आयुर्वेद के अनुसार गर्भावस्था की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्या खाना चाहिए? बता रही हैं डॉ. चंचल शर्मा

प्रेगनेंसी में कौन से पोषक तत्व बेहद जरूरी हैं और उनके लिए आपको किन चीजों का सेवन करना चाहिए, जानें डॉ. चंचल शर्मा से।

डॉ. चंचल शर्मा
Written by: डॉ. चंचल शर्माPublished at: Jan 18, 2021
आयुर्वेद के अनुसार गर्भावस्था की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्या खाना चाहिए? बता रही हैं डॉ. चंचल शर्मा

गर्भवती महिला यदि गर्भावस्था के दौरान आयुर्वेद के अनुसार अपने खानपान तथा जीवनशैली में सुधार करती है तो वो और उसका शिशु दोनों स्वस्थ रहते हैं। एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में पौष्टिक आहार की बड़ी भूमिका होती है। गर्भावस्था में महिला के शरीर में कई सारे बदलाव होते है और गर्भवती महिला को इन परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में उल्टी, मॉर्निंग सिकनेस, मतली जैसी समस्याएं आम होती हैं। इसलिए महिलाओं के शरीर में कई बार कैलोरीज और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जो होने वाले शिशु के लिए खतरनाक हो सकती है।

आमतौर पर महिलाओं को एक दिन में 2100 कैलोरीज लेना की सलाह दी जाती है। लेकिन Food & Nutarian Board के अनुसार गर्भवती महिलाओं 300 कैलोरी अतिरिक्त लेना चाहिए। गर्भावस्था में महिला के गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए अतिरिक्त कैलोरी की आवशयकता होती है।

आयुर्वेद के अनुसार महिला की गर्भवस्था को तीन बराबर चरणों में बाँटा गया है । प्रत्येक चरण तीन महीने का होता है। प्रत्येक चरण को गर्भवस्था की तिमाही के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक चरण में गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान में बदलाव करना पड़ता है। मेडिकल की भाषा में इन तीनों चरणों को पहली तिमाही (First Trimester),  दूसरी तिमाही (Second Trimester) और तीसरी तिमाही (Third Trimester) के नाम से जाना जाता है।

गर्भवती के लिए जरूरी है 4 टाइम का खाना

सुबह का नाश्ता (ब्रेकफास्ट) वैसे तो हर किसी के लिए जरुरी है परंतु गर्भवती महिला के लिए सुबह का नाश्ता बेहद जरुरी होता है। ब्रेकफास्ट छोड़ने पर आप दिन आप थकी हुई तथा सुस्त महसूस करती रहेंगी इसलिए भूल कर भी सुबह का नाश्ता न छोड़ें। आपका नाश्ता हमेशा पौष्टिक खाद्य पदार्थों से भरपूर होना चाहिए। इसके बाद दोपहर के भोजन में भी हेल्दी चीजें खाएं। शाम को स्नैक्स में कुछ प्रोटीन युक्त खाद्य चीजें जैसे- बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट इत्यादि का सेवन करना चाहिए। वहीं रात का खाना हल्का-फुल्का होना चाहिए। लेकिन इन चारों में से किसी भी समय का भोजन या नाश्ता छोड़ें नहीं।

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गर्भावस्था की पहली तिमाही में क्या खाना चाहिए? (Diet Tips for First Trimester of Pregnancy)

गर्भवती महिला को पहली तिमाही में अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद के अनुसार इस डाइट चार्ट को फॉलो करना चाहिए।

कैल्शियम – कैल्शियम माँ एवं बच्चे दोनों के लिए आवश्यक होता है। कैल्शियम के लिए गर्भवती महिला को अपने भोजन में दूध तथा दूध से निर्मित पदार्थ जैसे लस्सी, दही, मक्खन, पनीर इत्यादि को शामिल करना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों के सेवन से पर्याप्त कैल्शियम मिल जाएगा।

