जलवायु परिवर्तन का बच्चों पर हो रहा है बुरा असर, डिप्रेशन और जानलेवा इंफेक्शन के हो रहे हैं शिकार

मनोवैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों में अब चिंता, दुख और डिप्रेशन जैसी बीमारियों बड़ी तेजी से फैल रही हैं। इसके अलावा पूरे विश्व के बच्चे 'इको-एंजायटी' नाम की मानसिक परेशानी से जूझते नजर आ रहे हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Oct 16, 2019
जलवायु परिवर्तन का बच्चों पर हो रहा है बुरा असर, डिप्रेशन और जानलेवा इंफेक्शन के हो रहे हैं शिकार

जलवायु परिवर्तन आज एक ग्लोबल प्रोब्लम बन चुकी है। पूरा विश्व इस परेशानी से जूझ रहा है। हाल ही में 'स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर' 2019 द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से मौत का आंकड़ा स्वास्थय संबंधी कारणों से होने वाली मौत को लेकर तीसरा सेबसे खतरनाक कारण है। जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों में सबसे ज्यादा मानसिक बीमारियों हैं। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि हमारे बच्चे अब जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो बच्चों में अब चिंता, दुख और डिप्रेशन जैसी बीमारियों बड़ी तेज गति से बढ़ रही हैं। इसके अलावा बच्चों में अब जलवायु परिवर्तन को लेकर एक अजीब सी चिंता पैदा हो रही है, जिसे मनोवैज्ञानिक 'इको-एंजायटी' का नाम दे रहे हैं। दरअसल बच्चों को लगता है कि यह धरती अब उनके रहने लायक नहीं बची है। बच्चों के दिमाग में यह बात घर कर गई है कि जब तक वे बड़े होंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन के कारण यह धरती नहीं बचेगी। इसी को देखते हुए कुछ दिनों पहले ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा है कि "बच्चों को व्यवहार में आ रहे बदलाव का कारण कहीं न कहीं खराब जलवायु भी है।"

रिपोर्ट में इस बात को लेकर चिंता की गई है कि बच्चों की जिन्दगी पर जलवायु परिवर्तन के खतरे के संबंध में पर्याप्त प्रमाण होने के बावजूद इस पर अब भी नीतिगत स्तर पर सार्वजनिक बहस नहीं होती और ना ही कोई पहल कदमी के प्रयास दिखते हैं। बाल अधिकारों की वैश्विक संस्था 'सेव द चिल्ड्रेन द्वारा' जारी 'फीलिंग द हीट-चाइल्ड सरवाईवल इन चेजिंग क्लाइमेट' नामक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर बच्चों की सेहत को सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन से है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दिनों में बच्चों पर जलवायु परिवर्तन का ऐसे असर पड़ सकता है-

डायरिया का खतरा

जलवायु परिवर्तन और स्वास्थय से जुड़े मुद्दों पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं की मानें तो एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में डायरिया के मामलों में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।इसके अलावा जल-संक्रमण से होने वाली अन्य बीमारियों की तादाद में भी बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट के अनुसार डायरिया के ज्यादातर मामलों में मूल कारण साफ-सफाई की कमी और स्वच्छ पेयजल का अभाव है।दुनिया में तकरीबन 1 अरब 30 करोड़ लोगों को स्वच्छ पेयजल नसीब नहीं है और अगर जलवायु परिवर्तन के फलस्वरुप विश्व का तापमान 2 डिग्री संटीग्रेड और बढ़ गया तो 1 अरब 30 करोड़ अतिरिक्त आबादी साफ पेयजल से महरुम होगी। इससे डायरिया और जल के संक्रमण से होने वाली बीमारियों का प्रकोप तेज होगा।

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मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रकोप में इजाफा

इसके अलावा रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन, आबादी की बढ़ोतरी, जमीन के इस्तेमाल के बदलते तरीके और निर्वनीकरण की स्थितियां एक साथ मिलकर मलेरिया और डेंगू जैसी कई बीमारियों के प्रकोप में इजाफा करेंगी और इसका सर्वाधिक शिकार बच्चे होंगे। गौरतलब है कि सालाना 10 लाख बच्चे सिर्फ मलेरिया की चपेट में आकर मरते हैं। इनमें पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की तादाद 80 फीसदी होती है। यदि दुनिया में इसी तरह प्रकृति, जल और वायु के मुद्दों को लेकर लोकचेतना को नहीं बढ़ाया गया तो हम अपने ही बच्चों इन खतरनाक बीमारियों से बचा नहीं पाएंगे।

दिमागी बुखार और जानलेवा इंफेक्शन का फैलना

किसी मक्खी या मच्छर से फैलने वाली नई बीमारियां हर साल पैदा हो रही है, जिससे सबसे बच्चे ज्यादा पीड़ित होते हैं। दिमागी बुखार और मौसमी इंफेक्शन कहीं न कहीं जलवायु परिवर्तन का ही असर है। एकदम से किसी मौसम में फैलने वाले इंफेक्शन किसी खास टेंप्रेचर में ही फैलते हैं। जिस तरह से हम पृथ्वी का दोहन कर रहे हैं, इससे यह सारी बीमारियां और फैलेंगी और हर बार यह नए रूप में आएंगी।

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मानसिक रोग और डिप्रेशन

यह बहुत दुखद है कि आजकल के छोटे-छोटे बच्चे भी मानसिक रोगों का शिकार हो रहे हैं। वह अपने उम्र से ज्यादा मेच्यौर होते हैं और इस तरह वह बड़ी जल्दी ही मानसिक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। अचानक से किसा भी बात पर गुस्सा करना, चिड़चिड़हाट और दुखी हो जाना यह सब मानसिक बीमारियों की तरफ ही संकेत करती हैं। बच्चों में अवसाद या डिप्रेशन जैसी बीमारियां प्रदूषित शहरों में ज्यादा फैल रहीं हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि जलवायु परिवर्तन का सच में बच्चों के मानसिक स्वास्थय पर असर पड़ रहा है।

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