बच्चों को सजा देने के ये नकारात्मक तरीके डालते हैं उनके जीवन पर बुरा असर, पेरेंट्स के लिए ध्यान देना है जरूरी

बच्चों की गलतियों या व्यवहार को ठीक करने के लिए पेरेंट्स नेगेटिव तरीके से उन्हें पनिश करते हैं, इसका बच्चों पर बुरा असर पड़ सकता है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Nov 18, 2021 19:05 IST
बच्चों को सजा देने के ये नकारात्मक तरीके डालते हैं उनके जीवन पर बुरा असर, पेरेंट्स के लिए ध्यान देना है जरूरी

कहा जाता है कि जैसी बच्चों की परवरिश होती है वे आगे चलकर उसी तरह के इंसान बनते हैं और उनके जीवन में भी परवरिश का अंश जरूर छलकता है। आमतौर पर पेरेंट्स बच्चों की गलतियों को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं। ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों के गलतियां करने पर य्न्हें डांटते हैं या फिर उन्हें सजा देते हैं। मनोविज्ञान के मुताबिक बच्चों को सजा देने या अधिक डांट लगाने का असर उन पर जरूर पड़ता है। बच्चों की परवरिश के दौरान उनके व्यवहार को ठीक करने के लिए पेरेंट्स उन्हें सजा देते हैं या पनिश करते हैं। इसे दो तरह से बांटा गया है, पहला पॉजिटिव पनिशमेंट और दूसरा नेगेटिव पनिशमेंट। नेगेटिव पनिशमेंट का उनके जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। आइये जानते हैं इसके बारे में।

क्या है नेगेटिव पनिशमेंट? (What Is Negative Punishment?)

Negative-Punishment

बच्चों को नेगेटिव पनिशमेंट देना या नकारात्मक तरीके से दंड देना नकारात्मक होता है। पेरेंटिंग के इस सिद्धांत को का अध्ययन मनोवैज्ञानिक बीएफ स्किनर द्वारा साल 1930 में किया गया था। इस सिद्धांत के मुताबिक पेरेंट्स जब बच्चों की हर गलतियों पर पनिशमेंट देते हैं तो इससे उनके व्यवहार पर सकारात्मक असर पड़ने की जगह नकारात्मक असर होता है। आमतौर पर पेरेंट्स हमेशा अपने बच्चों के व्यवहार और उनके जीवन को लेकर चिंतित रहते हैं इसलिए वे बच्चों की गलतियों पर उन्हें पनिश करने का सोचते हैं लेकिन हर बार उन्हें दंड देने या पनिश करने से इसका असर नकारात्मक हो जाता है। एक्सपर्ट्स ऐसा करने की जगह दूसरे तरीकों को अपनाने की सलाह देते हैं। बच्चों को अगर उनकी गलतियों का एहसास करवाना है तो कुछ क्रिएटिव तरीकों को अपनाना जरूरी है। उन्हें सजा देकर आप उन्हें गलतियां करने के और प्रेरित कर सकते है।

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नेगेटिव पनिशमेंट के उदहारण (Examples Of Negative Punishment)

आमतौर पर बचपन में हर बच्चा शरारत जरूर करता है। बच्चों का शरारती होना कुछ मायनों में ठीक भी माना जाता है। लेकिन जब आपका बच्चा किसी चीज के लिए जिद कर रहा हो या फिर वह हमेशा कुछ ऐसी गलतियों को दोहराता हो जो ठीक नहीं है तो उसमें सुधार लाने के लिए आप उसे सजा देने यानी पनिश करने का सोचते हैं। बच्चों को पनिश करने की ये आदतें नेगेटिव पनिशमेंट मानी जाती हैं। 

  • जब बच्चे आपस में खिलौने के लिए लड़ रहे हैं और उसपर पेरेंट्स का उन्हें पनिश करना।
  • बच्चों के बड़े होने पर उन्हें बाहर निकलने पर पनिश करना।
  • बच्चों की छोटी गलती पर उन्हें बुरी तरह से डांटना।

बच्चों पर नेगेटिव पनिशमेंट के प्रभाव (Negative Punishment Effects On Children's)

नकारात्मक तरीके से बच्चों की गलतियों पर उन्हें सजा देने के तरीके को अपनाना बच्चों के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। इसकी वजह से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर होता है। फिजिकल पनिशमेंट बच्चे के व्यवहार को ठीक करने के लिए कोई ऐसा एक्शन होती है जिससे बच्चे को शारीरिक रूप से दर्द या दुख पहुंचाया जाता है। इसके उदाहरणों में बच्चे को थप्पड़ मारना, डंडे से पिटाई करना, बच्चे को खाना या पानी न देना या उन्हें टॉयलेट का प्रयोग न करने देना आदि शामिल होते हैं। इसे नेगेटिव पनिशमेंट की केटेगरी में रखा जाता है। बच्चों पर नेगेटिव पनिशमेंट के ये प्रभाव पड़ सकते हैं।

  • बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर होता है।
  • ऐसा करने से बच्चों के मन में बुरी भावना उत्पन्न हो सकती है।
  • बार-बार ऐसा करने से बच्चे ढीठ हो सकते हैं या आपकी बातों को अनसुना कर सकते हैं।
  • लगातार नेगेटिव पनिशमेंट की वजह से बच्चों में मन में डर या फोबिया हो सकती है।
  • ऐसा करने से बच्चों के मन में हीन भावना पैदा हो सकती है।
  • बच्चे नेगेटिव पनिशमेंट की वजह से बगावती भी हो सकते हैं।

बच्चों की गलतियों को सुधारने के लिए पेरेंट्स भले ही उन्हें सजा देते हों लेकिन आप उनके व्यवहार को ठीक करने के लिए दूसरे तरीके भी अपना सकते हैं। अगर आपका बच्चा बार-बार गलती करता है या ऐसा व्यवहार करता है जिसकी वजह से उसे सजा देना जरूरी है तो सकारात्मक पनिशमेंट का सहारा ले सकते हैं। क्रिएटिव तरीके से बच्चों को पनिश करने से आप उनके व्यवहार को ठीक करने में सफल हो सकते हैं।

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