Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

गर्मियों में नॉर्मल डिलीवरी के बाद वजाइनल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? जानें डॉक्टर से

गर्मियों में प्रसव के बाद महिलाओं की इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। अगर वे अपनी हाइजीन का ध्यान नहीं रखती हैं, तो वजाइनल इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है।

गर्मियों के दिनों में नाॅर्मल डिलीवरी के बाद वजाइनल इंफेक्शन का रिस्क काफी बढ़ सकता है। निश्चित तौर पर नाॅर्मल डिलीवरी के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर डिलीवरी के बाद उन्हें वजाइनल इंफेक्शन हो जाए, तो यह बिल्कुल करेले पर नीम चढ़े जैसा होगा। कहने का मतलब है कि नाॅर्मल डिलीवरी के बाद वजाइनल इंफेक्शन महिला की रिकवरी को धीमा कर सकता है और कई तरह शारीरिक समस्याएं खड़ी कर सकता है। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि गर्मियों में नाॅर्मल डिलीवरी के बाद वजाइनल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? इस बारे में जानने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से विस्तार में बात की।

गर्मियों में नॉर्मल डिलीवरी के बाद वजाइनल इंफेक्शन का रिस्क क्यों बढ़ जाता है?

risk of vaginal infection after normal delivery in summers causes 2 (4)

गर्मी और उमस

गर्मियों के मौसम में पसीना बहुत ज्यादा बहता है। डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को टांके लगते हैं और ब्लीडिंग भी हैवी होती है। ऐसे में उन्हें पैड लगाकर रखना पड़ता है। ऐसे में जननांग के क्षेत्र में हवा पास नहीं हो पाती है, जिससे वह हिस्सा पसीने से भर जाता है। यह स्थिति हानिकारक कीटाणुओं को जन्म देती है, जिसकी वजह से खुजली, रैशेज और गंभीर इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है।

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पोस्टपार्टम डिस्चार्ज

प्रसव के बाद महिलाओं को न सिर्फ वजाइनल ब्लीडिंग होती है, बल्कि म्यूकस भी बाहर निकलता है। यह पूरी तरह सामान्य है। ऐसा लगभग प्रसव के बाद 4 से 6 हफ्तों तक हो सकता है। लेकिन यह स्थिति महिलाओं में इंफेक्शन का एक बड़ा कारण बनकर उभरती है। विशेषकर, तब जब महिला पैड को समय पर नहीं बदलती या साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखती हैं, जिससे गर्मी के दिनों में चिपचपापन और पसीने के आने की समस्या बढ़ जाती है।

पेरिनियल टियर और टांके

नॉर्मल डिलीवरी के दौरान योनि और गुदा के बीच के हिस्से (पेरिनियम) में कई बार चीरा लगाया जाता है या डिलीवरी के दौरान दबाव बनाने के कारण वह फट जाता है, जिसे डाॅक्टर टांका लगाकर ठीक करते हैं। ये टांके और खुले घाव भी इंफेक्शन के लिए एन्वायरमेंट क्रिएट करते हैं। वहीं, गर्मी के दिनों में शरीर में बन रहा पसीने बैक्टीरिया को पनपने के लिए सही वातावरण प्रदान करता है। ऐसे में घाव में सूजन और दर्द बढ़ सकता है। यहां तक मवाद भी जम सकता है।

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निष्कर्ष

प्रसव के बाद महिलाएं शारीरिक रूप से काफी ज्यादा थकान और कमजोरी से भर जाती है। आमतौर पर डिलीवरी के बाद महिलाओं की सारी ऊर्जा घावों को भरने, खून की कमी को पूरा करने और स्तनपान के लिए दूध बनाने में खर्च हो जाती है। ऐसे में इम्यून सिस्टम इतना कमजोर हो जाता है कि आसानी से किसी भी तरह के संक्रमण की चपेट में आ जाता है। इसलिए, हर महिला को डिलीवरी के बाद स्पेशल केयर की जरूरत होती है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • डिलीवरी के बाद संक्रमण से बचने के लिए कितनी बार पैड बदलना चाहिए?

    गर्मियों में नमी अधिक होती है, इसलिए संक्रमण से बचने के लिए हर 4-6 घंटे में पैड बदलना चाहिए।
  • वजाइनल इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं?

    वजाइनल इंफेक्शन होने पर खुजली, योनि से असामान्य दुर्गंध आना, टांकों में सूजन या तेज दर्द और पेशाब के दौरान जलन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
  • क्या टांकों की सफाई के लिए किसी विशेष लोशन की जरूरत होती है?

    बिना डॉक्टर की सलाह के योनि में किसी तरह का केमिकल युक्त प्रोडक्ट यूज न करें।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    May 05, 2026 15:42 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 05, 2026 15:42 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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