लॉकडाउन का असर 'बेअसर', डब्लूएचओ ने माना इससे खतरा टलेगा नहीं और बढ़ेगा, जानें क्या है इसके पीछे का असल कारण

coronavirus:डब्लूएचओ का कहना है कि लॉकडाउन से दुनिया के किसी भी देश को ज्यादा फायदा नहीं होगा बल्कि इससे खतरा और ज्यादा बढ़ेगा। 

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaUpdated at: Mar 23, 2020 10:36 IST
लॉकडाउन का असर 'बेअसर', डब्लूएचओ ने माना इससे खतरा टलेगा नहीं और बढ़ेगा, जानें क्या है इसके पीछे का असल कारण

फ्रांस, इटली, न्यूजीलैंड, पोलैंड समेत भारत के कई राज्यों ने कोरोनावायस से अपने नागरिकों को बचाने और समाज को संक्रमण से लड़ने में मदद करने के लिए लॉकडाउन का विकल्प चुना। कई देश लॉकडाउन को कोरोनावायरस से बचाव  का आसान तरीका मान रहे हैं जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के टॉप इमरजेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि दुनिया के तमाम देश कोरोनावायरस को हराने के लिए आसानी से लॉकडाउन नहीं कर सकते हैं। डब्लूएचओ का कहना है कि लॉकडाउन समााप्त होने के बाद वायरस के दोबारा से सामने आने पर उससे बचने के लिए जन स्वास्थ्य उपाय करने की जरूरत है।

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डब्लूएचओ ने बताया वायरस से लड़ने का तरीका

डब्लूएचओ के टॉप इमरजेंसी एक्सपर्ट माइक रयान ने एक इंटरव्यू में बीबीसी को बताया है कि हमें इस बात पर अधिक ध्यान देने और पता लगाने की जरूरत है कि कौन-कौन बीमार है और कौन लोग वायरस के शिकार हैं। इन लोगों का पता लगाकर इन्हें अलग करने और इनके संपर्क में आए लोगों को ढूंढकर उन्हें भी अलग करने की जरूरत है।

लॉकडाउन से खतरा बढ़ा

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से खतरा और बढ़ गया है। अगर हम अब कड़े और मजबूत जनस्वास्थ्य कदम या फिर उपाय नहीं करते हैं तो जब ये सभी प्रतिबंध या पाबंदियां और लॉकडाउन को हटाया जाएगा तब इस बीमारी का खतरा दोबारा से बहुत बढ़ जाएगा।

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ज्यादातर देशों में स्कूल-कॉलेज बंद माइक का कहना है कि यूरोप के ज्यादातर देश और अमेरिका, चीन व एशिया के अन्य देशों की तरह कोरोनावायरस से लड़ने के लिए नए-नए प्रतिबंध लगा रहे हैं, जिसमें ज्यादातर कर्मचारियों को घरों से काम करने़, स्कूल, बार, पब, सार्वजनिक स्थानों और रेस्तरां को बंद कर दिया गया है।

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यूरोप बना महामारी का केंद्र

माइक का कहना है कि चीन, सिंगापुर और साउथ कोरिया का उदाहरण ले लीजिए, जिन्होंने हर संभावित संदिग्ध को जांचने के लिए बड़े-बड़े कदम और प्रतिबंध लगाए। इन देशों को यूरोप जैसे विकसित देश को एक मॉडल मुहैया कराना चाहिए ताकि वह अपने नागरिकों की जान बचा सके। डब्लूएचओ का कहना है कि यूरोप ने महामारी के केंद्र रूप में एशिया का स्थान ले लिया है।

संक्रमण से लड़ने की जरूरत

माइक के मुताबिक, एक बार जब हम संक्रमण को दबा देंगे तब हम वायरस से पार पाने में सफल हो पाएंगे। हमें वायरस से लड़ना होगा न कि उससे भागना होगा।  

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इटली सबसे प्रभावित देश 

इटली, मौजूदा समय में दुनिया का वायरस से सबसे प्रभावित देश है। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चेतावनी दी है कि अगर लोगों ने सामाजिक संवाद यानी की मिलना-जुलना बंद नहीं किया तो ब्रिटेन का स्वास्थ्य तंत्र भी बिगड़ सकता है। ब्रिटेन के गृह मंत्री रॉबर्ट जेनरिक का कहना है कि अगले सप्ताह से जांच के दायरे को बढ़ा दिया जाएगा और उसके बाद अअन्य कदम उठाए जाएंगे।

टीके को बनाने का काम चल रहा

इमरजेंसी एक्सपरर्ट माइक का ये भी कहना है कि कई टीकों पर काम टल रहा है लेकिन अमेरिका में सिर्फ एक का ट्रायल किया गया है। बाजार में टीके की उपलब्धता के बारे में माइक का कहना है कि लोगों को वास्तविकता में जीने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें ये पक्का करने की जरूरत है कि ये बिल्कुल सेफ है और हम इस बारे में कम से कम एक साल  से बात कर रहे हैं।  

उन्होंने बताया कि टीका जरूर आएगा लेकिन हमें इस चीज से बाहर निकलने की जरूरत है और अब हमें वहीं करने की जरूरत है। 

सोर्स (एनडीटीवी)

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