जानवरों के काटने से क्यों होता है रेबीज और क्या हैं इसके लक्षण और बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 27, 2018
Quick Bites

  • रेबीज एक तरह का वायरल इंफेक्शन है, जो जानवरों के काटने से फैलता है।
  • रेबीज के वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम पर हमला करते हैं और पागल बना देते हैं।
  • जानवरों के चाटने से भी फैल सकता है रेबीज का वायरस।

वर्ल्ड रेबीज डे यानी विश्व रेबीज दिवस हर साल 28 सितंबर को मनाया जाता है। रेबीज एक ऐसा वायरस है, जो आमतौर पर जानवरों के काटने से फैलता है। ये एक जानलेवा रोग है क्योंकि इसके लक्षण बहुत देर में दिखने शुरू होते हैं। इसी कारण जब किसी व्यक्ति में रेबीज के वायरस होते हैं, तो लक्षण दिखने तक इलाज का समय आमतौर पर निकल चुका होता है। रेबीज खतरनाक है मगर इसके बारे में लोगों की कम जानकारी और ज्यादा घातक साबित होती है।

आमतौर पर लोग मानते हैं कि रेबीज केवल कुत्तों के काटने से होता है मगर ऐसा नहीं है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से इस बीमारी के वायरस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा कई बार पालतू जानवर के चाटने या खून का जानवर के लार से सीधे संपर्क से भी ये रोग फैलता है। आइए आपको बताते हैं किसी व्यक्ति को कैसे प्रभावित करता है रेबीज और क्या हैं इसके लक्षण और उपचार।

कैसे प्रभावित करता है रेबीज

रेबीज एक तरह का वायरल इंफेक्शन है, जो आतमौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। ये वायरस खतरनाक होता है और अगर समय से इलाज न किया जाए, जो ज्यादातर जानलेवा साबित होता है। रेबीज वायरस किसी व्यक्ति के शरीर को दो तरह से प्रभावित करता है।

  • जब रेबीज वायरस सीधे व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं और उसके बाद व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाए।
  • जब रेबीज वायरस मसल टिशूज (मांसपेशीय ऊतकों) में पहुंच जाते हैं, जहां वो व्यक्ति के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) से बचे रहते हैं और अपनी संख्या बढ़ाते जाते हैं। इसके बाद ये वायरस न्यूरोमस्कुलर जंक्शन के द्वारा नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं।

रेबीज वायरस जब व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं, तो ये दिमाग में सूजन पैदा कर देते हैं, जिससे जल्द ही व्यक्ति कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। इस रोग के कारण कई बार व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है और वो बिना बात उत्तेजित हो जाता है और कई बार उसे पानी से डर लगने लगता है। इसके अलावा कुछ लोगों को पैरालिसिस यानी लकवा भी हो सकता है।

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कैसे फैलता है रेबीज

रेबीज लार से फैलने वाला रोग है। संक्रमित जानवर के लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है, तो ये वायरस फैलता है। व्यक्ति के खून में ये वायरस या तो जानवर के काटने से पहुंचते हैं या पालतू जानवरों के घाव और चोट आदि के चाटने से फैलते हैं। अगर व्यक्ति की त्वचा कहीं भी कटी-फटी नहीं है, तो इस वायरस के फैलने का खतरा नहीं होता है।

क्या हैं रेबीज के लक्षण

रेबीज से ग्रसित व्यक्ति में रेबीज के लक्षण बहुत दिनों के बाद उभरते हैं, ज्यादातर तब, जब व्यक्ति का इलाज मुश्किल हो जाता है। रेबीज के आम लक्षण कुछ इस प्रकार के होते हैं:

  • बुखार
  • सिरदर्द
  • घबराहट या बेचैनी
  • चिंता और व्याकुलता
  • भ्रम की स्थिति
  • खाना-पीना निगलने में कठिनाई
  • बहुत अधिक लार निकलना
  • पानी से डर लगना (हाईड्रोफोबिया)
  • पागलपन के लक्षण
  • अनिद्रा
  • एक अंग में पैरालिसिस यानी लकवा मार जाना

सालों बाद भी दिख सकते हैं रेबीज के लक्षण

रेबीज से संक्रमित होने के एक सप्ताह के बाद या कई सालों बाद लक्षण उभर सकते हैं। ज्यादातर लोगों में रेबीज के लक्षण चार से आठ सप्ताह में विकसित होने लगते हैं। अगर रेबीज से संक्रमित जानवर किसी की गर्दन या सिर के आस-पास काट लेता है तो लक्षण तेजी से उभरते हैं क्योंकि तब ये वायरस व्यक्ति के दिमाग तक जल्दी पहुंच जाते हैं। रेबीज के प्रारंभिक लक्षणों में आमतौर पीड़ित व्यक्ति को उस जगह पर झुनझुनी होती है, जिस जगह जानवर ने उसे काटा है। इसके अलावा बुखार, भूख न लगना और सिरदर्द जैसी शिकायत भी शुरू हो जाती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जानवर ने काटा है, तो उसे जल्द से जल्द चिकित्सक से मिलना चाहिए और एंटीरेबीज टीके लगवाने चाहिए।

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क्या करें अगर जानवर काट ले

जानवरों के काटने पर काटे गए स्थान को तुरंत पानी व साबुन से अच्छी तरह धो देना चाहिए। धोने के बाद काटे गए स्थान पर अच्छी तरह से टिंचर या पोवोडीन आयोडिन लगाना चाहिए। ऐसा करने से कुत्ते या अन्य जानवरों की लार में पाए जाने वाले कीटाणु सिरोटाइपवन लायसावायरस की ग्यालकोप्रोटिन की परतें घुल जाती हैं। इससे रोग की मार एक बड़े हद तक कम हो जाती है, जो रोगी के बचाव में सहायक होती है। जानवर के काटने के तुरंत बाद रोगी को टिटेनस का इन्जेक्शन लगवाना चाहिए। और डॉक्टर की सलाह से काटे गए स्थान का उचित इलाज करना चाहिए।

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