Natural Treatment Of Epilepsy: इन 4 प्राकृतिक तरीकों से संभव है मिर्गी के दौरों को रोकना, जानें कैसे?

Epilepsy Natural Treatmements: क्‍या आप जानते हैं कि मिर्गी के दौरों को प्राकृतिक उपचारों से रोकना संभव है? नहीं, तो आइए हम बताते हैं!

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtUpdated at: Feb 11, 2020 11:52 IST
Natural Treatment Of Epilepsy: इन 4 प्राकृतिक तरीकों से संभव है मिर्गी के दौरों को रोकना, जानें कैसे?

मिर्गी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान का खुद पर काबू नहीं रह पाता। हालांकि मिर्गी के दौरों को दवाओं के माध्‍यम से कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन यह दवाएं हर किसी के अनुकूल नहीं हो सकती हैं, जिसके वजह से यह लंबे समय में कुछ दुष्‍प्रभावों का कारण बन सकती हैं। यह भी एक बड़ा कारण हो सकता है कि आप अंग्रजी दवाओं को छोड़ वैकल्पिक चिकित्‍सा की ओर रूख करें। इसमें खानपान में परिवर्तन से लेकर पोषक सप्लीमेंट और थैरेपी तक, ऐसे कई विकल्प उपलब्ध हैं, जो आपको मिर्गी के लक्षणों को कम करने और उससे राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि प्राकृतिक चिकित्सा सुरक्षित हैं, लेकिन कभी-कभी डॉक्टर के परामर्श के बाद ही आगे बढ़ना बेहतर होता है। आपका डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आपको बेहतर बता सकता है। मिर्गी के संभावित प्राकृतिक इलाज के लिए यहां 4 विकल्प हैं।

# 1 एक्यूपंक्चर

Acupuncture For Epilepsy

यह मिर्गी के इलाज के पारंपरिक तरीकों में से एक प्रभावी विकल्प के रूप में माना जाता है। एक्यूपंक्चर की प्राचीन चीनी प्रथा मिर्गी सहित कई अन्‍य स्वास्थ्य समस्‍याओं से निपटने में मदद के लिए जानी जाती है।

ऐसा माना जाता है कि शरीर पर सुइयां डालने और खुद को दर्द देने से, उपचार शुरू हो सकता है। यह अभ्यास समय के साथ दौरे की आवृत्ति को कम करने के लिए मस्तिष्क की गतिविधि को लक्षित कर सकता है। यह भी कहा जाता है कि यह उपचार स्वायत्त शिथिलता को बदलकर और पैरासिम्पेथेटिक टोन को बढ़ाकर मिर्गी को नियंत्रण में रख सकता है। हालांकि इस सिद्धांत को साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

# 2 हर्बल उपचार

हर्बल उपचार इन दिनों तेजी से लोकप्रिय हो गए हैं, क्‍योंकि इसके काफी कम ही दुष्‍प्रभाव होते हैं। इसके अलावा, वजन घटाने की बात हो या किसी अन्‍य शारीरिक और मानसिक समस्‍याओं का इलाज करने में यह मददगार हैं। मिर्गी के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटियों की सूची इस प्रकार है:

Herbal Treatment for Epilepsy

  • कामुदिनी 
  • मगवौर्ट
  • मिसल्‍टो 
  • बर्निंग बुश 
  • पियोनी 
  • वलेरियन रूट 
  • हाइड्रोकोटाइल 
  • स्‍कलकैप 
  • कल्‍पवृक्ष 
  • ग्राउंडसेल 

इसके अलावा, कुछ जड़ी-बूटियों से उन लोगों को सख्ती से बचने की आवश्यकता होती है, जिन्हें मिर्गी के कारण स्वास्थ्य और नकारात्मक प्रभावों के साथ उनका हस्तक्षेप होता है।

  • जिंनसेंग 
  • कावा कावा 
  • मरिजुआना 
  • गुआराना
  • कैमोमाइल

इसे भी पढें:  दौरा पड़ने पर रोगी के साथ करें ये 5 काम, तुरंत मिलेगी राहत

# 3 विटामिन और मिनरल्‍स 

कुछ विटामिन और मिनरल्‍स हैं, जो मिर्गी के दौरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालाँकि, ये अकेले काम नहीं करते हैं। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए आपको अपनी निर्धारित दवाओं के साथ होना चाहिए। इसके अलावा, कोई भी सप्लीमेंट लेने से पहले, अपने डॉक्टर से खुराक के बारे में पूछें, जो अनुशंसित मात्रा से अधिक न हो।

Vitamins for Epilepsy

विटामिन बी -6

विटामिन बी 6 का सेवन एक दुर्लभ प्रकार की मिर्गी का इलाज करने के लिए जाना जाता है, जो या तो तब विकसित होता है जब बच्चा गर्भ में होता है या जन्म के बाद ही सही होता है। इस स्थिति को पाइरिडोक्सिन-डिपेंडेंट सीज़्योर कहा जाता है। यह तब होता है, जब आपके शरीर विटामिन बी 6 का मेटाबॉलिज करने में असमर्थ होता है।

विटामिन ई

कुछ मामलों में, मिर्गी के रोगियों में विटामिन ई की कमी भी देखी जाती है क्योंकि यह एंटीऑक्सिडेंट गुणों को बढ़ाता है। विटामिन ई पूरकता उन लोगों में सहायक है, जिनकी स्थिति दवा द्वारा नियंत्रित नहीं होती है।

इसे भी पढें: मिर्गी के दौरे क्‍यों आते हैं, आसान भाषा में जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

# 4 सेल्‍फ-कंट्रोल प्रैक्टिस 

मस्तिष्क की गतिविधियों को नियंत्रित करना दौरे को कम करने के लिए एक कठिन लेकिन प्रभावी प्रक्रिया है। उसके लिए, आपको इसे रोकने में सक्षम होने के लिए मिर्गी के लक्षणों को समझने और पता लगाने की आवश्यकता है। ज्यादातर मामलों में, लोगों को मिर्गी से लगभग 15-20 मिनट पहले लक्षण मिलते हैं, जैसे कि थकान, चिंता, धुंधली नजर आदि।

स्थिति को कंट्रोल करने के लिए आप कुछ सेल्‍फ-कंट्रोल गुरों को अपनाएं: 

  • चलना
  • सोचना या मनन करना
  • अपने शरीर और दिमाग को एक व्यायाम में व्यस्त रखें

Read More Article on Other Diseases In Hindi 

Disclaimer