कैंसर रोगी बीमारी से बचने के लिए न करें फिश ऑयल वाले ओमेगा-3 सप्लीमेंट का सेवन, खतरा घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा

एक शोध में खुलासा हुआ है कि फिश ऑयल से बने सप्लीमेंट कैंसर की रोकथाम में प्रभावी नहीं है। जानें इसकी जगह क्या खाएं। 

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Mar 02, 2020Updated at: Mar 02, 2020
कैंसर रोगी बीमारी से बचने के लिए न करें फिश ऑयल वाले ओमेगा-3 सप्लीमेंट का सेवन, खतरा घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा

एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि ओमेगा-3 फैट से बने सप्लीमेंट कैंसर से सुरक्षा में प्रभावी नहीं हैं और हालांकि ये आंशिक रूप से ही इसके बढ़ने की संभावना को संभावित रूप से बढ़ा सकते हैं। ओमेगा-3 फैट्स का सेवन दुनियाभर में सामान्य रूप से ये मानकर किया जाता है कि ओमेगा-3 कैंसर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करेगा या फिर इसे कम करने का काम करेगा। ईस्ट एंजेलिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए दो सिस्टमेटिक रिव्यू में ये पाया गया कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट सिर्फ कोरोनरी ह्रदय रोगों से होने वाली मौतों और मामलों में मामूली कमी ला सकता है लेकिन ये साथ ही पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। हालांकि इसके फायदे और नुकसान दोनों ही कम हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, अध्ययन में पाया गया कि अगर एक हजार लोग चार वर्षों तक ओमेगा-3 सप्लीमेंट लेते हैं तो 3 लोग ह्रदय रोगों से मरने से बच जाएंगे, छह लोग हार्ट अटैक जैसी कोरोनरी समस्याओं से बचेंगे वहीं इसके सेवन से तीन अतिरिक्त लोग प्रोस्टेट कैंसर के शिकार हो जाएंगे।

 ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर और कोकरेन डेटाबेस ऑफ सिस्टेमैटिक रिव्यूज में प्रकाशित इन दोनों समीक्षाओं में बताया गया कि ओमेगा-2 एक प्रकार का फैट है। अध्ययन के मुताबिक, अच्छे स्वास्थ्य के लिए थोड़ी मात्रा जरूरी है और जब हम नट्स, बीज या फिर सैल्मन जैसी फैटी फिश का सेवन करते हैं तो हमें ये आसानी से उनमें मिल जाता है।

अध्ययन के मुताबिक, ओमेगा-3 फैट्स मेडिकल शॉप पर आसानी से उपलब्ध होने वाली चीज है, जिसको खरीदना और प्रयोग करना बहुत ही आसान है। शोधकर्ताओं ने कुछ व्यस्कों पर 47 ट्रायल किए। इन ट्रायल में वे लोग शामिल थे, जिन्हें कैंसर नहीं था। इसके अलावा इस अध्ययन में वे लोग भी शामिल हुए, जिन्हें कैंसर का जोखिम था, या पहले कभी कैंसर का पता चला था। इसके साथ ही ह्रदय रोगों से संबंधित मामलों और मौतों के सबूत के साथ भी 86 ट्रायल किए गए। 

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अध्ययन के मुताबिक, प्रत्येक समीक्षा के लिए एक लाख से ज्यादा लोगों ने कम से कम एक साल तक ओमेगा-3 फैट्स (फिश ऑयल) का सेवन किया या फिर अपनी इस आदत को बनाए रखा। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में मरने वाले लोगों की संख्या, कैंसर विकसित होने वाले लोगों की संख्या और हार्ट अटैक व स्ट्रोक और अन्य बीमारियों से मरने वाले लोगों की संख्या को भी दर्ज किया।

omega 3

यूईए के नोरविच मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर औऱ अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. ली हूपर ने कहा, ''हमारे पिछले शोध से पता चला है कि फिश ऑयल सहित लंबे समय तक ओमेगा 3 सप्लीमेंट का सेवन चिंता, अवसाद, स्ट्रोक, डायबिटीज या मृत्यु जैसी स्थितियों से रक्षा नहीं करता है।''

