25 से ज्यादा बीएमआई है आपके लिए खतरे की घंटी, ऐसे करें मोटापे को कंट्रोल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 12, 2018
Quick Bites

  • अगर आपका बीएमआई 25 से ज्यादा है तो ये खतरनाक है।
  • मोटापे की वजह से बढ़ जाता है दिल की बीमारियों का खतरा।
  • मोटापा घटाने के लिए सही आहार और व्यायाम है जरूरी।

मोटापा, डायबिटीज और हाइपरटेंशन का कारण है। इसका समय रहते इलाज न हो, तो दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। मोटापे की बढ़ती समस्या की वजहों में से एक है असंतुलित आहार। लोग घर के बने परंपरागत हेल्दी खाने की जगह जंक फूड की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। खासतौर से शहरी इलाकों में तो ये बेहद आसानी से कहीं भी उपलब्ध हैं। हालांकि मोटापे के लिए सिर्फ जंक फूड ही जिम्मेदार नहीं है। तकनीकी विकास ने भी इसमें भागीदारी निभाई है। नए जमाने के गैजेट्स ने लोगों को अधिकतर समय के लिए खुद से बांध लिया है, जिसके चलते लोगों की शारीरिक सक्रियता या तो कम हो गई है या नहीं के बराबर पहुंच गई है। बच्चों का जंक फूड लेना और बेहद कम शारीरिक सक्रियता ने मिलकर मोटापे की समस्या बढाई है।

जरूरी है सही मात्रा

अगर शरीर को उसकी जरूरत से ज्यादा खिलाया जाएगा तो नतीजा लगातार वजन बढ़ने के रूप में सामने आएगा। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो अंतत: व्यक्ति मोटापे की चपेट में आ जाएगा। लेकिन मोटापे से बचाव संभव है। इसके लिए सिर्फ सही मात्रा में अच्छी क्वॉलिटी का खाना खाना है।

खाने पर हो कंट्रोल

खानपान में बदलाव मोटापे की समस्या से निबटने का सबसे आसान और कम खर्चीला उपाय है। मोटापे से लड़ाई का पहला चरण होता है वजन कम करना और फिर आगे भी इसे बरकरार रखना। 3 से 6 महीने के भीतर अगर आप 5 से 10 फीसद वजन घटा लेते हैं तो आराम से अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। एक हफ्ते में 500 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक वजन घटाना सुरक्षित है, जो न सिर्फ संभव है, बल्कि स्थायी रहने वाला भी है।

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मोटापे का मुकाबला

अपने बीएमआइ (बॉडी मास इंडेक्स) और डब्ल्यूएचआर (वेस्ट हिप रेशियो) पर रखें नजर : विशेषज्ञों की मानें तो जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 25 से अधिक होता है, वे ओबेस यानी मोटे की श्रेणी में आते हैं। इसी तरह से वेस्ट-हिप रेशियो के मामले में भी पुरुषों में यह 0.90 से अधिक और स्त्रियों में 0.85 से अधिक होने का मतलब है पेट का मोटापा। जो लोग ओवरवेट हैं, उन्हें इन दोनों संकेतों पर नजर रखना चाहिए।

बनाएं खानपान की योजना

सही समय पर अच्छा भोजन लेना सुनिश्चित करें। किसी प्रशिक्षित न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह से एक डाइट चार्ट बनाएं, जिसमें आपको क्या और कब खाना है, सब कुछ शामिल हो। पूरे हफ्ते के खानपान की योजना बना लेने से डाइट में सारे आवश्यक पोषक तत्व, प्रोटीन और विटमिंस शामिल हो जाएंगे और फैट व कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम हो जाएगी। यह मोटापे से जंग में आपकी अच्छी शुरुआत होगी। फुल क्रीम दूध और अन्य डेयरी उत्पाद की जगह फैट फ्री या स्किम्ड उत्पाद चुनें। हर रोज कम से कम पांच बार फल व सब्जियां खाने का लक्ष्य रखें। थोड़ा-थोड़ा हर बार खाने के साथ लें। सबसे अच्छा तरीका है मेन कोर्स यानी लंच और डिनर में अपने खाने की आधी प्लेट सैलेड से भरें और बाकी हिस्से में मीट, मछली, अंडा, बींस, आलू, चावल, पास्ता या ब्रेड जैसी कोई चीज शामिल करें। नाश्ता करना कभी न भूलें। हर बार खाने की मात्रा में थोडी कमी करना आपकी डाइटरी एनर्जी डेंसिटी को कम करने में मददगार होगा। पेय पदाथरें में पानी को अपनी पहली पसंद बनाएं।

खाते समय टीवी से बचें

टीवी देखते अथवा पढते समय खाने से बचें। यही वो समय होता है, जब हम अनजाने में ही जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं और खाने को अच्छे से चबाए बिना ही निगल लेते हैं। सही पाचन के लिए खाने को अच्छी तरह चबाकर खाना बहुत जरूरी है।