आयोडीन – गर्भवती महिला को अपने भोजन में आयोडीन जरुर शामिल करना चाहिए। आयोडीन बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि आप अपने भोजन में आयोडीन नही लेती है तो आपका होने वाला बच्चा मानसिक रुप से कमजोर हो सकता है।

जिंक – जिंक एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसका सेवन यदि आप गर्भवस्था की पहली तिमाही के दौरान करती हैं तो यह आपकी भूख में वृद्दि करता है। यदि आप जिंक युक्त चीजों का सेवन नहीं करती है तो आपको भूख नही लगेगी, जिससे शिशु के विकास में बाधा आती है और गर्भपात होने की संभावना बढ़ती है। जिंक की आपूर्ति के लिए आप हरी सब्जियों का सेवन कर सकती हैं।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में क्या खाना चाहिए? (Diet Tips for Second Trimester of Pregnancy)

जब गर्भवस्था की दूसरी तिमाही (चौथे महीने से लेकर छठवां महीना) की शुरुआत होती है। इस दौरान भले ही आपको भूख न लगे फिर भी आप चार-चार घंटे के अंतराल में कुछ न कुछ जरूर खाती रहें। यह जरुरी नहीं कि आपको भूख नहीं है तो आपके पेट में पल रहे बच्चे को भी भूख न हो। इस दौरान आपको वजन बढ़ने की चिंता छोड़ देनी चाहिए। अपनी डाइट में ये चीजें जरूर शामिल करें-

फोलिक एसिड – फोलिक एसिड का सेवन तो आप तभी से शुरु कर सकती है जब आपके मन में माँ बनने के विचार आ रहे हो या माँ बनने की प्लानिंग कर रही हों। फोलिक एसिड युक्त आहार का सेवन गर्भावस्था की तीनों अवस्थाओं में जरूरी है, लेकिन दूसरी तिमाही में और भी ज्यादा जरूरी है। फोलिक एसिड के सेवन से महिला में गर्भपात तथा बच्चे के जन्म दोष से संबंधित बीमारियों का खतरा कम होता है।  भिंडी, दलिया, काला चना, मटर, राजमा इत्यादि में फोलिक एसिड पाया जा है इसलिए इन सभी को अपने खाने में जरूर शामिल करें।

प्रोटीन - गर्भावस्था मे प्रोटीन का एक बहुत ही महत्तपूर्ण रोल होता है। गर्भावस्था के दौरान ऐसे आहार को चुनें जो पूरी तरह से प्रोटीन युक्त हो। हरी सब्जी, दालें तथा दूध से बने पदार्थों में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसलिए अपने खाने में इन चीजों को सभी को शामिल करें।

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गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में क्या खाना चाहिए? (Diet Tips for Third Trimester of Pregnancy)

आयुर्वेद गर्भवस्था के अंतिम चरण विशिष्ट प्रकार के भोजन करने की सलाह देता है, जिससे गर्भवती महिला तथा शिशु दोनों को प्रसव के दौरान कोई भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

ओमेगा-3 एसिड - गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में ओमेगा-3 एसिड के सेवन से प्रसव के दौरान जोखिम कम होता है। ओमेगा-3  एसिड बच्चे के मस्तिष्क के विकास में सहायक होता है।

आयरन - विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 35 से 50 मिलीग्राम आयरन की जरुरत होती है। आयरन के सेवन से हीमोग्‍लोबिन के स्तर में सुधार होता है। आयरन को यदि आप नियमित तौर पर ले रही होती हैं तो आपके स्वास्थ्य में अच्छा सुधार देखने को मिलता है साथ ही नवजात शिशु कुपोषण के शिकार होने से बच जाता है।

यह सभी आयुर्वेदिक उपाय एवं उपचार आशा आयुर्वेदा की निःसंतानता विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा से बातचीत के दौरान प्राप्त हुए हैं।

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