उन्होंने कहा, ''ये विशाल सिस्टेमैटिक समीक्षा में लंबी अवधि तक कई हजार लोगों से प्राप्त जानकारी शामिल है। ये बड़ी संख्या में जानकारी स्पष्ट करती है कि अगर हम कई वर्षों तक ओमेगा-3 सप्लीमेंट का सेवन करते हैं तो हम कुछ ह्रदय रोगों का खतरा कम कर सकते हैं लेकिन इसके साथ ही हम कुछ कैंसर के खतरे को धीरे-धीरे बढ़ा देते हैं। इसके सेवन से हमारे समग्र स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव बहुत ही मामूली होगा।''

हूपर ने बताया, "ओमेगा 3 पर ये सबूत ज्यादातर फिश ऑयल सप्लीमेंट के परीक्षणों से प्राप्त हुए हैं, इसलिए ऑयली फिश का स्वास्थ्य प्रभाव अस्पष्ट हैं। ऑयली फिश संतुलित आहार के एक हिस्से के रूप में बहुत ही पौष्टिक भोजन है, जो कि प्रोटीन और ऊर्जा के साथ-साथ सेलेनियम, आयोडीन, विटामिन डी और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व ओमेगा 3 स्रोत से बहुत अधिक है।"

हूपर के मुताबिक, "लेकिन हमने पाया कि कैंसर की रोकथाम या उपचार के लिए ओमेगा 3 ऑयल सप्लीमेंट लेने वाले लोगों में इसका कोई खास प्रदर्शन नहीं है। वास्तव में, हमने पाया कि वे कैंसर के जोखिम को थोड़ा बढ़ा सकते हैं, विशेष रूप से प्रोस्टेट कैंसर को।''

इंडस्ट्रियल फिशिंग के बारे में पर्यावरणीय चिंताओं और महासागरों में मछली के स्टॉक और प्लास्टिक प्रदूषण पर होने वाले प्रभाव को देखते हुए हूपर ने अपनी बात का अंत करते हुए कहा कि फिश ऑयल सप्लीमेंट के रूप में इसकी गोलियां लेना जारी रखना अनुचित है क्योंकि इसका फायदा बहुत कम या फिर न के बराबर ही है।"

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अखरोट

अखरोट ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक बड़ा और प्रमुख स्त्रोत है,  जो हमारी मस्तिष्ट गतिविधियों को बेहतर बनाने का काम करता है। काजू, बादाम, पिस्ता में भी ओमेगा-3 पाया जाता है। नट्स और ड्राई फ्रूट स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के साथ-साथ वजन कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं।

अलसी के बीज

अंग्रेजी भाषा में फ्लैक्स सीड्स कहे जाने वाले अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड का भंडार हैं। डाइट में 28 ग्राम अलसी के बीज शामिल करने से आपको 633 मि.ली ओमेगा 3 फैटी एसिड मिलता है। इसके साथ ही ये बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम कर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का भी काम करते हैं।

सोयाबीन

ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सोयाबीन की एक छोटी कटोरी आपके शरीर में ओमेगा-3 की दैनिक जरूरत की मात्रा को पूरा कर सकती है। इसके साथ ही यूरिक एसिड से परेशान लोगों के लिए भी सोयाबीन बेहद फायदेमंद है।

गोभी और ब्रोकली

हरी सब्जियों में शामिल गोभी ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक बड़ा स्त्रोत है। एक कप पकी हुई गोभी में 280 मिलीग्राम ओमोगा-3 फैट होता है। ब्रोकली और पत्ता गोभी जैसी हरी सब्जियां भी शरीर में ओमेगा-3 की कमी को पूरा कर सकती है।

चिया बीज

अलसी से बीजों के अलावा चिया सीड्स भी ओमेगा-3 फैटी एसिड का प्रमुख स्त्रोत हैं। चिया बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड के अलावा विटामिन्स, मिनरल्स, डायट्री फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं, जो डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारी को कंट्रोल करने के साथ-साथ मस्तिष्क गतिविधियों को बेहतर बनाने का भी काम करते हैं।

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