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कम खाने या ज्यादा खाने से बचें

खाने के असुरक्षित तरीके कभी न अपनाएं। मसलन किसी एक चीज को अपनी डाइट से पूरी तरह गायब कर देना या खुद को भूखा रखना। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपका वजन बढ रहा है तो धीरे-धीरे मोटापा घटाएं। जल्दबाजी में वजन घटाने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपकी सेहत पर अच्छा असर दिखाने की बजाय बुरे प्रभाव छोडेगा। इसके साथ ही एक साथ बहुत सारा खाने यानी बिंज ईटिंग से भी बचें। जब भी आपको भूख लगी हो, यह ध्यान रखें कि कुछ भी सिर्फ स्वाद के लिए नहीं खाना है। यह भी सत्य है कि लोग जब तनाव में होते हैं तब जरूरत से ज्यादा खाते हैं। ऐसे में जब भी आप तनाव में हों तब खाने से बचें। या इस बात का ध्यान रखें कि स्नैक्स में सिर्फ स्वास्थ्यकर चीजें ही शामिल हों।

व्यायाम में लगाएं दिल

अगर आप शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं तो सेहत के साथ अच्छा नहीं कर रहे हैं। ज्यादा कैलरी, फैट और कोलेस्ट्रॉल जो आप खाने में लेते हैं, उसके संतुलन के लिए शारीरिक व्यायाम की जरूरत होती है। ऐसा नहीं करने से ये चीजें फैट के रूप में शरीर में जमा होती रहती हैं। अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पो‌र्ट्स मेडिसिन के अनुसार मोटे लोगों को एक सप्ताह में कम से कम 150 मिनट (22 मिनट प्रत्येक दिन) तक व्यायाम करना चाहिए। इसके लिए एरोबिक्स, जॉगिंग, वॉकिंग, रनिंग आदि करना चाहिए। इसके अलावा योग भी किया जा सकता है। योग के कुछ आसन जैसे-त्रिकोणासन, कोणासन, उत्पादासन, पवनमुक्तासन, सूर्य नमस्कार, गरूडासन आदि वजन कम करने में सहायक हैं। व्यायाम व योग करने से हार्ट अटैक, उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि नियंत्रित रहता है।

समझदारी से करें खरीदारी

अपने किचन और फ्रिज को जंक, प्रोसेस्ड या प्रिजर्व फूड से भर देना सबसे बडी गलती होती है। जब घर में खाने की ढेर सारी चीजें होती हैं तो वे पेट तक पहुंचने का रास्ता अपने आप ढूंढ लेती हैं। बेहतर होगा कि भविष्य में शॉंपिंग से पहले अपनी और अपने परिवार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए लिस्ट तैयार करें। रंग-बिरंगे, मौसमी फल, सब्जियां व अंकुरित अनाज खरीदारी की लिस्ट में सबसे ऊपर होनी चाहिए। मोटापा कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह है। ऐसे में जब भी आपको महसूस हो कि वजन बढ़ रहा है, तुरंत सतर्क हो जाएं और मोटापे को खुद पर हावी होने से रोकने के उपाय करें। खानपान की सही आदत ही मोटापे से निबटने का बेहतरीन तरीका है।

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महत्वपूर्ण तथ्य

  • खराब पोषण, कम कसरत और सस्ते में मिलने वाला वसा से भरा खाना ओबेसिटी का मुख्य कारण है। इसके अलावा कुछ दवाएं, तनाव, नींद की कमी और आनुवांशिक कारण भी मोटापे के कारणों में शामिल हैं।
  • आमतौर पर लोग जितना खाना खाते हैं उसके अनुसार शारीरिक श्रम या व्यायाम नहीं करते। समय से सोना-जागना उनकी दिनचर्या में महत्व नहीं रखता। इसके अलावा हमारे काम करने, उठने-बैठने के तरीके भी इसके लिए कारण बनते हैं। महिलाएं अकसर अपनी परवाह नहीं करतीं। वे अपने नियमित खानपान, आराम और भरपूर नींद की परवाह नहीं करतीं।
  • गर्भावस्था के समय बच्चे या स्त्री का कमजोर होना भी ओबेसिटी की समस्या को बढाता है, क्योंकि स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की चाह में स्त्रियां स्वास्थ्य को ध्यान में रखे बिना ही कुछ भी खाती रहती हैं।
  • शरीर में ओबेसिटी का पता बॉडी मांस इंडेक्स (बीएमआइ) से चलता है। यदि बीएमआई 25 से ज्यादा हो तो ऐसे लोग ओबेसिटी की श्रेणी में आते हैं। फास्ट फूड के सेवन और बिजी लाइफस्टाइल की वजह से लोग फिजिकली इनेक्टिव रहते हैं। इससे पेट के आसपास और विभिन्न अंगों में चर्बी बढने लगती है।

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