पदार्थों का सेवन, फास्ट फूड्स और जंक फूड्स का सेवन, ब्लड प्रेशर की समस्या और कोलेस्ट्रॉल की समस्या है।

क्या हैं ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण

  • बोलने और समझने में दिक्कत। आवाज में लड़खड़ाहट हो सकती है या किसी की बात को समझने में दिक्कत हो सकती है।
  • चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी या इनका सुन्न होना। विशेष रूप से शरीर के एक तरफ के चेहरे, हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना।
  • एक या दोनों आंखों से देखने में दिक्कत महसूस करना। आपको अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला या काला दिख सकता है या एक का दो दिख सकता है।
  • अचानक तेज सिर दर्द हो सकता है और इसके साथ ही उल्टी, चक्कर आना या बेहोशी हो सकती है।
  • चलने में परेशानी। ज्यादा चलते समय अचानक लड़खड़ना।

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कई तरह के होते हैं स्ट्रोक

लगभग 85 प्रतिशत स्ट्रोक इस्कीमिक स्ट्रोक होते हैं। शेष 15 प्रतिशत स्ट्रोक ब्रेन हेमरेज के कारण होते हैं। ब्रेन हेमरेज का एक प्रमुख कारण हाई ब्लडप्रेशर है। इस्कीमिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की धमनियां संकरी या अवरुद्ध हो जाती हैं,जिससे रक्त प्रवाह में अत्यधिक कमी हो जाती है। इसे इस्कीमिया कहा जाता है। इस्कीमिक स्ट्रोक के अंतर्गत थ्रॉम्बोटिक स्ट्रोक को शामिल किया जाता है। जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में से किसी एक में रक्त का थक्का (थ्रॉम्बस) बनता है तो थ्रॉम्बोटिक स्ट्रोक पड़ता है। यह थक्का धमनियों में वसा के जमाव (प्लॉक) के कारण होता है जिसके कारण रक्त प्रवाह में बाधा आ जाती है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लीरोसिस कहा जाता है।

क्या है इसका इलाज

  • इस्कीमिक स्ट्रोक का इलाज करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर को जल्द से जल्द मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बहाल करना होता है। दवाओं के जरिये आपातकालीन उपचार के अंतर्गत थक्के को घुलाने वाली थेरेपी स्ट्रोक के तीन घंटे के भीतर शुरू हो जानी चाहिए। अगर यह थेरेपी नस के जरिये दी जा रही है, तो जितना शीघ्र हो, उतना अच्छा है। शीघ्र उपचार होने पर न केवल मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है बल्कि जटिलताएं होने के भी खतरे घट जाते हैं।

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  • इसके अलावा एस्पिरिन नामक दवा भी जाती है। एस्पिरिन रक्त के थक्के बनने से रोकती है। इसी तरह टिश्यू प्लाजमिनोजेन एक्टिवेटर संक्षेप में 'टीपीए (रक्त के थक्के को दूर करने की दवाई) का नसों में इंजेक्शन भी लगाया जाता है। टीपीए स्ट्रोक के कारण खून के थक्के को घोलकर रक्त के प्रवाह को फिर बहाल करता है।
  • मस्तिष्क तक सीधे दवाएं पहुंचाना डॉक्टर पीडि़त व्यक्ति के कमर (जांघ)की एक धमनी(आर्टरी) में एक लंबी, पतली ट्यूब (कैथेटर) को डालकर इसे मस्तिष्क में स्ट्रोक वाली जगह पर ले जाते हैं। कैथटर के माध्यम से उस भाग में टीपीए को इंजेक्ट करते हैं।
  • यांत्रिक रूप से थक्का हटाना:डॉक्टर यांत्रिक रूप से क्लॉट को तोड़ने और फिर थक्के को हटाने के लिए पीडि़त शख्स के मस्तिष्क में एक छोटे से उपकरण को डाल सकते हैं और इसके लिए वे एक कैथेटर का उपयोग कर सकते हैं।

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