पैरेंट्स के ऐसे व्यवहार से बिगड़ जाते हैं बच्चे, ध्यान रखें ये 5 बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 08, 2018
Quick Bites

  • माता-पिता के व्यवहार के कारण भी कई बार बच्चे बिगड़ते हैं।
  • हमारा दिमाग हमेशा वही काम चुनता है जिसे वो सबसे सही समझता है।
  • ज्यादातर मां-बाप अक्सर उपदेश के मूड में होते हैं।

अक्सर बच्चों के बिगड़ने का कारण उनके दोस्तों या मोबाइल और इंटनेट को मान लिया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि माता-पिता के व्यवहार के कारण भी कई बार बच्चे बिगड़ते हैं? जी हां, ऐसे कई माता-पिता हैं जिनके गलत व्यवहार के कारण उनके बच्चे बिगड़ जाते हैं और गलत काम करने लगते हैं।
बचपन बहुत मासूम होता है और इस अवस्था में बच्चों का दिमाग हर चीज को करके जानना चाहता है। ऐसे में कई बार बच्चों से कोई छोटी-मोटी गलती हो जाती है या उससे कोई सामान टूट जाता है, तो कई मां-बाप बच्चों से बहुत सख्ती से पेश आते हैं। जरूरत से ज्यादा सख्त व्यवहार बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर बुरा असर डालता है। बच्चों की परवरिश करते समय हर मां-बाप को इन 5 बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए।

घर के झगड़ों का असर बच्चों पर

घर परिवार में होने वाले झगड़े, कलह, ब्रेकडाउन आदि बच्चों पर विपरीत असर डालते हैं। वहां बच्चे जल्दी वयस्क हो जाते हैं। माता-पिता को हर समय लड़ते-झगड़ते देखना, उनका अलगाव होना और बच्चों के साथ मारपीट करने वाले माता-पिता के साथ रहने वाले बच्चे झगड़ालू बन जाते हैं। घर में होने वाले तनाव, लड़ाई-झगड़े का असर बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। बच्चों के असमय वयस्क होने से उनकी सोच, उनका मानसिक स्तर, असमय शैक्षिक और शारीरिक परिपक्वता के कारण वह चीजों को जिस आधे-अधूरे ढंग से समझते या जानते हैं। इस सबका उन पर नकारात्मक असर होता है।

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बच्चों पर मार-पीट का असर

क्या आपको पता है हमारा दिमाग हमेशा वही काम चुनता है जिसे वो सबसे सही समझता है। इसमें हमारा वश नहीं है और हम अपने आप ही ऐसा करते हैं। जब बच्चे कोई काम करते हैं, तो वो अपनी समझ के अनुसार करते हैं। गलत काम करने या गलत निर्णय लेने पर आप बच्चों को प्यार से समझाएं या जरूरत हो तो थोड़ा डाटें, मगर मारें कभी नहीं। बच्चों को मारने से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है और वो अगली बार वही गलती होने पर आपसे झूठ बोल सकता है।

ज्यादा गुस्सा करने का असर

बच्चे को ज्यादा डांटे-फटकारें नहीं। जब भी आपका बच्चा रूखा बर्ताव करे या जिस काम के लिए मना किया है वो काम करे, तो उसे प्यार से समझाएं। अगर बच्चा बदतमीजी भी करता है, तो तत्काल थोड़ी सख्ती के साथ डांट दें मगर बाद में उसकी गलती का एहसास दिलाते हुए उसे प्यार से समझाएं और आगे से अच्छे व्यवहार के लिए उसे उसकी मनपसंद चीजों का लालच दें। ज्यादा गुस्सा करने से बच्चे तनाव में आ जाते हैं और खुद भी गुस्सैल हो जाते हैं।

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हरदम उपदेश के मूड में न रहें

ज्यादातर मां-बाप अक्सर उपदेश के मूड में होते हैं और बच्चों को हर छोटी-छोटी बात पर टोकते हैं। अगर आप कभी-कभी बच्चों को डांटते हैं या टोकते हैं, तो टोके जाने का असर उनपर होता है और वो अपनी गलती का एहसास करते हैं। मगर अगर आप हर छोटी-छोटी बात पर उन्हें टोकते हैं और डांटते हैं, तो थोड़े समय बाद बच्चे आपको इग्नोर करने लगते हैं। गलतियां करना किसी काम को सीखने का ही हिस्सा है। जब बच्चे कोई काम गलती करने के बाद सही करना सीखते हैं, तो भविष्य में गलती की संभावना बहुत कम हो जाती है। इसलिए बच्चों को छोटी-छोटी बात पर टोकने के बजाय उन्हें हंसी-मजाक में चीजें समझाएं। हर समय उपदेश के मूड में रहने से बच्चों में चिड़चिड़ेपन की समस्या हो सकती है।

सिर्फ पढ़ते रहने का दबाव ठीक नहीं

बच्चों पर हर समय पढ़ने और कुछ सीखते रहने का ही दबाव न बनाएं। हम जितना देखकर सीखते हैं उससे ज्यादा करके सीखते हैं और जितना करके सीखते हैं उससे कहीं ज्यादा सोचकर सीखते हैं। बच्चों को कल्पना के लिए समय दें। उन्हें टीवी पर कुछ मनोरंजक चीजें जैसे साइंस फिक्शन, कार्टून, एडवेंचर, हिस्ट्री आदि के कार्यक्रम देखने दें, कोर्स से अलग कुछ किताबें पढ़ने दें और आउटडोर गेम्स खेलने दें। सिर्फ पढ़ाई के लिए टोकते रहने से बच्चों का दिमाग पढ़ाई से और ज्यादा उचटने लगता है।

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