शिशु को स्तनपान करवाने से पहले नई मां को जान लेनी चाहिए ये बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 06, 2018
Quick Bites

  • स्तनपान मां और बच्चा दोनों के लिए लाभकारी।
  • मां के दूध मे जरूरी पौष्टिक तत्व होते हैं।
  • यह बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाता है।

मां बनना इस दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है। पहली बार मां बनने पर ये खुशी कहीं ज्यादा होती है। इसके साथ ही पहली बार मां बनने पर कई तरह की परेशानियां भी होती हैं। शिशु की देखभाल, उसे स्तनपान कराना, शिशु की साफ-सफाई, उसका स्वास्थ्य आदि कई चीजें मां के जीवन में पहली बार आती हैं। स्तनपान मां और बच्चा दोनो के लिए कई प्रकार से लाभकारी है। मां के दूध मे जरूरी पौष्टिक तत्व सम्मिलित होते है जो आपके बच्चे के स्वास्थ्य वृद्धि और विकास में सहायक होते है। बाजारी खाद्य पदार्थो की अपेक्षा यह पचाने में आसान होता है और इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी होती है। जो आपके बच्चे के प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण और सुदृढ़ करने में सहायक होता है। स्तनपान के लिए अभ्यास जरूरी है और इसे एक दिन में नही सीखा जा सकता आपको निपुण होने के लिए  धैर्य रखने की आवश्यकता है।

मां के लिए स्तनपान कराने के लाभ

  • गर्भावस्था में जो आपका वनज बढ़ जाता है उसे कम करने में यह सहायक होता है।
  • जीवन में अस्थि–सुशिरता रोग के विकसित होने की संभावना कम हो जाती है।
  • स्तन, गर्भाषय, और अण्डाषयी कैंसर होने की संभावना कम होती है।
  • बच्चे के साथ बेहतर संबंध में मदद करता है।
  • बच्चे की वृद्धि और विकास के लिए आर्दष संतुलित पोशण प्रदान करता है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है इसके रूप में यह रोग प्रतिरोधक जो संक्रमण, एलर्जी, और बिमारियो को रोकने में शामिल होता है।
  • स्तनपान करने वाले बच्चो का बेहतर मस्तिश्क विकास और बुद्धि तेज होती है।
  • क्मर्षियल फार्मूलो की खरीद, निप्पल और वार्मिंग स्टरलाइज बोतलो की अपेक्षा स्तनपान सस्ता और आसान है।

स्तनपान की शुरूआत या स्तनपान सीखना

आपके बच्चे के जन्म के बाद आपके स्तनो से एक गाढ़ा पीला पदार्थ निकलता है जिसे कोलोस्ट्रम कहते है। जो आपके बच्चे को जरूरी पोशक तत्व देने में ही नही बल्कि रोगो से लड़ने की क्षमता को भी बढ़ाता है। अगर आप या आपके बच्चे को स्तनपान प्रक्रिया शुरू करने में असमर्थ है तो चिन्ता न करे अभ्यास और धैर्य रखे आपको इसे सीखने की आवष्यकता है। आप अपनी नर्स से स्तनपान कराने का सही तरीका और अपने बच्चे को लेचिंग (चूसने) की सही विधि जान सकते है। स्तनपान कराते हुए दर्द नही होना चाहिए जब आपका बच्चा दूध पीता है तो आपका स्तन आराम का एहसास करता है। अगर आपको दर्द हो रहा है तो ाायद आप इसे ठीक प्रकार से नही कर पा रहे है। थोड़ा रूक कर अपने हाथ की छोटी अंगुली के द्वारा अपने स्तन के आगे के हिस्से को धीरे से उठा कर अपने बच्चे के मसूड़ो के बीच लाने की कौषिष करे । सही तरीका सीखने पर दर्द और निप्पलो के दर्द से बचा जा सकता है।

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खिलाने की आवृति

आप अक्सर अपने बच्चे को स्तनपान कराएं जो वो हर दो से तीन घण्टे मे करना चाहता हैं। प्रत्येक स्तन से दस से पंद्रह मिनट दूध पिलाएं। आप जितना स्तनपान करवाओगें उतना अधिक आपके स्तनो से दूध उत्पादित होने के लिए प्रोत्साहित होगा। भूखे बच्चे के ाुरूआती संकेतो को देखे जैसे रोना देर से भूखा होना का संकेत है। एक चिड़चिड़े और उद्दण्ड बच्चा आसानी से ाांत हो सकता है अगर वह स्तनपान समय पर कर ले। भूखे बच्चे के ाुरूआती संकेतो में हिलना, स्तनपान या होठो का हिलना है।

एक आरामदायक स्थिति को प्राप्त करें

आपको अपने बच्चे के लिए एक आरामदायक स्थिति में होने की जरूरत है। जिससे आपके षिषु  को भी सुविधा का एहसास हो। हाथो और पीठ को सहारा देकर बैठे इससे आप जल्दी नही थकेंगे और किसी प्रकार की पीड़ा का भी अनुभव नही होगा। अपने षिषु को अपने स्तन के करीब लाकर दूध पिलाते हुए आपको कमरदर्द का एहसास नही होगा। जब आप उसे दूध पिला रहे हो तो बच्चे के सिर को सहारा देे।

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स्तनपान प्रक्रिया

  • अपने लिए आरामदायक स्थिति प्राप्त कर लेने के बाद, अपने दूसरे हाथ का प्रयोग अपने बच्चे क मुंह कोे स्तन के पास लाएं।
  • अपने बच्चे का स्वाभाविक रूप से पर्याप्त मुंह खोलकर स्तनो का एक बढ़ा भाग अरोला (निप्पल के आसपास का काला भाग) को उसके मुंह के अन्दर डाले। आपके निप्पल को चूसने और निगलने की गहरी चूसन प्रक्रिया को महसूस करना चाहिए।
  • आपके बच्चे को ठीक प्रकार से निप्पल से दूध पीने में रूकावट हो रही है, अगर आप किसी प्रकार की असुविधा को महसूस कर रहे है आप थोड़ा रूक कर अपने हाथ की छोटी अंगुली के द्वारा अपने स्तन के आगे के हिस्से को धीरे से उठा कर अपने बच्चे के मसूड़ो के बीच लाने की कौषिष करे ।
  • अपने बच्चे को पहली बार अच्छी तरह से स्तन से तब तक दूध पिलाए जब तक आपके स्तन को कोमलता का एहसास नही होता।

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