ये 5 लक्षण बताते हैं आपके शरीर में हो गई है ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 16, 2018
Quick Bites

  • अलसी ओमेगा-3 एसिड का सबसे अच्छा स्रोत होता है।
  • ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी होने पर वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है।
  • यह तत्व शरीर में कई कमियों को पूरा कर हमें बीमारियों से बचाता है।

ओमेगा-3 फैट एसिड एक ऐसा जरूरी तत्व है जिसकी हमारे शरीर को सख्त आवश्यकता होती है। यह तत्व शरीर में कई कमियों को पूरा कर हमें बीमारियों से बचाता है। जब शरीर में ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी होने लगती है तो शरीर कई बीमारियों की चपेट में आने लगता है। ओमेगा 3 फैट्स, कॉन्जुगेटड लिनोलेक एसिड और गामा लिनोलेनिक एसिड जैसे कुछ फैट होते हैं जो शरीर के हार्मोन्स में बदलाव कर भूख को कम करते हैं और डाइटिंग करने में भी मददगार होते हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन हार्ट अटैक के जोखिम को भी कम करता है। यह धमनियों के फैलने में सहायता करता है, जिससे उनमें रक्त प्रवाह ठीक ढंग से हो पाता है और एन्जाइम्स फैट को आसानी से शरीर में घुलने में सहायता करते हैं और उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। इससे जरूरत से अधिक चर्बी शरीर में जमा नहीं हो पाती। लेकिन यह फैटी एसिड शरीर में नहीं बनता, इसको भोजन के द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है। शाकाहारी लोगों के लिए अलसी ओमेगा-3 एसिड का सबसे अच्छा स्रोत होता है, जबकि मांसाहारियों को यह मछली के सेवन से मिल जाता है।

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ओमेगा-3 फैट एसिड के लक्षण

  • जब शरीर में ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी होती है तो शरीर पर कई तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं। जैसे त्वचा में खुजली होना, त्वचा से परत का हटना, त्वचा पर खरोंच आदि। 
  • ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी होने पर वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है। बढ़ता मोटापा कई बीमारियों का घर होता है। यह मधुमेह से लेकर पाचन तंत्र की कई सारी बीमारियों का कारण बनता है। इसलिए इससे बचकर रहें।
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड आंखों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। मैकुलर डिजनेशन, सूखी आंख सिंड्रोम और ग्लूकोमा आदि ओमेगा 3 का उचित सेवन करके संभावित रूप से इन तीन बीमारियों को रोका जा सकता है। यूरोप में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग मछली का तेल खाते हैं उनमें मैकुलर डिजनेशन की संभावना कम रहती है।
  • नींद की कमी और ज्यादा सोचना ही अवसाद और डिप्रेशन के कारण नहीं होते हैं। बल्कि खाने में उतार चढ़ाव के चलते भी ये स्थिति पैदा हो जाती है। जब आपके भोजन में ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी होने लगती है तो व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।
  • ब्लड सर्कुलेशन की कमी भी ओमेगा-3 फैट एसिड की कमी का कारण हो सकती है। इस कमी में व्यक्ति काफी थकान महसूस करता है। इसके अलावा तीव्र मासिक धर्म में ऐंठन और महावारी पूर्व स्तन में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

अधिक सेवन भी सही नहीं

यूं तो ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन सेहत के लिए काफी लाभदायक होता है लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से कई प्रकार के नुकसान भी हो सकते हैं। यदि रोजाना तीन ग्राम से ज्यादा ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन किया जाए तो ब्लीडिंग होने की आशंका हो जाती है, वहीं इसके अधिक सेवन से हैमोरैजिक (रक्तस्रावी) स्ट्रोक भी हो सकता है। सात ही, इसका अदिक मात्रा में सेवन करने से डायबिटीज से पीड़ित लोगों के शरीर में लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन (एलपीएल) कॉलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, जो काफी हानिकारक होता है।

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ये आहार दूर करते हैं कमी

  • बेरी न केवल एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है, बल्कि इसमें ओमेगा 3 पाया जाता है। ब्लूबेरी में 174 मिलीग्राम ओमेगा 3 पाया जाता है।
  • इसमें काफी तरह के पोषक तत्वों के अलावा ओमेगा 3 और लिगनेन्स (जो एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है) मौजूद होते हैं। यह घुलनशील और अघुलनशील, दोनों तरह के फाइबर और प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। इसे दिन भर में 15 ग्राम ले सकते हैं।
  • राई में सैचुरेटेड फैट कम होता है और इसमें ओमेगा 6 और ओमेगा 3, दोनों तरह के फैटी एसिड पाए जाते हैं। अन्य तेलों में सोयाबीन, अखरोट, अलसी का तेल भी फायदेमंद है। दिन भर में 3 से 4 चम्मच से ज्यादा न लें।
  • कई विटामिन और पोषक तत्वों से भरा अखरोट ओमेगा 3 का ही नहीं, बल्कि प्रोटीन और डायटरी फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। इसमें मैंगनीज, कॉपर, फॉसफोरस और मैंगनीशियम पाए जाते हैं। हृदय संबंधी परेशानियों में भी एक मुट्ठी अखरोट खा सकते हैं।
  • ओमेगा 3 से भरपूर सोयाबीन का सेवन टोफू, दूध आदि के रूप में किया जाता है। इसमें प्रोटीन, आइसोफ्लेवोन्स, फाइबर, लेसीथिन, काबरेहाइड्रेट्स और माइक्रोन्यूट्रेंट्स पाए जाते हैं। जिन्हें दूध-दही नहीं पचता, वे लोग सोयाबीन का दूध लें। प्रति सौ ग्राम दूध में 40 ग्राम प्रोटीन होता है। 450 एमएल दूध ले सकते हैं।
  • इसमें सैचुरेटेड फैट बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। यह तेल दिल के लिये बहुत स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक होता है क्‍योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड ज्यादा मात्रा में  पाया जाता है।
  • सालमन ओमेगा 3 का सबसे अच्छा स्नोत है। यह फैटी एसिड विटामिन डी, नीयासिन, विटामिन बी 12, विटामिन बी-6 और सेलेनियम का एक बेहतरीन स्रोत है। 100 ग्राम से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। फ्राई करने की बजाय हल्के से रोस्ट या स्टीम कर के ही लें।
  • अगर आप सीफूड प्रेमी है तो प्रॉन, झींगा, सीप आदि का सेवन करें। इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड मात्रा बहुत अधिक होती है। ये जीव ठंडे पानी में रहते हैं जिससे उनके अंदर बहुत सा ओमेगा-3 होता है।  

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