Holi 2022: बाजार में बिकने वाले मिलावटी नकली रंगों से बचें, इन तरीकों से करें असली-नकली रंगों की पहचान

बाजार में मिलने वाले नकली और मिलावटी रंगों के इस्तेमाल से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, इन रंगों की पहचान कर इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Mar 14, 2022 18:34 IST
Holi 2022: बाजार में बिकने वाले मिलावटी नकली रंगों से बचें, इन तरीकों से करें असली-नकली रंगों की पहचान

रंगों का त्यौहार होली (Holi) नजदीक आ रहा है, रंग, अबीर और गुलाल भी मार्केट में बिकने लगे हैं। भारत में बड़ी धूमधाम के साथ लोग होली में रंग खेलते हैं। होली के त्यौहार में रंगों के इस्तेमाल से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। बाजार में मिलने वाले जिन रंगों का इस्तेमाल आप कर रहे हैं उनके बारे में भी जान लेना चाहिए। मिलावट के इस दौर में मिलावटी और नकली रंगों का बाजारों में बिकना आम हो गया है। ये रंग हमारी स्किन के लिए बेहद नुकसानदायक माने जाते हैं, ऐसे में बाजार से होली के लिए रंग खरीदते वक्त इस बात  जरूर रखना चाहिए कि कहीं हम मिलावटी या नकली रंग तो नहीं खरीद रहे हैं? पुराने समय में लोग होली में प्राकृतिक या फिर आर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब हानिकारक रासायनिक पदार्थों को मिलकर इन रंगों को बनाया जा रहा है जो स्किन के साथ-साथ आंखों पर भी हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं। आइये जानते हैं होली में रंगों के इस्तेमाल से पहले उनसे जुड़ी जरूरी बातें और बाजार में मिलने वाले असली और नकली या मिलावटी रंगों (Organic and Fake Colors) की पहचान के बारे में।

नकली या मिलावटी रंग (Artificial and Adulterated Colors)

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होली में नकली या मिलावटी रंगों के इस्तेमाल से स्किन से जुड़ी कई समस्याओं के होने का खतरा होता है। आजकल हानिकारक केमिकल के इस्तेमाल से बनने वाले रंग मार्केट में आसानी से बिकते हैं, इन्हें बनाने में भी कम समय लगता है और आर्गेनिक रंगों की तुलना में ये सस्ते भी होते हैं। स्किन के लिए हानिकारक माने जाने वाले इन रंगों के आंख में जाने से बड़ी समस्या हो सकती है। पारा, सल्फेट, लेड ऑक्साइड, तांबा सल्फेट और मैलाकाइट जैसे कई अन्य तरह के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल कर रंगों को बनाया जाता है। इन रंगों में कई तरह के ग्लास पार्टिकल्स और माइका डस्ट आदि भी मौजूद होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इनके इस्तेमाल से स्किन से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। शरीर पर मौजूद चोट या घाव में जाने से ये एक्जिमा और कैंसर के अलावा आंख और त्वचा में जलन, एलर्जी और गंभीर संक्रमण जैसी स्थिति भी पैदा कर सकते हैं।

होली में करें आर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल (Use Organic Colors to Play Holi)

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आर्गेनिक या प्राकृतिक रंग वे होते हैं जिनका निर्माण प्राकृतिक जड़ों, पत्तियों और फूलों से किया जाता है। हालांकि इन रंगों के निर्माण में समय और खर्च दोनों अधिक लगता है लेकिन ये स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते। प्राकृतिक रंगों को बनाने में चुकंदर, मैरीगोल्ड, हिबिस्कस और कपास के फूलों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा हल्दी की जड़ और कई अन्य प्राकृतिक चीजों के इस्तेमाल से इन्हें बनाया जाता है। इनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है इसलिए ये स्किन के लिए नुकसानदायक नहीं माने जाते। आर्गेनिक रंगों से पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता है। आप घर पर आसान तरीकों से होली के लिए आर्गेनिक रंगों का निर्माण खुद भी कर सकते हैं। 

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ऐसे करें असली और नकली रंगों की पहचान (How to Identify Organic and Adulterated Colors)

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नकली, मिलावटी और केमिकल से बने रंगों के इस्तेमाल से स्किन के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इन रंगों में मौजूद ग्लास और डस्ट पार्टिकल्स हवा की गुणवत्ता को भी ख़राब करने का काम करते हैं। होली में रंगों के अलावा गुलाल और अबीर का प्रयोग किया जाता है जिनमें ये पदार्थ मौजूद होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक हवा में पीएम 10 की मात्रा भी इन नकली और मिलावटी अबीर या गुलाल के इस्तेमाल से बढ़ जाती है। इसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों से जुड़ी समस्या का भी खतरा बढ़ जाता है। बाजार में असली और नकली रंगों की पहचान करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं। 

1. पानी में रंग को घोलकर इसकी पहचान की जा सकती है। मार्केट से रंग लेने से पहले इसकी थोड़ी सी मात्रा पानी में डालें अगर आसानी से रंग पानी में घुल जाए तो यह आर्गेनिक या प्राकृतिक रंग हो सकता है। नकली या मिलावटी रंग पूरी तरह से पानी में नहीं घुलते। 

2. ज्यादा चमकीले रंग भी प्राकृतिक नहीं होते हैं। मार्केट में रंगों को खरीदते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आप अधिक चमकीले रंगों को न खरीदें। दरअसल रंगों मं चमकीलापन लाने के लिए इसमें ग्लास के पार्टिकल भी मिलाये जाते हैं।

3. बाजार से रंगों को खरीदते समय इसके निर्माण में उपयोग की कई सामग्रियों के बारे में जरूर पढ़ें। पैकेट में बिकने वाले रंगों को बनाने में इस्तेमाल की गयी सामग्री के बारे में लेबल पर लिखा जाता है। 

4. रंगों की महक से असली और नकली रंगों की पहचान कर सकते हैं। रंगों से अगर पेट्रोल या स्प्रिट की महक आ रही है तो यह मिलावटी रंग हो सकते हैं। 

मिलावटी या नकली रंगों के इस्तेमाल से होने वाली समस्या (Side Effects of Using Adulterated or Fake Colors)

होली में बिकने वाले नकली या मिलावटी रंगों को बनाने में सिंथेटिक और हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। इन रंगों के निर्माण में इस्तेमाल किये जाने वाले मैलाकाइट, कार्सिनोजेनिक, औरमाइन और रोडामाइन जैसे विषाक्त केमिकल बेहद हानिकारक होते हैं। इन रंगों के इस्तेमाल से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

  • - इन रंगों के आंखों में लगने से जलन की समस्या
  • - स्किन में जलन और खुजली
  • - स्किन एलर्जी और इन्फेक्शन
  • - एक्जिमा और कैंसर जैसी बीमारी का खतरा
  • - अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी समस्या का खतरा

 इन आसान तरीकों को अपनाकर आप बाजार में मिलने वाले असली और मिलावटी या नकली रंगों के बीच का फर्क समझ सकते हैं। विषाक्त और हानिकारक रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल कर बनाये गए रंगों के इस्तेमाल से बचें। होली के दौरान इन रंगों के प्रयोग से किसी भी प्रकार की समस्या होने पर चिकित्सक से जरूर संपर्क करना चाहिए। होली का त्यौहार मानाने के लिए बाजार से रंग खरीदते वक्त खुद की सेहत और पर्यावरण को नकली और केमिकल युक्त रंगों से होने वाले नुकसान का ध्यान जरूर रखें। आपकी द्वारा की गयी समझदारी आपके परिवार और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचा सकती है।

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