जोड़ों के दर्द से रहना हैं दूर, तो आज से ही खाना शुरू करें ये 1 चीज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 21, 2018
Quick Bites

  • उम्र बढऩे के साथ जोड़ों के दर्द की समस्या भी घेरने लगती है।
  • गर्मियों में रात को सोते समय हल्दी वाले दूध का सेवन करें।
  • गठिया की समस्या हो जाने पर पूरी लाइफस्टाइल अस्त-व्यस्त हो जाती है। 

उम्र बढऩे के साथ-साथ जोड़ों के दर्द की समस्या भी घेरने लगती है। लेकिन अब उम्रदराज ही नही बल्कि कमउम्र के लोगों को भी जोड़ों के दर्द की समस्या होने लगी है। बेहतर तो यही है कि आप शुरुआत से ही इसके प्रति सचेत हो जाएं। गठिया की समस्या हो जाने पर पूरी लाइफस्टाइल अस्त-व्यस्त हो जाती है। आप चाहते हैं कि ये समस्या आपको न हो तो अपने डाइट चार्ट में आज से ही इन चीजों को शामिल कर लें।

  • खाने में प्रतिदिन अदरक का सेवन करें, सर्दियों में अदरक की चाय पीने से भी जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
  • गर्मियों में रात को सोते समय हल्दी वाले दूध का सेवन करें, प्रतिदिन इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
  • जोड़ों के दर्द में लहसुन का सेवन अधिक से अधिक करें इससे काफी आराम मिलता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्याज और लहसुन में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो जोड़ों के दर्द में फायदेमंद होते हैं। इनके नियमित सेवन से जोड़ों केदर्द की शिकायत होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • एक गिलास पानी में एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीने से जोडों के दर्द में काफी आराम मिलता है। इसके अलावा ब्रोकली खाने से भी गठिया में आराम मिलता है। ब्रोकली में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो जोड़ों की सेहत लंबे समय तक बरकरार रखते हैं।
  • पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी न केवल इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है, बल्कि ये जोड़ों की सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसके अलावा सही साइज के जूते पहनकर, एक्सरसाइज करके और मोटापे को नियंत्रित रखकर भी आप जोड़ों के दर्द से राहत पा सकते हैं।
  • विटामिन ई जोड़ों के दर्द के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खासतौर पर बादाम में पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड सूजन और गठिया के लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। बादाम के अलावा मछली और मूंगफली में भी पर्याप्त मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है।

क्या हैं इसके कारण

  • हड्डियों के दर्द का कारणः हड्डियों का दर्द चोट या दूसरी परिस्थितियों के कारण होता है, जैसे-
  • बोन कैंसर(प्राथमिक मैलिग्नेंसी) या वह कैंसर जो हड्डियों तक फैल चुका हो(मेटास्टेटिक मैलिग्नेंसी)
  • हड्डियों को रक्त की आपूर्ति में अवरोध(जैसा कि सिकल सेल एनीमिया में होता है)
  • हड्डियों में संक्रमण(ऑस्टियोमायलिटिस)
  • ल्यूकेमिया(रक्त कैंसर)
  • हड्डियों में खनिज की कमी(ऑस्टियोपोरोसिस)
  • अधिक श्रम
  • जिन बच्चों ने अभी चलना सीखा हो, उनकी हड्डियां टूटना

लक्षण

  • हड्डियों और जोड़ों के दर्द के लक्षण हैं-
  • चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने और यहां तक कि आराम करते समय भी दर्द
  • सूजन और क्रेपिटस
  • चलने पर या गति करते समय जोड़ों का लॉक हो जाना
  • जोड़ों का कड़ापन, खासकर सुबह में या यह पूरे दिन रह सकता है
  • मरोड़
  • वेस्टिंग और फेसिकुलेशन

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