आंखों में दिखने वाले धब्बे हो सकते हैं मैकुलर डिजेनेरेशन का संकेत, जानें लक्षण और इलाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 28, 2018
Quick Bites

  • इस रोग में व्यक्ति की रेटिना पर छोटे-छोटे धब्बे दिखने लगते हैं।
  • 60 से 65 वर्ष के बीच यह समस्या आम है मगर युवाओं को भी है खतरा।
  • व्यक्ति को तनाव और मतिभ्रम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

आंखें हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक है क्योंकि ये बहुत महीन टिशूज से बनी होती हैं। इसलिए छोटी-मोटी लापरवाही होने पर आंखों में कई बड़े और गंभीर रोग हो सकते हैं। कई बार व्यक्ति की आंखों में छोटे-छोटे धब्बे दिखने लगते हैं। आंखों में धब्बों की इस समस्या का कारण मैकुलर डिजेनेरेशन हो सकता है। यह एक खतरनाक रोग है क्योंकि इसके कारण आंखों की रोशनी जा सकती है और व्यक्ति अंधा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं क्या है ये रोग और कैसे कर सकते हैं इससे बचाव।

क्या है मैकुलर डिजेनेरेशन

आंखों में धब्‍बेदार विकार की समस्‍या मैकुला के कारण होती है। जो रेटीना के केंद्र में होता है। मैकुला आईबॉल के अंदर पीछे की तरफ मौजूद ऊतकों की एक परत होती है। सामान्‍यत: यह समस्‍या 50 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में यह समस्‍या अधिक होती है। यह दो प्रकार का होता है - गीला धब्‍बेदार विकार और सूखा धब्‍बेदार विकार।

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किन कारणों से होता है मैकुलर डिजेनेरेशन

आमतौर पर ये समस्या बड़ी उम्र के लोगों के लोगों में देखने को मिलती है। 60 से 65 वर्ष के बीच यह समस्या आम हो जाती है। यदि किसी के घर में पहले से यह समस्या हो तो अगली पीढ़ी में इसके होने की आशंका बढ़ जाती है। जो व्यक्ति धूम्रपान के आदि हों, या जिन्हें इसके धुएं के बीच रहना पड़ता हो उनमें भी  मैक्यूलर डिजनेरेशन के होने की आशंका बढ़ जाती है।

मोटापा और दिल की बीमारियां खतरनाक

मोटापा अपने आप में एक ऐसी समस्या है, जो किसी भी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्या के पनपने की आशंका शरीर में बढ़ा देता है। मोटापे के कारण भी बुढ़ापे में व्यक्ति को मैकुलर डिजेनेरेशन की समस्या हो सकती है। जिन व्यक्तियों को हृदय से जुड़े रोग हों उनमें भी मैक्यूलर डिजनेरेशन के होने की आशंका ज़्यादा रहती है। बीमारी बढ़ने की अवस्था में व्यक्ति को तनाव और मतिभ्रम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं मैक्यूलर डिजनेरेशन जिसकी शुरुआत ड्राई (सूखे) मैक्यूलर डिजनेरेशन से होती है, बढ़ते-बढ़ते यह खुद ही नम मैक्यूलर डिजनेरेशन में भी परिवर्तित हो सकता है। इसीलिए इसकी समय पर जाँच और रोकथाम आवश्यक होती है।

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कैसे करें इस बीमारी से बचाव

आंखों में धब्बों की समस्या हो, इससे पहले ही आप इससे बचाव के लिए कुछ आसान आदतें अपना सकते हैं। ये आदतें न सिर्फ आपको आंखों के रोगों से बचाएंगी बल्कि बुढ़ापे में होने वाली अन्य ढेर सारी बीमारियों से भी बचाएंगी।

  • आंखों की नियमित जांच करवाते रहना चाहिए। आंखों की नियमित जांच कराने से इस बीमारी का पता चल सकता है।
  • धब्‍बेदार विकार के लिए जिम्‍मेदार कारकों में है धूम्रपान। स्‍मोंकिंग करने वालों को स्‍मोकिंग न करने वालों की तुलना में आंखों के धब्‍बेदार विकार के होने की आशंका अधिक होती है। इसलिए धूम्रपान करने से बचना चाहिए।
  • खाने में ताजे फल, हरी और पत्‍तेदार संब्जियों को शामिल कीजिए। गोभी, पालक, मटर, ब्रोक्‍कोली जैसी सब्जियों में एंटीऑक्‍सीडेंट के साथ ल्‍यूटीन होता है।
  • अपने डायट चार्ट में मछली और सूखे मेवे को शामिल कीजिए। मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो ड्राई मैकुलर डिजीज होने की संभावना को कम करता है। अखरोट में भी ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो आंखों के इस विकार को दूर करने में मददगार है।

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