कार्डियक अरेस्ट से हुई कृष्णा राज कपूर की मौत, जानें हार्ट अटैक से कितना खतरनाक है ये रोग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 01, 2018
Quick Bites

  • हार्ट बीट का अचानक रुक जाना कार्डियक अरेस्ट कहलाता है।
  • राजकपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर की कार्डिअक अरेस्ट से मौत हो गई है। 
  • अरेस्ट होते ही अगर सीने को पंप किया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

ऐसा लग रहा साल हेल्थ के लिहाज से साल 2018 बॉलीवुड के लिए सही नहीं है। बॉलीवुड की पहली महिला सुपर स्टार श्रीदेवी की मौत के बाद से ही लगातार एक के बाद बॉलीवुड स्टार्स स्वास्थ्य का जोखिम उठाते दिख रहे हैं। सोमवार को बॉलीवुड के लेजेंड्री एक्टर राजकपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर की कार्डिअक अरेस्ट से मौत हो गई है। इस खबर से बॉलीवुड के साथ पूरा देश शोक में है। कृष्णा राजकपूर की उम्र 87 साल थी। रणधीर कपूर ने पीटीआई से अपनी मां के निधन की जानकारी देते हुए कहा, 'मेरी मां सुबह 5 बजे कार्डिएक अरेस्ट की वजह से चल बसी।

क्या है कार्डियक अरेस्ट

कार्डियक अरेस्ट को सीधे शब्दों में कहें, तो हार्ट बीट का अचानक रुक जाना है। दिल की धड़कन तभी रुकती है जब उसे ऑक्सीजन न मिले यानि मांसपेशी को खून न मिले। दरअसल जब दिल धड़कता है एक विद्युत संवेग यानि बिजली की कौंध पैदा होती है, जिसकी मदद से रक्त हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों में संचारित होता है। कई बार धड़कन अनियंत्रित हो जाए, तो रक्त का संचार प्रभावित होता है और इसका असर शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ सकता है। दिल की धड़कन अनियंत्रित होने की भी कई वजहें हो सकती हैं। जैसे हो सकता है मांसपेशी में कोई समस्या आ गई हो या कि मांसपेशी ठीक हो मगर उसे मिलने वाला खून दूषित हो आदि। 

कार्डियक अरेस्ट दिल की ऐसी बीमारी है जिसमें धड़कन के अनियंत्रित होने से कई बार कुछ समय के लिए दिल खून की पंपिंग करते-करते आराम करने लगता है। ये आराम कितना लंबा हो सकता है इसका कोई अंदाजा नहीं है। कई बार दिल की धड़कन दोबारा शुरू हो जाती है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। मगर ज्यादातर बार ये संभव नहीं होता है क्योंकि दिल की धड़कन जब तक दोबारा शुरू होती है तब तक मस्तिष्क तक ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण उसकी मौत हो चुकी होती है। ऐसे में अगर इंसान के अंग अपना काम शुरू भी कर दें तो बिना मस्तिष्क के उसका शरीर किसी काम का नहीं रह जाता है। इंसान की इसी स्थिति को ब्रेन डेथ कहते हैं।

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हार्ट अटैक से अलग है कार्डियक अरेस्ट

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट का कारण एक हो सकता है लेकिन ये दोनों ही दो अलग-अलग अवस्‍था हैं। हार्ट अटैक होना या हार्ट का काम करना बंद कर देना सुनने में भला एक जैसा लगता हो लेकिन मेडिकल साइंस में दोनों के मायने बिल्‍कुल अलग हैं। असल में हार्ट एक मांसपेशी है जिसे दूसरी मांसपेशी की तरह ऑक्‍सीजन और ब्‍लड सर्कुलेशन की जरूरत होती है और यह काम धमनियों के माध्‍यम से होता है। जब ये धमनियां ब्‍लॉक हो जाती है यानी जब ब्लड की सप्लाई किसी कारण से डिस्टर्ब हो जाती है या फिर प्रभावित होती है और हार्ट अटैक आता है। इस स्थिति में दिल शरीर के दूसरे हिस्सों को ब्लड सप्लाई करता रहता है।

कार्डियक अरेस्ट का इलाज

कार्डियक अरेस्ट होने पर अगर मरीज को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। चूंकि कार्डियक अरेस्ट में दिल कुछ समय के लिए रुकता है और बाद में इसकी धड़कन शुरू होने की संभावना होती है इसलिए अगर मरीज को अरेस्ट होते ही उसके सीने पर जोर देकर दिल को पंप किया जाए तो संभव है कि मरीज की जान बचाई जा सके। ऐसी स्थिति में मरीज के सीने को 100 से 120 बार तक दबाना चाहिए और 30-30 बार दबाने के बाद मरीज की सांसें जांचते रहना चाहिए।

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