बार-बार पेशाब और अधिक लगती है प्यास? कहीं आप तो नहीं इस बीमारी के शिकार

क्या कभी आपने नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस के बारे में सुना है। अगर नहीं, तो चलिए आज इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraUpdated at: Nov 12, 2020 15:22 IST
बार-बार पेशाब और अधिक लगती है प्यास? कहीं आप तो नहीं इस बीमारी के शिकार

डायबिटीज के बारे में आपने कई बार पढ़ा होगा और सुना भी होगा, लेकिन क्या कभी नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इंसिपिडस का नाम सुना है। यह एक मरीज के शरीर में होने वाली एक असामान्य स्थिति है, जिसमें पेशाब और प्यास की क्रिया असमान्य हो जाती है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को बार-बार पेशाब और जरूरत से ज्यादा प्यास लगती है। इतना ही नहीं, इस समस्या से ग्रसित लोगों को सोने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके कारण मरीज को रातभर बेचैनी हो सकती है। इसके अलावा नींद ना आने की भी परेशानी हो सकती है। अगर ऐसे मरीज को नींद आ जाती है, तो बिस्तर गीला होने का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है। डायबिटीज मेलेटस का कारण हाई ब्लड शुगर और  इंसुलिन हो सकता  है। यह गुर्दे से संबंधित एक समस्या हो सकती है। आइए जानते हैं नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इंसिपिडस के लक्षण और कारण क्या हैं?

पुरुषों को करता है अधिक प्रभावित

यह एक असामान्य दुर्लभ बीमारी है, जो महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। इससे किसी भी आयु और वर्ग के लोग प्रभावित हो सकते हैं। समय से पहले इस बीमारी के लक्षणों को पहचानकर इसके जोखिमों को कम किया जा सकता है। अगर आपको इस तरह के कोई लक्षण नजर आ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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क्या हैं डायबिटीज इन्सिपिडस (Symptoms of Nephrogenic Diabetes insipidus)

डायबिटीज के समान ही इस बीमारी के लक्षण होते हैं। चलिए जानते हैं इसके प्रमुख लक्षण-

बड़ों में दिखने वाले सामान्य लक्षण

  • यूरिन पीला और पतला होना
  • रात में सोने के बाद बिस्तर गिला कर देना
  • सोने के समय बेचैनी होना।
  • बार-बार पेशाब लगना
  • अधिक प्यास लगना

बच्चों में दिखने वाले लक्षण

  • डायपर बार-बार हैवी होना
  • वजन अचानक से कम होना
  • विकास धीमी गति से होना
  • बिना वजह रोना
  • बुखार, दस्त और उल्टी की परेशानी होना
  • स्किन ड्राई होना
  • कब्ज की शिकायत होना
  • डिहाइड्रेशन की वजह से उलझन और रातभर सोने में परेशानी

अगर इनमें से किसी तरह के लक्षण आपको नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इंसिपिडस के कारण (Causes of Nephrogenic Diabetes insipidus) 

वैसोप्रेसिन या एंटीडायरेक्टिक नामक हार्मोन शरीर के तरह पदार्थ को संतुलित करने में हमारी मदद करता है। ऐसे में जब हम तरल पदार्थों का सेवन कम करते हैं, तो शरीर का एडीएच हार्मोन लेवल बढ़ जाता है, जिसकी वजह से हमारी किडनी यूरिन कम मात्रा में बनाने लगती है।

वहीं, दूसरी ओर जब हम तरह पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं, तो हमारे शरीर में एडीएच हार्मोन का लेवल कम हो जाता है, जिसकी वजह से हमारी किडनी अधिक पेशाब बनाने लगती है। किडनी हमारे खून में मौजूद अपशिष्ट पदार्थों और पानी का अत्यधिक फिल्टर करने लगती है। ऐसे में जब हमारे शरीर का एडीएच हार्मोंन किसी कारण से असंतुलित हो जाता है, तो किडनी पेशाब को संग्रहित करने में असमर्थ हो जाती है और हमारा शरीर अधिक पेशाब निकालने लगता है। इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं, जो हमारे शरीर के एडीएच हार्मोन प्रभावित करते हैं और नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस का कारण बन सकते हैं।

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किन लोगों को होता है अधिक जोखिम

    • महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इंसिपिडस होने का खतरा अधिक रहता है। 
    • अगर परिवार में किसी को यह बीमारी है, तो उनके सदस्यों को होने का खतरा। यानी यह अनुवांशिक रूप से भी हो सकती है। 

कैसे होता है नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस का इलाज?

इस असमान्य बीमारी से ग्रसित मरीजों को डॉक्टर कुछ प्रमुख दवाईयां देते हैं। इसके अलावा मरीज को ऐसी दवाईयों के सेवन से मना करते हैं, जिससे एनडीआई ट्रिगर करता है। मरीज को सामान्य स्थिति में लाने के लिए उनके आहार में कुछ बदलाव किया जाता है। नेफ्रोजेनिक डायबिटीज इन्सिपिडस से ग्रसित मरीजों को डॉक्टर सोडियम और प्रोटीन कम लेने की सलाह देते हैं, ताकि पेशाब को कंट्रोल कर सकें।

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