बच्चे और बड़े दोनों हो सकते हैं एडीएचडी सिंड्रोम के शिकार, जानें क्या है ये

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 09, 2018
Quick Bites

  • एडीएचडी दिमाग से संबंधित विकार होता है।
  • इस विकार से बच्चे और बड़े दोनों हो सकते हैं प्रभावित।
  • बच्चों और बड़ों में अलग-अलग हैं एडीएचडी के लक्षण।

एडीएचडी यानी अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर को आमतौर पर बच्चों की समस्या माना जाता है मगर आजकल इस डिस्आर्डर का शिकार युवा और बड़े भी हो रहे हैं। चीजों को भूल जाना, बात-बात पर उदास हो जाना, व्याकुल हो जाना, बेचैनी, नशे की लत आदि इस डिसआर्डर के प्रमुख लक्षण हैं। आमतौर पर इस डिसआर्डर का शिकार स्कूली बच्चे ज्यादा होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक स्‍कूल के बच्‍चों को एडीएचडी  4% से 12% के बीच प्रभावित करता है। इसके अलावा लड़कियों की तुलना में लड़कों को ये समस्या ज्यादा होती है। आइए आपको बताते हैं कि क्या है एडीएचडी और कैसे अलग है बच्चों और बड़ों में एडीएचडी।

क्या है एडीएचडी

एडीएचडी अर्थात अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर, दिमाग से संबंधित विकार होता है जो बच्‍चों और बड़ों दोनों को हो सकता है। एक शोध के मुताबिक भारत में हर 20 में से 1 व्यक्ति इस डिसआर्डर का शिकार है। हालांकि बच्‍चों में इस रोग के होने की अधिक संभावना होती है। इस विकार के होने पर व्यक्ति के व्‍यवहार में कुछ अजीब बदलाव आ जाते हैं और याददाश्‍त भी कमजोर हो जाती है। यदि दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अटेंशन डेफिसिट हायपरएक्टिविटी यानी एडीएचडी का अर्थ है, किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को ठीक ढंग से इस्तेमाल न कर पाना। दरअसल ये समस्या कुछ रसायनों के इस्तेमाल से दिमाग की कमजोरी के कारण पैदा होती है।

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बच्चों और बड़ों में अलग-अलग लक्षण

एडीएचडी एक ऐसी समस्या है, जिसका शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है। बच्चों और बड़ों में इस डिसआर्डर के अलग-अलग लक्षण होते हैं। आमतौर पर स्कूली बच्चों में निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं।

  • स्कूल और घर पर लापरवाही से ढेरों मामुली सी गलतियां करना।
  • बच्चे द्वारा निर्देशों का पालन ना करना, उन्हें न सुनना और न ही उन पर ध्यान देना।
  • किसी भी कार्य को सही ढंग से ना करना।
  • नोटबुक व होमवर्क आदि भूल जाना।
  • बातें भूलना व बहुत ज्यादा चंचल होना।
  • एक जगह पर ना बैठ पाना, व्याकुल रहना।
  • अपनी बारी का इंतज़ार ना कर पना, संयम ना रख पाना।
  • अक्सर क्लास में चिल्लाना।

बड़ों में अलग हैं एडीएचडी के लक्षण

  • आसानी से किसी भी चीज से ध्यान हट जाना।
  • योजनाबद्ध ना होना।
  • बातें भूल जाना।
  • बातों में टालमटोल करना।
  • हमेशा देरी करना।
  • हमेशा उदासी भरा रहना।
  • डिप्रेशन में रहना।
  • नौकरी की समस्या पैदा होना।
  • जल्द ही किसी भी बात पर बेचैन होना।
  • ड्रग या किसी और नशीली चीज़ की लत होना।
  • रिश्तों से जुड़ी समस्याएं होना।

क्या हैं एडीएचडी के कारण

एडीएचडी के निश्चित कारणों के बारे में अभी तक सटीक जानकारी नहीं मिल सकी है, लेकिन इसके कई कारणों का अनुमान लगाया जाता है जैसे- अनुवांशिक कारण, शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण, चीनी और रिफाइंड फूड्स का ज्यादा सेवन, समय से पहले जन्म होना और सिर की कोई गंभीर चोट आदि।

क्या है एडीएचडी का इलाज

यदि शिक्षक आपको सूचित करें कि आपके बच्चे को पढ़ने में दिक्‍कत है, इसका व्‍यवहार अन्‍य बच्‍चों से अलग है और ध्‍यान देने में दिक्‍कत होती है तो विशेषज्ञ से संपर्क करें। एडीएचडी की समस्या बच्चों में कोई साधारण बात नहीं है बल्कि एडीएचडी के लक्षण दिखाई देने पर माता-पिता को जल्द से जल्द मनोचिकित्सक की सलाह लेनी जरूरी है। बच्चों में इस समस्या को दूर करने के लिए मेडिसीनल ट्रीटमेंट दिया जा सकता है। इसे ठीक करने के लिए कई तरह की थैरेपीज का इस्तेमाल किया जाता है जैसे- साइकोथेरेपी (काउंसलिंग), बिहेवियरल थैरेपी, डांस थैरेपी और प्ले थैरेपी आदि। बड़ों में एडीएचडी के लक्षण दिखने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

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